चीन का खतरनाक खेल, भारतीय सीमा से 800 KM दूर गुपचुप बढ़ा रहा परमाणु जखीरा; क्या प्लान?
चीन अरुणाचल प्रदेश से महज 800 किलोमीटर दूर सिचुआन प्रांत की पहाड़ियों में गुपचुप तरीके से अपना परमाणु शस्त्रागार तेजी से बढ़ा रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, उपग्रह चित्रों से साफ दिख रहा है कि जिटोंग और पिंगटोंग जैसी गुप्त सुविधाओं में बड़े पैमाने पर विस्तार हो रहा है।

चीन अरुणाचल प्रदेश से महज 800 किलोमीटर दूर सिचुआन प्रांत की पहाड़ियों में गुपचुप तरीके से अपना परमाणु शस्त्रागार तेजी से बढ़ा रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, उपग्रह चित्रों से साफ दिख रहा है कि जिटोंग और पिंगटोंग जैसी गुप्त सुविधाओं में बड़े पैमाने पर विस्तार और आधुनिकीकरण हो रहा है। यह चीन का परमाणु कार्यक्रम का तेज विकास है, जो अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बन चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, यह वृद्धि रूस और अमेरिका के बाद सबसे तेज गति से हो रही है, और इससे वैश्विक परमाणु संतुलन पर गहरा असर पड़ सकता है। इससे आगे केवल रूस (लगभग 5400) और अमेरिका (लगभग 5100-5200) हैं। चीन अब 2030 तक 1000 से अधिक परमाणु हथियारों का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों में दक्षिण-पश्चिमी चीन के सिचुआन प्रांत के पहाड़ों में स्थित 'गुप्त परमाणु सुविधाओं' में विस्तार और उन्नयन के कार्य स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं, जो अरुणाचल प्रदेश से लगभग 800 किलोमीटर दूर हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, हजारों वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और श्रमिकों ने पहाड़ी आंतरिक क्षेत्रों में एक 'आंतरिक परमाणु साम्राज्य' का निर्माण किया था। लेकिन 1980 के दशक में तनाव कम होने के बाद कई प्रयोगशालाओं का आकार घटा दिया गया या उन्हें बंद कर दिया गया। इनके कर्मचारी पास के मियानयांग में स्थित नई प्रयोगशाला में स्थानांतरित हो गए। हालांकि, पिछले दो दशकों में स्थिति बदल गई है।
भौगोलिक खुफिया विशेषज्ञ रेनी बाबियारज ने इन बदलावों को 'तेज विकास' करार दिया। उन्होंने कहा कि चीन भर में विभिन्न परमाणु स्थलों पर विकास की गति 2019 के आसपास से तेज हो गई है। बाबियारज ने कहा कि इन स्थलों पर जो जमीनी बदलाव हम देख रहे हैं, वे वैश्विक महाशक्ति बनने के चीन के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप हैं। परमाणु हथियार इसका एक अभिन्न अंग हैं। वहीं, हार्वर्ड विश्वविद्यालय के कैनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट के भौतिक विज्ञानी हुई झांग ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि यहां उच्च विस्फोटकों की एक परत है और उसी समय उत्पन्न होने वाली शॉक वेव केंद्र में ही विस्फोट कर देती है। इसे परिपूर्ण बनाने के लिए विस्फोट परीक्षणों की आवश्यकता है। इस स्थल में लगभग दस बास्केटबॉल कोर्ट के आकार का एक अंडाकार परीक्षण क्षेत्र शामिल है।
पेंटागन के नवीनतम वार्षिक अनुमान के अनुसार, 2024 के अंत तक चीन के पास 600 से अधिक युद्धक हथियार थे और 2030 तक यह संख्या 1000 तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि यह अमेरिका और रूस के हजारों युद्धक हथियारों की तुलना में कम है, लेकिन इसकी वृद्धि की गति चिंताजनक है। विदेश विभाग के पूर्व अधिकारी और अब मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के परमाणु सुरक्षा नीति केंद्र में वरिष्ठ फेलो मैथ्यू शार्प ने कहा कि ये घटनाक्रम 'चिंताजनक' हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि इन विषयों पर वास्तविक संवाद के बिना, जिसकी कमी है, यह कहना वास्तव में मुश्किल है कि यह किस दिशा में जा रहा है, और यह मेरे लिए खतरनाक है, क्योंकि अब हम एक चिंताजनक प्रवृत्ति रेखा की सबसे खराब स्थिति की व्याख्या के आधार पर प्रतिक्रिया देने और योजना बनाने के लिए मजबूर हैं। इससे स्वाभाविक रूप से अमेरिका के साथ तनाव बढ़ गया है, खासकर जब वाशिंगटन और मॉस्को के बीच आखिरी प्रमुख द्विपक्षीय शस्त्र नियंत्रण संधि की अवधि समाप्त हो गई है, जिससे परमाणु हथियारों पर कोई बाध्यकारी वैश्विक सुरक्षा उपाय नहीं बचे हैं। उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स को कहा कि हमें यह नहीं पता कि कितने युद्धक हथियार बनाए गए हैं, लेकिन हमें केवल संयंत्र का विस्तार दिखाई दे रहा है।

लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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