'भारत की ब्रह्मोस मुसीबत पैदा करने वाली है', चीन से लेकर तुर्की तक मच गया हड़कंप; कोई तोड़ नहीं

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
Follow us on Google News
share

भारत की आक्रामक 'डिफेंस डिप्लोमेसी' से चीन और तुर्की में हड़कंप है। साउथ चाइना सी में वियतनाम-फिलीपींस को ब्रह्मोस और तुर्की के दुश्मनों को पिनाका रॉकेट देकर भारत ने वैश्विक रक्षा समीकरण बदल दिया है।

china turkey in panic

भारत की रक्षा नीति और कूटनीति में पिछले कुछ वर्षों में एक बड़ा और आक्रामक बदलाव आया है। भारत अब केवल हथियारों का खरीदार नहीं रहा, बल्कि वह अपने रणनीतिक हितों को साधने के लिए हथियारों का एक प्रमुख निर्यातक बन चुका है। भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और बढ़ते रक्षा निर्यात ने अंतरराष्ट्रीय चर्चा छेड़ दी है। चीनी विशेषज्ञों ने भारत की ब्रह्मोस मिसाइल को “अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का ट्रबलमेकर” तक बता दिया है, जबकि तुर्की मीडिया में भारत द्वारा आर्मेनिया, ग्रीस और साइप्रस को हथियार सप्लाई करने पर चिंता जताई जा रही है।

चीन का डर: ब्रह्मोस को क्यों माना जा रहा है 'ट्रबलमेकर'?

साउथ चाइना सी में चीन की विस्तारवादी नीतियों को रोकने के लिए भारत ने उन देशों को हथियारबंद करना शुरू कर दिया है, जिनका चीन के साथ सीमा और समुद्री विवाद है।

सिंगापुर में आयोजित 'शांगरी-ला डायलॉग' में 30 मई को भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल का सौदा हो चुका है। इसके अलावा, इंडोनेशिया के साथ भी लगभग 450 मिलियन डॉलर का ब्रह्मोस सौदा अंतिम चरण में है। इससे पहले भारत फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल की डिलीवरी कर चुका है। पहला बैच अप्रैल 2024 में और उसके बाद के बैच 2025 में पहुंचे।

चीन की चिंता का कारण साफ है। ब्रह्मोस की स्पीड 2.8 मैक यानी आवाज की गति से लगभग तीन गुना है। इसमें 'फायर एंड फॉरगेट' मतलब- दागो और भूल जाओ तकनीक है। चीनी रक्षा विशेषज्ञों और थिंक टैंक ने खुले तौर पर ब्रह्मोस को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक "ट्रबलमेकर" (परेशानी खड़ी करने वाला) करार दिया है। उनका मानना है कि फिलीपींस और वियतनाम के पास ब्रह्मोस आने से चीनी नौसेना के लिए साउथ चाइना सी में अपनी मनमानी करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

चीनी विशेषज्ञ ब्रह्मोस को दक्षिण चीन सागर में अपनी “परिधि” पर खतरा मानते हैं। फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया को निर्यात से चीन के 9-डैश लाइन दावों पर दबाव बढ़ेगा। 2021 में LAC पर ब्रह्मोस तैनाती पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

क्या है चीन के 9-डैश लाइन का दाव?

नाइन-डैश लाइन- दक्षिण चीन सागर में चीन द्वारा खींची गई एक विवादित U-आकार की काल्पनिक रेखा है। चीन इसके आधार पर इस क्षेत्र के लगभग 90% हिस्से पर अपने ऐतिहासिक अधिकारों का दावा करता है, जो फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया और ब्रुनेई जैसे पड़ोसी देशों के समुद्री क्षेत्रों से टकराती है। यह रेखा पहली बार 1947 में चीन (कुओमिन्तांग सरकार) द्वारा जारी किए गए एक नक्शे में दिखाई गई थी। तब इसे '11-डैश लाइन' कहा जाता था, जिसे बाद में घटाकर 9 कर दिया गया।

