
व्यापार चुनौतियों से कैसे निपटेगा भारत? मुख्य आर्थिक सलाहकार ने दिखाया रास्ता
CEA ने कहा कि अंतिम लक्ष्य वैश्विक प्रभाव है, जहां दुनिया बिना सोचे भारतीय उत्पाद खरीदे। बिना मजबूत निर्यात प्रतिबद्धता के रुपया मजबूत नहीं हो सकता। सफल राज्यों का उदाहरण देते हुए उन्होंने निर्यात हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बीच भारत में तत्काल स्वदेशीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि जब व्यापार पारस्परिक नहीं रह जाता, बाजार तटस्थ नहीं रहते और सप्लाई चेन राज्य शक्ति के औजार बन जाते हैं, तो स्वदेशी को नीति उपकरण बनाना चाहिए। राष्ट्रीय मुख्य सचिवों के सम्मेलन में उन्होंने 6-10 क्षेत्रों में तत्काल स्वदेशीकरण और 5 प्रमुख क्लस्टर जैसे सेमीकंडक्टर, रक्षा निर्माण आदि में रणनीतिक कमी को दूर करने की बात कही। वैश्विक व्यापार में अमेरिकी टैरिफ, चीन की निर्यात लाइसेंसिंग और यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म जैसी बाधाओं का हवाला देते हुए उन्होंने आत्मनिर्भरता को जरूरी बताया।
नागेश्वरन ने स्वदेशीकरण के लिए तीन सिद्धांत बताए। इनमें स्वदेशी इकोसिस्टम का निर्माण प्रमुख नियामक सुधारों से, वैश्विक दृष्टि वाली नीति अपनाना और निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाना शामिल हैं। उन्होंने खाद्य तेल, दालें, उर्वरक इनपुट, क्रिटिकल केमिकल्स, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम उपकरण जैसे टियर-1 क्षेत्रों को गैर-वार्ता योग्य बताया। अन्य क्षेत्रों में निर्माण क्रेन, ईवी मोटर्स, बैटरी सेल आदि शामिल हैं। 5 क्लस्टर में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, प्रिसिजन कैपिटल गुड्स, बैटरी सेल, इंडस्ट्रियल केमिकल्स और रक्षा निर्माण पर फोकस करने की सलाह दी। उन्होंने पुरानी नियामक बाधाओं को हटाकर उद्यमी मानसिकता अपनाने पर बल दिया।
निर्यात हिस्सेदारी बढ़ाने पर दिया जोर
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि के साथ बढ़ते आयात को निर्यात से वित्तपोषित करना होगा। चीन से विश्व आयात का आधा हिस्सा मात्र 50 ग्लोबल ब्रांड्स की सप्लाई चेन से आता है, इसलिए भारत को इनको यहां लंगर करने की जरूरत है, जैसा स्मार्टफोन में किया गया। अंतिम लक्ष्य वैश्विक प्रभाव है, जहां दुनिया बिना सोचे भारतीय उत्पाद खरीदे। बिना मजबूत निर्यात प्रतिबद्धता के रुपया मजबूत नहीं हो सकता। सफल राज्यों जैसे गुजरात, तमिलनाडु आदि का उदाहरण देते हुए उन्होंने निर्यात हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया।





