Hindi NewsIndia NewsChorus on Vaishno Devi medical college after MBBS course is spiked by NMC, student alleges influenced by politics
15 मिनट पहले बता किया निरीक्षण, रद्द कर दी MBBS की मान्यता; NMC के फैसले पर भड़के शिक्षक-छात्र

15 मिनट पहले बता किया निरीक्षण, रद्द कर दी MBBS की मान्यता; NMC के फैसले पर भड़के शिक्षक-छात्र

संक्षेप:

मंगलवार को NMC ने मान्यता रद्द की और इसके अगले दिन यानी बुधवार (7 जनवरी) को कॉलेज प्रशासन ने छात्रों से कहा कि वे फिलहाल अपने घर लौट जाएं। इससे पूरे कैंपस में निराशा और गुस्से का माहौल है।

Jan 07, 2026 10:45 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, कटरा (जम्मू-कश्मीर)
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जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज (SMVDIME) के MBBS कोर्स की मान्यता रद्द होने की खबर सुर्खियों में छाई हुई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड (MARB) ने श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को दिया गया अनुमति पत्र न्यूनतम मानकों का पालन नहीं करने पर वापस ले लिया है। इस फैसले से वहां नामांकन पाए छात्रों में आक्रोश है। उनका आरोप है कि ये फैसला राजनीति से प्रभावित है। छात्रों का कहना है कि उनके साथ ऐसा कैसे हो सकता है?”

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मंगलवार को NMC ने मान्यता रद्द की और इसके अगले दिन यानी बुधवार (7 जनवरी) को कॉलेज प्रशासन ने छात्रों से कहा कि वे फिलहाल अपने घर लौट जाएं। इससे पूरे कैंपस में निराशा और गुस्से का माहौल है। छात्र इस बात पर रोष जता रहे हैं कि इस कॉलेज में बेहतरीन इन्फ्रास्ट्रक्चर है, बावजूद इसके कार्रवाई की गई है।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों से बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए एक छात्र ने कहा, “ऑपरेशन थिएटर से लेकर लाइब्रेरी तक, हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर जम्मू-कश्मीर के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों से बेहतर है। यह फैसला कैंपस के बाहर की राजनीति का नतीजा है।” छात्रों और शिक्षकों का इशारा श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति की ओर था, जो आरएसएस और बीजेपी से जुड़े करीब 60 संगठनों का समूह बताया जा रहा है। यह समिति कॉलेज में मुस्लिम छात्रों के दाखिले का विरोध कर रही थी।

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दरअसल, कॉलेज के पहले एमबीबीएस बैच में 50 छात्रों में से 44 मुस्लिम हैं। समिति का कहना था कि कॉलेज की स्थापना वैष्णो देवी मंदिर में हिंदू श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे से हुई है, इसलिए कश्मीर के मुस्लिम छात्रों को यहां से हटाया जाना चाहिए। बाद में समिति ने कॉलेज को ही बंद करने की मांग शुरू कर दी।

छात्रों की पीड़ा

एक छात्र ने कहा, “हमें कहा गया है कि सरकार के फैसले तक हॉस्टल खाली कर के घर चले जाएं। हम यहां से जाना नहीं चाहते, भले ही हमें किसी और सरकारी कॉलेज में एडजस्ट करवा दिया जाए। यहां जो सुविधाएं और देखभाल मिली, वह शायद राज्य के टॉप मेडिकल कॉलेजों में भी न मिले।” एक अन्य छात्रा ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि बीमार होने की वजह से वह प्रैक्टिकल मिस कर बैठी थी, लेकिन शिक्षकों ने उसे दोबारा सिखाया। उसने कहा, “मैडम ने मेरा हाथ पकड़कर समझाया कि डिसेक्शन में क्या छूटा था?”

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NMC का पक्ष

मंगलवार देर रात NMC ने लेटर ऑफ परमिशन (LoP) वापस लेते हुए कहा कि कॉलेज में गंभीर खामियां हैं क्योंकि वहां शिक्षकों की संख्या में 39% कमी है, जबकि ट्यूटर, डेमॉन्स्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट्स की 65% कमी है और OPD में 50% से भी कम मरीज हैं। कमियों में बेड ऑक्यूपेंसी को 45% और ICU बेड ऑक्यूपेंसी को 50% बताया गया है। NMC ने यह भी कहा कि कुछ विभागों में प्रैक्टिकल और रिसर्च लैब नहीं हैं, लेक्चर थिएटर मानकों पर खरे नहीं उतरते और लाइब्रेरी में सिर्फ 50% किताबें व ज़रूरी जर्नल ही उपलब्ध हैं। हालांकि NMC ने यह भी कहा कि NEET के ज़रिये दाखिला ले चुके छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपरन्यूमेरेरी सीटों पर एडजस्ट किया जाएगा।

कॉलेज प्रशासन का पलटवार

दूसरी तरफ, कॉलेज प्रशासन और फैकल्टी मेंबर्स ने NMC की रिपोर्ट को पूरी तरह से झूठ और मज़ाक बताया है। एक अधिकारी ने दावा किया कि लाइब्रेरी में 75 नहीं बल्कि 2,713 किताबें हैं, सिर्फ 2 नहीं बल्कि 480 प्रिंट जर्नल, 392 राष्ट्रीय ई-जर्नल और 9,900 अंतरराष्ट्रीय ई-जर्नल मौजूद हैं। यह भी दावा किया गया है कि कॉलेज में दो नहीं बल्कि 8 ऑपरेशन थिएटर हैं और मरीजों के लिए अलग-अलग वार्ड उपलब्ध हैं।

Shri Mata Vaishno Devi Medical College

कॉलेज प्रशासन का आरोप है कि 2 जनवरी को मात्र 15 मिनट की सूचना पर निरीक्षण किया गया, वह भी सर्दियों की छुट्टियों के दौरान, जब करीब 50% फैकल्टी कैंपस से बाहर थे। एक अधिकारी ने कहा, “टीम पहले से ही फैसला करके आई थी। वे प्रदर्शनकारियों को खुश करना चाहते थे, लेकिन इसके लिए हमारे संस्थान की छवि खराब कर दी गई।”

बाहर जश्न, अंदर मायूसी

NMC के इस फैसले से जहां कैंपस के अंदर छात्र और शिक्षक भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं, वहीं कॉलेज के बाहर श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के सदस्य ढोल-नगाड़ों के साथ मिठाइयां बांटते नज़र आए। उन्होंने NMC के फैसले को “सनातन धर्म की जीत” बताया। करीब 350 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस मेडिकल कॉलेज में अब तक लगभग आधा बजट इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च हो चुका है लेकिन अब कॉलेज और उससे जुड़े सैकड़ों लोगों का भविष्य अनिश्चितता में फंस गया है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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