अब चीनी विश्लेषण की घबराहट इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि ब्रह्मोस की गति, सटीकता और मारक क्षमता किसी भी रक्षात्मक संतुलन को बदल सकती है। असल में, यह भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति (Quad और ASEAN भागीदारी) का हिस्सा है, जो चीन की बढ़ती दखलअंदाजी का जवाब है। ब्रह्मोस क्षेत्रीय देशों को अपनी संप्रभुता की रक्षा करने की क्षमता देता है, न कि आक्रामकता।

तुर्की की बौखलाहट: अर्मेनिया, ग्रीस और साइप्रस को भारत का समर्थन

तुर्की लंबे समय से कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का खुला समर्थन करता आया है। इसके जवाब में भारत ने कूटनीतिक रूप से तुर्की की दुखती रगों पर कड़ा प्रहार किया है। तुर्की मीडिया और विश्लेषक भारत को “तुर्की के दुश्मनों को हथियार” देने का आरोप लगा रहे हैं। आर्मेनिया, ग्रीस और साइप्रस इनमें सबसे आगे हैं। 2020 में नागोर्नो-करबाख युद्ध के बाद भारत आर्मेनिया का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर बन गया था। लगभग 2 अरब डॉलर के सौदे हुए जिनमें Akash SAM, Pinaka MLRS, ATAGS तोपें, Swathi रडार और एंटी-ड्रोन सिस्टम शामिल हैं। आर्मेनिया रूस पर निर्भरता कम कर रहा है और Azerbaijan-Turkey-Pakistan गठबंधन के खिलाफ क्षमता बढ़ा रहा है।

देशभारत का दांवतुर्की को नुकसान
अर्मेनियाभारत ने पिनाका रॉकेट लॉन्चर, स्वाति रडार और आर्टिलरी गन अर्मेनिया को बेचे हैं।अर्मेनिया का सीधा युद्ध अजरबैजान से है, जिसे तुर्की का पूरा सैन्य समर्थन (बायरक्तर ड्रोन आदि) प्राप्त है। भारत के हथियारों से तुर्की-अजरबैजान के हौसले पस्त हुए हैं।
ग्रीस भारत और ग्रीस के बीच रक्षा अभ्यास और सैन्य सहयोग बढ़ा है।भूमध्य सागर में ग्रीस और तुर्की कट्टर दुश्मन हैं। ग्रीस का साथ देकर भारत तुर्की को घेर रहा है।
साइप्रस रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर और कूटनीतिक समर्थन।तुर्की ने उत्तरी साइप्रस पर अवैध कब्ज़ा किया हुआ है। भारत साइप्रस की संप्रभुता का पुरजोर समर्थन कर रहा है।

तुर्की के मीडिया में भारत के इन कदमों को लेकर भारी चिंता और 'पैनिक' देखा गया है। उनका मानना है कि भारत अब पाकिस्तान को कश्मीर पर समर्थन देने की कीमत सीधे तुर्की से वसूल रहा है। भारत ने 'प्रो-एक्टिव डिफेंस डिप्लोमेसी' अपना ली है।

जो देश भारत के हितों (जैसे कश्मीर) के खिलाफ बोलते हैं, भारत अब उनके पड़ोसियों और दुश्मनों को सैन्य रूप से मजबूत कर रहा है। चीन को साउथ चाइना सी में फिलीपींस-वियतनाम के जरिए और तुर्की को अर्मेनिया-ग्रीस के जरिए घेरना भारत की इसी नई "आक्रामक और यथार्थवादी" विदेश नीति का हिस्सा है।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

Amit Kumar

डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।


अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

और पढ़ें
Hindi News , इंडिया न्यूज़ , आज का मौसम , विधानसभा चुनाव और Sawan 2026 से जुड़ी ताज़ा खबरों व पल-पल के अपडेट के लिए लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े रहें। UP Chunav 2027 , UP Vidhan Sabha Seats और UP Vidhan Sabha Candisates से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण खबरें और जानकारी यहां पढ़ें। सभी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ऐप अभी डाउनलोड करें।