कॉकरोच के सपोर्ट में क्यों आए CJI सूर्यकांत? जुर्माना लगा तो मजिस्ट्रेट की ली क्लास

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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चीफ जस्टिस ने ही पहली बार बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच बताया था जिसके बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर मुहिम खड़ा किया। ये मुहिम इतना कामयाब रहा कि दीपके ने जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट किया और फिर एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

CJI Suryakant
CJI सूर्यकांत ने छात्र को मिले 5 लाख के नोटिस पर नाराजगी जाहिर की है और अधिकारी से जवाब मांगा है।

CJI यानी भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने छात्र को 5 लाख रुपये का नोटिस मिलने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है कि अधिकारी की कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने की हिम्मत कैसे हुई। साथ ही उन्होंने संबंधित अधिकारी से जवाब भी मांगा है। खबर है कि छात्र राजधानी दिल्ली में हुए जंतर मंतर प्रोटेस्ट में गया था, जिसके बाद उसे नोटिस मिला है।

20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में पेपर लीक के खिलाफ छात्रों समेत बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया था। उस दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की थी और किसी भी तरह का ऐक्शन लेने पर रोक लगा दी थी।

लाइव लॉ के अनुसार, सीजेआई सूर्यकांत ने बुधवार को नोएडा एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की तरफ से की गई कार्रवाई पर जमकर नाराज हुए। उन्होंने कहा, 'कैसे किसी मजिस्ट्रेट की आदेश जारी करने की हिम्मत हो गई। हमने साफ-साफ कह दिया था कि किसी भी छात्र के खिलाफ कोई भी जबरन कार्रवाई नहीं होगी। कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।' खबर है कि अधिकारी को कोर्ट में जवाब दाखिल करना होगा।

क्या था मामला

GBU यानी गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के एक छात्र को पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने के लिए नोटिस जारी किया गया है। पुलिस का आरोप है कि छात्र ने अन्य विद्यार्थियों को CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में जाने के लिए तैयार किया था। हालांकि, बाद में नोटिस को वापस ले लिया दया था। यह नोटिस शांति बंधपत्र नोटिस था। छात्र अक्षत त्रिपाठी ने हालांकि, आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि उसने प्रदर्शन में शांतिपूर्ण ढंग से भाग लिया था और उस समय वह विश्वविद्यालय की कक्षाओं में नहीं जा रहा था।

क्या होता है शांति बंधपत्र नोटिस

पीटीआई भाषा के अनुसार, 'शांति बंधपत्र नोटिस' कोई सजा या किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना नहीं होता है। यह एक एहतियाती कदम होता है, जिसके तहत प्रशासन किसी व्यक्ति से यह आश्वासन लेने के लिए आर्थिक बंधपत्र भरवा सकता है कि वह शांति बनाए रखेगा और ऐसी गतिविधियों से दूर रहेगा, जिनसे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

एजेंसी के मुताबिक, यह नोटिस चार सितंबर को ग्रेटर नोएडा आयुक्तालय के तृतीय कार्यकारी मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 130 के तहत जारी किया गया था। यह कार्रवाई सहायक पुलिस आयुक्त की ओर से धारा 126 और 135 के तहत शुरू की गई कार्यवाही के बाद की गई। नोटिस में कहा गया कि ऐसी गतिविधियों से तनाव पैदा हो सकता है और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

जंतर मंतर पर प्रदर्श के कुछ दिनों बाद ही सरकार ने सीजेपी के बैनर तले आंदोलन कर रही जनता की शर्तों को मान लिया था और शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान को हटा दिया गया था। बाद में प्रल्हाद जोशी को इस पद पर नियुक्त किया गया था। उस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक करीब 25 दिनों तक भूख हड़ताल पर थे। सीजेपी ने इस्तीफे के अलावा आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा और केस वापस लेने की मांग की थी।

Nisarg Dixit

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Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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