अमेरिका ने अंतरिक्ष में उतारे ‘खतरनाक हथियार’! भड़क गए चीन-रूस, इस रेस में भारत कहां खड़ा?
अमेरिका के अंतरिक्ष में ऑन-ऑर्बिट हथियार तैनात करने के दावे पर चीन और रूस ने कड़ी आपत्ति जताई है। दोनों देशों ने अंतरिक्ष को हथियारों और युद्ध का मैदान बनाने से बचने की अपील की। जानें भारत कहां खड़ा है?

अमेरिका की ओर से अंतरिक्ष में ‘ऑन-ऑर्बिट’ हथियार तैनात करने की बात सामने आई है। इसके बाद चीन और रूस ने कड़ा विरोध जताया है। दोनों देशों ने कहा है कि अंतरिक्ष को हथियारों और युद्ध का मैदान बनाने से बचना चाहिए।
अमेरिकी स्पेस फोर्स के एक प्रवक्ता ने सोमवार को बताया कि अमेरिका के पास ऐसे ‘ऑन-ऑर्बिट स्पेस कंट्रोल वेपन्स’ हैं, जो किसी शत्रु की कार्रवाई से अमेरिकी संयुक्त सैन्य बलों की रक्षा करने में सक्षम हैं। हालांकि, अमेरिका ने इन हथियारों और उनकी क्षमताओं के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी।
चीन ने अमेरिका को दी अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ रोकने की सलाह
अमेरिका के इस ऐलान के बाद चीन ने अंतरिक्ष के हथियारीकरण को लेकर चिंता जताई। चीन ने कहा कि अंतरिक्ष को युद्ध का मैदान बनाने और वहां हथियारों की होड़ शुरू करने से बचना चाहिए।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने एक प्रेस ब्रीफिंग में अमेरिका से अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार रोकने और अंतरिक्ष में युद्ध की तैयारी बंद करने की अपील की।
रूस भी अमेरिका के कदम से नाराज
रूस ने भी अमेरिका के इस कदम की आलोचना की है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि बाहरी अंतरिक्ष को किसी भी तरह के हथियारों से मुक्त रखा जाना चाहिए। पेस्कोव ने कहा कि रूस अंतरिक्ष के पूर्ण सैन्यीकरण को खत्म करने की दिशा में व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग जारी रहने की उम्मीद करता है।
क्या कर सकता है अमेरिका का ‘ऑन-ऑर्बिट’ हथियार?
अमेरिका ने अपने अंतरिक्ष हथियार की क्षमताओं के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है। अमेरिकी स्पेस फोर्स के मुताबिक, ‘स्पेस कंट्रोल’ में अंतरिक्ष क्षेत्र पर नियंत्रण और वहां किसी प्रतिद्वंद्वी की क्षमताओं को प्रभावित करने के लिए काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक तरीकों का इस्तेमाल शामिल है। अमेरिका ने कहा है कि इन क्षमताओं का इस्तेमाल आक्रामक और रक्षात्मक, दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
अमेरिका ने अंतरिक्ष में हथियार क्यों भेजे?
अमेरिकी स्पेस फोर्स ने चीन और रूस को अंतरिक्ष में संभावित खतरे के तौर पर देखा है। अमेरिका का कहना है कि चीन अपनी सैन्य आधुनिकीकरण रणनीति के तहत अंतरिक्ष और काउंटर-स्पेस क्षमताओं को विकसित और संचालित कर रहा है। वहीं, रूस अंतरिक्ष को युद्ध का क्षेत्र मानता है और उसका मानना है कि भविष्य के संघर्षों में अंतरिक्ष पर प्रभुत्व निर्णायक भूमिका निभाएगा।
अंतरिक्ष के सैन्यीकरण की शुरुआत अंतरिक्ष की दौड़ के शुरुआती दौर से ही मानी जाती है। 1957 में सोवियत संघ के स्पुतनिक को कक्षा में भेजे जाने के बाद अमेरिका और सोवियत संघ ने अंतरिक्ष को हथियार बनाने और उपग्रहों को नष्ट करने के तरीकों की खोज शुरू कर दी थी।
अंतरिक्ष की इस होड़ में भारत कहां है?
भारत ने मार्च 2019 में मिशन शक्ति के तहत एंटी-सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण के दौरान लो-अर्थ ऑर्बिट में एक सैटेलाइट को नष्ट कर अपनी एंटी-सैटेलाइट क्षमता का प्रदर्शन किया था। इसके साथ भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद ऐसा करने में सक्षम दुनिया का चौथा देश बना।
इस मिशन को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अंजाम दिया था। संगठन ने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) इंटरसेप्टर मिसाइल विकसित की थी, जिसने लो-अर्थ ऑर्बिट में मौजूद भारतीय ऑर्बिटिंग टारगेट सैटेलाइट को ‘हिट टू किल’ मोड में सफलतापूर्वक निशाना बनाया था। इंटरसेप्टर मिसाइल तीन चरणों वाली थी, जिसमें दो ठोस रॉकेट बूस्टर थे। मिशन के सभी उद्देश्य पूरे किए गए थे।


