Hindi NewsIndia NewsCJI designate Surya Kant says Justice delivery system must offer unwavering assurance to women
हर महिला को भरोसा हो, न्याय व्यवस्था पर क्या बोले जस्टिस सूर्यकांत

हर महिला को भरोसा हो, न्याय व्यवस्था पर क्या बोले जस्टिस सूर्यकांत

संक्षेप:

भारत के आगामी चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि हर महिला को यह भरोसा होना जरूरी है कि न्याय व्यवस्था उसके साथ खड़ी है। जस्टिस सूर्यकांत रविवार को उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (जेटीआरआई) लखनऊ में थे।

Sun, 2 Nov 2025 10:41 PMDeepak लाइव हिन्दुस्तान, लखनऊ
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भारत के आगामी चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि हर महिला को यह भरोसा होना जरूरी है कि न्याय व्यवस्था उसके साथ खड़ी है। जस्टिस सूर्यकांत रविवार को उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (जेटीआरआई) लखनऊ में थे। वह यहां आयोजित ‘कानूनी सहायता के माध्यम से प्रजनन स्वायत्तता में बाधाओं को दूर करना’ विषय पर एक संवेदनशीलता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

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कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ, इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण भंसाली, जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता, जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस राजन रॉय भी उपस्थित थे। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हालात कैसे भी हों, प्रत्येक महिला यह आत्मविश्वास पाने की अधिकारी है कि न्याय व्यवस्था उसके साथ दृढ़ता से खड़ी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की उपलब्धियों की सराहना की और एआई चैटबॉट ‘न्याय मार्ग’ की शुरुआत पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पहल लाभार्थियों और उनके अधिकारों के बीच की दूरी को कम करेगी।

जस्टिस विक्रम नाथ ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी समुदाय की प्रगति उसकी महिलाओं की प्रगति से मापी जाती है। उन्होंने समाज में महिलाओं की स्थिति का जिक्र किया और ‘संकल्प’ कार्यक्रम जैसे प्रयासों की सराहना की, जो प्रजनन स्वायत्तता से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता को बढ़ावा देते हैं। जस्टिस अरुण भंसाली ने कहा कि यह कार्यक्रम और ‘न्याय मार्ग’ चैटबॉट, न्याय तक पहुंच को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि दुष्कर्म पीड़िताओं, विशेषकर नाबालिगों को न केवल हिंसा का आघात झेलना पड़ता है, बल्कि उन्हें अनचाही गर्भावस्था, सामाजिक कलंक और भावनात्मक तनाव का बोझ भी उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि न्याय केवल निर्णयों में ही नहीं, बल्कि उन संवेदनाओं में निहित है, जिनसे हम असहाय अवस्था में हमारे पास आने वालों को संभालते हैं। कार्यक्रम के तकनीकी सत्र की अध्यक्षता इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अजय भानोट ने की।

इस अवसर पर जस्टिस सूर्यकांत ने उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ स्थित नव-निर्मित प्रेक्षागृह ‘स्पंदन’ का उद्घाटन किया। यह अत्याधुनिक सभागार प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सम्मेलनों और जन-जागरूकता अभियानों के लिए निर्मित किया गया है।