चीन ने अरुणाचल सीमा पर बसा लिए 450 गांव, 'चिकन नेक' पर सीधी नजर; क्या बोली भारतीय सेना?

Mar 11, 2026 09:51 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सेना ने LAC, खासकर अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चीन द्वारा तेजी से बनाए जा रहे 'जियाओकांग' गांवों को लेकर चिंता जताई है। साथ ही, सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को लेकर सेना ने अपनी तैयारियों की अहम जानकारी साझा की है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

चीन ने अरुणाचल सीमा पर बसा लिए 450 गांव, 'चिकन नेक' पर सीधी नजर; क्या बोली भारतीय सेना?

अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चीन की बड़ी साजिश उजागर हुई है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के पास चीन ने सैकड़ों 'खुशहाल गांव' बसाए हैं, जिनकी संख्या 400 से ज्यादा बताई जा रही है। ये गांव न केवल नागरिक बस्तियां हैं, बल्कि इनमें दोहरे उपयोग की क्षमता है, यानी ये सैन्य उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल हो सकते हैं। भारतीय सेना के उप प्रमुख (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने इसकी जानकारी दी। घई ने 'यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया' (USI) के सहयोग से आयोजित असम राइफल्स के वार्षिक सेमिनार में पूर्वोत्तर की सुरक्षा चुनौतियों पर महत्वपूर्ण बातें शेयर कीं। इस सेमिनार का विषय था- पूर्वोत्तर के लिए सुरक्षा चुनौतियां: मूल्यांकन और आगे का रास्ता। इस कार्यक्रम में उन्होंने चीन के सीमावर्ती गांवों, सिलीगुड़ी कॉरिडोर की संवेदनशीलता, बांग्लादेश के साथ कूटनीतिक हालात और भारत द्वारा किए जा रहे बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के विकास पर विस्तार से बात की।

अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चीन के 'जियाओकांग' गांव

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार चीन ने पिछले दो दशकों में बहुत तेजी से सड़क, रेल, पुल और बांधों का निर्माण किया है। चीन ने उत्तरी सीमाओं पर लगभग 628 'जियाओकांग' या 'खुशहाल गांव' बनाए हैं। इनमें से लगभग 72% (करीब 450 गांव) भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की सीमाओं के पार स्थित हैं।

इन 450 गांवों में से लगभग 90% अकेले अरुणाचल प्रदेश की सीमा के उस पार बनाए गए हैं। लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि ये बस्तियां बहुत तेजी से बन रही हैं और इनमें से कई उन इलाकों में हैं जिन्हें लेकर दोनों देशों के बीच विवाद है, जो भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) और बांग्लादेश का अस

पश्चिम बंगाल में स्थित 22 किलोमीटर चौड़ा और 60 किलोमीटर लंबा सिलीगुड़ी कॉरिडोर (जिसे चिकन नेक भी कहा जाता है) पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोड़ता है। इसकी संवेदनशीलता इसलिए ज्यादा है क्योंकि यह तिब्बत के चुम्बी घाटी के बहुत करीब है। चुम्बी घाटी उसी डोकलाम के पास है जहां 2017 में भारत और चीन के बीच गतिरोध हुआ था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में बांग्लादेश के साथ भारत के रिश्तों की अनिश्चित दिशा ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है। सेना अधिकारी ने कहा कि इस कॉरिडोर को सुरक्षित करना बेहद जरूरी है। इसके लिए यहां बड़ी संख्या में बलों को तैनात किया गया है। साथ ही, सतह के ऊपर और अंडरग्राउंड (भूमिगत) दोनों तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम हो रहा है। पहले चरण में 24 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड सुरंग बनाई जा रही है, जिसे 62 किलोमीटर तक बढ़ाया जाएगा, ताकि सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नीचे से रेल संपर्क स्थापित किया जा सके।

पूर्वोत्तर में भारत का बुनियादी ढांचा विकास

हालांकि चीन ने बहुत तेजी से विकास किया है, लेकिन भारत भी पूर्वोत्तर में तेजी से रणनीतिक परियोजनाओं को पूरा कर रहा है। इनमें अरुणाचल की सेला (Se La) सुरंग, ब्रह्मपुत्र नदी पर बने पुल, असम का बोगीबील रेल-सड़क पुल, लोहित नदी पर पुल और मोरान राजमार्ग पर बनी आपातकालीन लैंडिंग सुविधा शामिल हैं। ये केवल विकास की परियोजनाएं नहीं हैं, बल्कि इनका रणनीतिक उपयोग भी है। ये सेना के लिए रसद पहुंचाने में आने वाली बाधाओं को कम करती हैं और जरूरत पड़ने पर बलों की तेजी से तैनाती में मदद कर सिलीगुड़ी कॉरिडोर को मजबूती प्रदान करती हैं।

भारत-म्यांमार सीमा पर फेंसिंग (बाड़बंदी)

लेफ्टिनेंट जनरल घई ने बताया कि मैदानी चुनौतियों के बावजूद म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का काम चल रहा है। अगले पांच वर्षों में इसमें काफी काम पूरा हो जाने की उम्मीद है। यह कदम मुख्य रूप से घुसपैठ और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी प्रमुख चुनौतियों को रोकने में मददगार साबित होगा।

असम राइफल्स के महानिदेशक (DG) का बयान

असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेरा ने कहा कि पूर्वोत्तर का भूगोल, कठिन इलाके, सामाजिक विविधता और लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमाएं इसे देश के बाकी हिस्सों से बिल्कुल अलग बनाती हैं। उन्होंने कहा कि दशकों तक उग्रवाद, जातीय तनाव और बाहरी प्रभावों का सामना करने के बाद, आज पूर्वोत्तर की स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर है। हालांकि, उन्होंने एक नई चुनौती की ओर इशारा करते हुए कहा कि पहले दुश्मनों और खतरों की सीमाएं स्पष्ट थीं, लेकिन आज के सुरक्षा और रणनीतिक परिदृश्य में चीजें थोड़ी अस्पष्ट हो गई हैं।

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