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आदिवासी का बेटा मेरे बेटे से मुकाबला कर सकता है? आखिरी दिन ऐसा क्यों बोले CJI गवई

आदिवासी का बेटा मेरे बेटे से मुकाबला कर सकता है? आखिरी दिन ऐसा क्यों बोले CJI गवई

संक्षेप:

सीजेआई गवई ने कहा, कि मेरे फैसले को लेकर मेरी काफी आलोचना हुई थी। मैंने वह फैसला लिखते हुए खुद से एक सवाल पूछा था कि क्या एक आदिवासी इलाके में एक आदिवासी के बेटे को मेरे मेटे के साथ मुकाबला करने के लिए मजबूर किया जा सकता है?

Nov 21, 2025 10:57 pm ISTMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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CJI BR Gavai: सीजेआई बीआर गवई का शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में आखिरी कार्य दिवस था। जस्टिस सूर्यकांत देश के अगले प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) होंगे। सीजेआई गवई को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने फेयरवेल दिया। इस कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने शेड्यूल्ड कास्ट (एससी) के आरक्षण से क्रीमी लेयर को रखने वाले अपने फैसले का बचाव किया, फिर चाहे उनके समुदाय से ही उनकी क्यों न आलोचना हुई हो। इस दौरान उन्होंने एक उदाहरण देते हुए पूछा कि क्या एक आदिवासी का बेटा मेरे बेटे से मुकाबला कर सकता है?

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'लाइव लॉ' की रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम में सीजेआई गवई ने कहा, ''उस समय मेरे इस फैसले को लेकर मेरी काफी आलोचना हुई थी। लेकिन मैंने वह फैसला लिखते हुए खुद से एक सवाल पूछा था। वह यह सवाल था कि क्या एक आदिवासी इलाके में एक आदिवासी के बेटे को मेरे मेटे के साथ मुकाबला करने के लिए मजबूर किया जा सकता है, जो अपने पिता की उपलब्धियों की वजह से सबसे अच्छी स्कूली शिक्षा का हकदार है। क्या यह सही मायने में बराबरी होगी?'' पिछले दिनों भी एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीजेआई गवई ने कहा था कि वह अनुसूचित जातियों के आरक्षण में क्रीमी लेयर को शामिल नहीं करने के पक्ष में हैं।

सीजेआई ने बताया कि उस फैसले के समय एक लॉ क्लर्क थे, जोकि महाराष्ट्र के एक अफसर के बेटे थे। वह भी एससी समुदाय से आते थे, उन्होंने मुझसे कहा था कि वह एससी कैटेगरी के तहत मिलने वाले फायदे को नहीं लेंगे, क्योंकि वह काफी प्रिविजेल्ड हैं। उन्होंने कहा, ''उस एक लड़के ने वह बात समझ ली जो राजनेता समझने से मना कर देते हैं।''

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के प्रेसिडेंट विकास सिंह ने सीजेआई गवई के फेयरवेल पर कहा कि सीजेआई बी आर गवई ने बार की इज्जत वापस लाई और हमेशा माना कि बार और बेंच एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने कहा, ''जब वह (CJI गवई) भारत के चीफ जस्टिस बने, तो उन्होंने तुरंत मेंशनिंग को फिर से शुरू किया जो पहले बंद कर दिया गया था। उन्होंने लेटर सर्कुलेशन को फिर से शुरू किया, जो बार में एक बड़ी प्रॉब्लम थी। उन्होंने असल में बार की इज्जत वापस लाई, जो हम सब चाहते हैं। बेसिकली, वकील होने के नाते, हम सिर्फ एक इज्जतदार सुनवाई चाहते हैं, हम चाहते हैं कि हमारे साथ सही बर्ताव हो। ऐसा नहीं है कि हम चाहते हैं कि हमारे मामलों का फैसला हमारे फेवर में हो। हम चाहते हैं कि इस जस्टिस डिलीवरी के प्रोसेस में किसी के साथ सही बर्ताव हो, जो उन्होंने पक्का किया।''

Madan Tiwari

लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन को डिजिटल मीडिया में आठ साल से अधिक का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में यह दूसरी पारी है। राजनीतिक विषयों पर लिखने में अधिक रुचि है। नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स, यूटीलिटी, एजुकेशन समेत विभिन्न बीट्स में काम किया है। लगभग सभी प्रमुख अखबारों के संपादकीय पृष्ठ पर 200 से अधिक आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं। खाली समय में लॉन टेनिस खेलना पसंद है।

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