BRICS के लिए चीन बना रहा प्लान, 2026 के अध्यक्ष भारत से कर डाली समर्थन की मांग

Mar 09, 2026 06:42 am ISTNisarg Dixit भाषा
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पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के कारण भारत-चीन संबंधों में पांच वर्षों तक शिथिलता आ गई थी लेकिन मोदी और शी के बीच हुई दो शिखर वार्ताओं के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों के सामान्य होने की प्रक्रिया शुरू हुई।

BRICS के लिए चीन बना रहा प्लान, 2026 के अध्यक्ष भारत से कर डाली समर्थन की मांग

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने रविवार को बीजिंग में कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे को 'प्रतिद्वंद्वियों के बजाय साझेदार' और 'खतरे के बजाय अवसर' के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा है कि चीन और भारत का BRICS में समर्थन करना चाहिए। वांग ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दोनों देशों को बिना किसी हस्तक्षेप के संबंधों को बेहतर बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा निर्धारित मार्ग का पालन करना चाहिए।

वांग ने कहा कि मोदी और शी की पिछले साल अगस्त में तियानजिन में सफल बैठक हुई थी। उन्होंने कहा, '2024 में कजान में हुई उनकी बैठक से मिली नयी शुरुआत को आगे बढ़ाते हुए तियानजिन शिखर सम्मेलन ने चीन-भारत संबंधों में और सुधार किया।' उन्होंने कहा, 'सभी स्तरों पर नए सिरे से सक्रिय हुई बातचीत, द्विपक्षीय व्यापार में एक नया रिकॉर्ड और लोगों के बीच निकट आदान-प्रदान देखकर हमें बेहद खुशी हो रही है। इन सभी से दोनों देशों की जनता को ठोस लाभ हुए हैं।'

कैसा नजरिया चाहे चीन

वांग ने संबंधों के भविष्य के स्वरूप पर कहा कि दोनों देशों को 'एक-दूसरे के प्रति प्रतिद्वंद्वी के बजाय भागीदार के रूप में और खतरे के बजाय अवसर के रूप में' सही रणनीतिक दृष्टिकोण बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा, 'दोनों पक्षों को अच्छे पड़ोसी के संबंधों और मित्रता को बनाए रखना चाहिए तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता की संयुक्त रूप से रक्षा करनी चाहिए तथा विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।'

ग्लोबल साउथ का हवाला

वांग ने कहा, 'एक-दूसरे के महत्वपूर्ण पड़ोसी और 'ग्लोबल साउथ' के सदस्य होने के नाते, चीन और भारत के बीच गहन सभ्यतागत संबंध हैं और वे व्यापक साझा हितों को साझा करते हैं।' 'ग्लोबल साउथ' से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं।

दखल से दूर रहना चाहिए, चीन बोला

चीनी विदेश मंत्री ने कहा, 'आपसी विश्वास और सहयोग दोनों देशों के विकास के लिए लाभकारी है जबकि विभाजन और टकराव एशिया के पुनरुत्थान के लिए हानिकारक है।' उन्होंने विस्तार से बताए बिना कहा कि दोनों पक्षों को नेताओं द्वारा निर्धारित मार्ग का पालन करना चाहिए और हस्तक्षेप को दूर करना चाहिए।

ब्रिक्स में मांगा समर्थन

उन्होंने कहा कि भारत और चीन को 'ब्रिक्स' शिखर सम्मेलन की मेजबानी में एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए। भारत इस वर्ष शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है, जबकि चीन 2027 में इसकी मेजबानी करेगा।

दुनिया की अग्रणी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह 'ब्रिक्स' में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका मूल सदस्य हैं लेकिन बाद में सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया, इंडोनेशिया और ईरान को शामिल कर इसके सदस्य देशों का विस्तार किया गया।

बिगड़े और फिर सुधरने लगे संबंध

पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के कारण भारत-चीन संबंधों में पांच वर्षों तक शिथिलता आ गई थी लेकिन मोदी और शी के बीच हुई दो शिखर वार्ताओं के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों के सामान्य होने की प्रक्रिया शुरू हुई। दोनों पक्षों ने वीजा और उड़ान सेवाएं फिर से शुरू करने के साथ-साथ अपने संबंधों को सामान्य बनाने के लिए कई कदम उठाए।

Nisarg Dixit

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Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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