
तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश की कर्ज आधारित तुलना से चिदंबरम असहमत, BJP ने कसा तंज
तमिलनाडु भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री चिदंबरम द्वारा कर्ज के आधार पर तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश की तुलना से असहमत होने वाले बयान को तथ्य छिपाने वाला बताया। भाजपा ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने पिछले सालों में बड़ी मात्रा में इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट किया है। इससे राज्य तेजी के साथ आगे बढ़ा है।
डीएमके के शासन वाले तमिलनाडु और भाजपा के शासन वाले उत्तर प्रदेश के बीच में कर्ज आधारित तुलना पर पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने अपनी असहमति जताई थी। इसको लेकर अब भाजपा ने उनकी आलोचना की है। भाजपा की तरफ से कहा गया कि चिदंबरम की तरफ से जो बयान दिया गया है, वह आगामी चुनाव को देखते हुए दिया गया है, यह पूरी तरह से सच को छिपाने वाला राजनीतिक वक्तव्य है।
सोशल मीडिया साइट एक्स पर चिदंबरम पर तंज कसते हुए तमिलनाडु भाजपा के नेता नारायणन तिरुपथी ने कहा कि पूर्व वित्त मंत्री की दलीलें पहली नजर में तो सही नजर आती हैं, लेकिन यह आर्थिक प्रबंधन और कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़े अहम मुद्दों को जानबूझकर नजरअंदाज करती हैं।
गौरतलब है कि पूर्व वित्तमंत्री ने एक सभा के दौरान कहा था कि किसी राज्य की अर्थव्यवस्था का मूल्यांकन उसके द्वारा लिए गए कुल कर्ज के आधार पर नहीं किया जा सकता। बकौल, चिदंबरम ऐसा करना गलत होता है क्योंकि देश और राज्यों का कुल कर्ज हर साल बढ़ता है और इस आधार पर तमिलनाडु की उत्तर प्रदेश से तुलना नहीं की जानी चाहिए।
इस का जवाब देते हुए नारायणन ने लिखा, "उन्होंने जो विस्तार से कहा है वह आपको पहली नजर में सही लग सकता है। लेकिन यह पूरी तरह से सच्चाई को छिपाता हुआ नजर आता है।" उन्होंने कहा कि किसी राज्य द्वारा कर्ज लेना गलत नहीं है, असली सवाल यह होता है कि आखिर उस कर्ज का इस्तेमाल कहां किया जा रहा है।
नारायणन ने कहा, "अर्थशास्त्र का मूल सिद्धांत है कि यदि कर्ज का उपयोग पूंजीगत व्यय, इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास और संपत्तियों को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है, तो इससे औधोगिक विकास बढ़ता है और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, ऐसे में राजस्व की वृद्धि होती है और अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है। लेकिन अगर इसी कर्ज का इस्तेमाल पूंजीगत योजनाओं में करने की बजाय लोकलुभावन योजनाओं में किया जाए तो इससे राज्य पीछे की तरफ ही जाता है।"
भाजपा प्रवक्ता ने आंकड़े देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की आबादी तमिलनाडु की तुलना में तीन गुना है। इसके बावजूद तमिलनाडु के मुकाबले उनका पूंजीगत व्यय बढ़ा है। पिछले पांच सालों में उत्तर प्रदेश ने परिवहन, ऊर्जा और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में औसतन 30 प्रतिशत की दर से पूंजीगत व्यय को बढ़ाया है, जबकि तमिलनाडु इस मामले में केवल 10 से 15 फीसदी पर रहा है।"
उन्होंने कहा, “इसमें कोई शक नहीं है कि तमिलनाडु उत्तर प्रदेश की तुलना में अधिक विकसित और आर्थिक रूप से मजबूत रहा है, लेकिन जो राज्य पहले तमिलनाडु से बहुत पीछे हुआ करते थे, वह अब तेजी के साथ विकास कर रहे हैं उसकी बराबरी कर रहे हैं, क्योंकि वह लगातार बुनियादी ढ़ांचे पर निवेश कर रहे हैं, जबकि तमिलनाडु इस मामले में पिछड़ रहा है। हमें पिछले सालों को गौरव में नहीं उलझना चाहिए, बल्कि राज्य में बेहतर योजनाओं को लागू करके आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।”
गौरलतब है कि तमिलनाडु में विधानसभा के चुनाव करीब है। कांग्रेस अपने साथी संगठन डीएमके के साथ मिलकर एक बार फिर से सत्ता में आने की राह देख रही है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा भी तमिलनाडु में अपने गठबंधन के साथी एआईडीएमके के साथ मिलकर प्रयास में लगी हुई है। भाजपा शासित राज्यों की स्थिति और तमिलनाडु की स्थिति को दिखाकर दोनों ही दल राज्य की जनता को अपने-अपने पक्ष में लुभाने का प्रयास कर रहे हैं।





