
रिटायरमेंट के बाद कभी बनेंगे राज्यपाल? जाते-जाते CJI गवई ने कहा, प्रोटोकॉल के हिसाब से...
जब CJI गवई से पूछा गया कि क्या वह कभी किसी राज्य के राज्यपाल का पद स्वीकार करेंगे, इस पर उन्होंने कहा कि नहीं, कभी नहीं। प्रोटोकॉल के हिसाब से सीजेआई का पद गर्वनर के पद से ऊंचा होता है।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) गवई आज (रविवार) अपने पद से रिटायर हो रहे हैं। जस्टिस सूर्यकांत सोमवार को अगले सीजेआई के रूप में पद की शपथ लेंगे। रिटायरमेंट के अपने आखिरी दिन सीजेआई गवई ने साफ किया कि वह भविष्य में कोई पद नहीं लेंगे। साथ ही, हेट स्पीच के मामलों पर कानून बनाने की वकालत की। सीजेआई गवई ने बताया कि वह कभी भी गवर्नर भी नहीं बनेंगे, क्योंकि प्रोटोकॉल के हिसाब से सीजेआई पद बड़ा होता है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई गवई से पूछा गया कि हेट स्पीच के बढ़ते मामलों पर आपकी क्या राय है, तो उन्होंने जवाब दिया कि यह सरकार को तय करना है, लेकिन हेट स्पीच पर एक कानून बनाने की जरूरत है। सीजेआई गवई ने मीडिया से बात करते हुए पोस्ट रिटायरमेंट के सवाल पर कहा, ''मैंने यह साफ कर दिया है कि मैं रिटायरमेंट के बाद कोई पद नहीं लूंगा। मैं आदिवासियों के लिए काम करना चाहूंगा। मैं ज्यादातर दिल्ली में ही रहूंगा।'' जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कभी किसी राज्य के राज्यपाल का पद स्वीकार करेंगे, क्योंकि उनके पिता भी गवर्नर रहे थे। इस पर जस्टिस गवई ने कहा कि नहीं, कभी नहीं। प्रोटोकॉल के हिसाब से सीजेआई का पद गर्वनर के पद से ऊंचा होता है।
बता दें कि जस्टिस सूर्यकांत सोमवार को भारत के 53वें चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ लेंगे। वह जस्टिस बी आर गवई की जगह लेंगे, जो आज शाम पद छोड़ रहे हैं। जस्टिस सूर्यकांत को 30 अक्टूबर को अगला सीजेआई नियुक्त किया गया था और वह करीब 15 महीने तक इस पद पर रहेंगे। वह 9 फरवरी, 2027 को 65 साल की उम्र होने पर पद छोड़ देंगे।
भारत के 52वें प्रधान न्यायाधीश गवई ने अपने छह महीने के कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं, जिनमें वक्फ कानून के प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगाना, न्यायाधिकरण सुधार कानून को रद्द करना और केंद्र को परियोजनाओं को बाद में हरित मंजूरी देने की अनुमति देना शामिल है। शुक्रवार का दिन प्रधान न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति गवई का अंतिम कार्य दिवस था। वह न्यायमूर्ति केजी बालाकृष्णन के बाद भारतीय न्यायपालिका का नेतृत्व करने वाले दूसरे दलित न्यायाधीश थे। अपने अंतिम कार्य दिवस पर मिले सम्मान से अभिभूत न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि वह एक वकील और न्यायाधीश के रूप में चार दशकों की यात्रा पूरी करने के बाद पूर्ण संतुष्टि की भावना के साथ तथा “न्याय के छात्र के रूप में संस्थान छोड़ रहे हैं।

लेखक के बारे में
Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन को डिजिटल मीडिया में आठ साल से अधिक का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में यह दूसरी पारी है। राजनीतिक विषयों पर लिखने में अधिक रुचि है। नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स, यूटीलिटी, एजुकेशन समेत विभिन्न बीट्स में काम किया है। लगभग सभी प्रमुख अखबारों के संपादकीय पृष्ठ पर 200 से अधिक आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं। खाली समय में लॉन टेनिस खेलना पसंद है।
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