Hindi NewsIndia NewsChief Justice of India Bhushan Ramkrishna Gavai Overwhelmed by rich tributes on his last working day
विदाई के दिन भावुक हो गए CJI गवई, बोले- इस संतोष के साथ कोर्ट रूम छोड़ रहा हूं कि…

विदाई के दिन भावुक हो गए CJI गवई, बोले- इस संतोष के साथ कोर्ट रूम छोड़ रहा हूं कि…

संक्षेप:

जस्टिस गवई ने 14 मई को मुख्य न्यायाधीश के तौर पर छह महीने से अधिक कार्यकाल के लिए शपथ ली थी। वह 23 नवंबर, 2025 को पद छोड़ेंगे और शुक्रवार को उनका आखिरी कार्य दिवस था।

Nov 22, 2025 05:06 am ISTJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई शुक्रवार को उनके लिए आयोजित विदाई समारोह में भावुक हो गए। CJI गवई ने अपने विदाई भाषण कहा कि वह वकील और न्यायाधीश के रूप में करीब चार दशक की अपनी यात्रा के समापन पर संतोष और संतृप्ति की भावना के साथ कोर्ट रूम से जा रहे हैं। बता दें कि CJI गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

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जस्टिस गवई ने अपने विदाई समारोह के दौरान एक पीठ के समक्ष कहा, ‘‘आप सभी को सुनने के बाद, और खासकर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि और कपिल सिब्बल की कविताओं और आप सभी की गर्मजोशी भरी भावनाओं को जानने के बाद, मैं भावुक हो रहा हूं।’’ इस पीठ में देश के अगले मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विनोद चंद्रन भी थे।

इस संतुष्टि के साथ जा रहा हूं कि…

भावुक दिख रहे प्रधान न्यायाधीश ने रस्मी पीठ के समक्ष विधि अधिकारियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और युवा वकीलों से खचाखच भरे कोर्ट रूम में कहा, ‘‘जब मैं इस अदालत कक्ष से आखिरी बार निकल रहा हूं तो पूरी संतुष्टि के साथ निकल रहा हूं, इस संतोष के साथ कि मैंने इस देश के लिए जो कुछ भी कर सकता था, वह किया है। धन्यवाद। बहुत-बहुत धन्यवाद।’’

विदाई के दिन क्या बोले जस्टिस गवई?

जस्टिस गवई, केजी बालकृष्णन के बाद दूसरे दलित मुख्य न्यायाधीश हैं। उन्होंने कहा, “मेरा हमेशा से मानना है कि हर कोई, हर न्यायाधीश, हर वकील, उन सिद्धांतों से चलता है जिन पर हमारा संविधान काम करता है, यानी बराबरी, न्याय, आजादी और भाईचारा। मैंने संविधान के दायरे में रहकर अपना कर्तव्य अदा करने की कोशिश की, जो हम सभी को बहुत प्यारा है।”

40 साल से ज्यादा का सफर

जस्टिस गवई ने 14 मई को मुख्य न्यायाधीश के तौर पर छह महीने से अधिक कार्यकाल के लिए शपथ ली थी। वह 23 नवंबर, 2025 को पद छोड़ेंगे और शुक्रवार को उनका आखिरी कार्य दिवस था। अपनी यात्रा के बारे में बताते हुए, प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “जब मैं 1985 में (कानून के) पेशे में आया, तो मैंने लॉ स्कूल में एडमिशन लिया। आज, जब मैं पद छोड़ रहा हूं, तो मैं न्याय के एक छात्र के तौर पर पद छोड़ रहा हूं।” उन्होंने एक वकील से उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और आखिर में भारत के प्रधान न्यायाधीश बनने के अपने 40 साल से ज़्यादा के सफर को संतोषजनक बताया।

साथियों ने की तारीफ

समारोह के दौरान उनके कई वकीलों और जजों ने जस्टिस गवई की न्यायपालिका पर छोड़ी गई छाप को याद किया। मुख्य न्यायााधीश की तारीफ करते हुए जस्टस सूर्यकांत ने कहा, ‘‘वह एक सहकमी से कहीं ज्यादा रहे…। वह मेरे भाई और विश्वस्त हैं, और बहुत ईमानदार इंसान हैं।’’ उन्होंने कहा, उन्होंने धैर्य और गरिमा के साथ मामलों को संभाला। उन्होंने युवा वकीलों को हिम्मत दी। उनकी सख्ती हमेशा हास्य से भरी होती थी…। एक भी दिन ऐसा नहीं जाता था जब वह उन्होंने किसी हठी वकील को जुर्माना लगाने की धमकी न दी हो, लेकिन उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया।’’

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अटॉर्नी जनरल ने बताया ‘भूषण’

कोर्टरूम में मौजूद अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी ने ‘भूषण’ का अर्थ आभूषण या साज-सज्जा बताते हुए कहा कि जस्टिस गवई ने न्यायपालिका और कानून की दुनिया को सजाया है। वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उनसे एक न्यायाधीश के तौर पर हुई मुलाकात को याद करते हुए कहा, “आप एक इंसान के तौर पर कभी नहीं बदले।” कपिल सिब्बल ने भी CJI गवई की तारीफ करते हुए कहा कि उनके सफर ने दिखाया है कि एक आदमी अपने न्यायिक करियर के सबसे ऊंचे मुकाम पर पहुंचकर भी एक आम आदमी की सादगी बनाए रख सकता है।

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Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari
जागृति ने 2024 में हिंदुस्तान टाइम्स डिजिटल सर्विसेज के साथ अपने करियर की शुरुआत की है। संत जेवियर कॉलेज रांची से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन करने बाद, 2023-24 में उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा हासिल किया। खबरें लिखने के साथ साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और अर्थव्यवस्था की खबरों को पढ़ना पसंद है। मूल रूप से रांची, झारखंड की जागृति को खाली समय में सिनेमा देखना और सिनेमा के बारे में पढ़ना पसंद है। और पढ़ें
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