चंद्रयान-3 ने फिर किया कमाल, 'शिव शक्ति' की मिट्टी के रहस्य से उठा पर्दा
रिसर्च में पता चला कि शिव शक्ति स्टेशन की मिट्टी केवल चंद्रमा की ऊपरी सतह की नहीं है, बल्कि यह विभिन्न परतों से आए पदार्थों का मिश्रण है। वहां की सतह पर ऊपरी क्रस्ट के अलावा मैग्नीशियम-समृद्ध चट्टानों के टुकड़े भी मौजूद हैं।

भारत के चंद्र मिशन चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की सतह को लेकर एक और अहम जानकारी दी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार को बताया कि चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर की ओर से चंद्रमा के साउथ पोल के निकट स्थित शिव शक्ति स्टेशन की मिट्टी का विश्लेषण किया गया। इससे पता चला कि वहां की मिट्टी की जियोकेमिकल कंपोजिशन दुनिया के पहले पहचाने गए चंद्र उल्कापिंड ALHA 81005 से काफी हद तक मेल खाती है। यह अध्ययन अहमदाबाद स्थित फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने किया है।
रिसर्च के अनुसार, शिव शक्ति स्टेशन की मिट्टी और ALHA 81005 उल्कापिंड में एल्युमिनियम ऑक्साइड, आयरन ऑक्साइड और मैग्नीशियम ऑक्साइड का अनुपात लगभग समान पाया गया। हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि इसका यह अर्थ नहीं है कि यह उल्कापिंड शिव शक्ति स्टेशन से ही आया था। शोधकर्ताओं के मुताबिक, दोनों केवल चंद्रमा की मैग्नीशियम-समृद्ध सतह और रेगोलिथ (चंद्रमा की ढीली सतही मिट्टी और चट्टानी पदार्थ) के एक समान प्रकार का प्रतिनिधित्व करते हैं। ALHA 81005 उल्कापिंड वर्ष 1981-82 के दौरान अंटार्कटिका के एलन हिल्स क्षेत्र में खोजा गया था और इसे चंद्रमा से उत्पन्न होने वाला पहला प्रमाणित उल्कापिंड माना जाता है।
रिसर्च से क्या जानकारी आई सामने
प्रज्ञान रोवर के विश्लेषण से यह भी सामने आया कि शिव शक्ति स्टेशन की मिट्टी केवल चंद्रमा की ऊपरी सतह की नहीं है, बल्कि यह विभिन्न परतों से आए पदार्थों का मिश्रण है। इसरो के अनुसार, वहां की सतह पर ऊपरी क्रस्ट के अलावा मैग्नीशियम-समृद्ध चट्टानों के टुकड़े भी मौजूद हैं, जो संभवतः चंद्रमा की गहरी परतों से आए हैं। इससे संकेत मिलता है कि अरबों वर्षों से उल्कापिंडों की टक्करों और अन्य भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं ने चंद्रमा की अलग-अलग परतों की सामग्री को मिलाकर उसकी सतह का निर्माण किया है। यह खोज चंद्रमा की आंतरिक संरचना और विकास को समझने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
इसरो ने कहा कि शिव शक्ति स्टेशन और चंद्रमा के पहले पहचाने गए उल्कापिंड के बीच स्थापित यह वैज्ञानिक संबंध प्राचीन चंद्र क्रस्ट की उत्पत्ति और विकास को समझने के लिए नए रास्ते खोलता है। चंद्रयान-3 मिशन से प्राप्त आंकड़े न केवल भारत की वैज्ञानिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर मजबूत करते हैं, बल्कि भविष्य के चंद्र अभियानों और वहां से नमूने लाने वाले मिशनों के लिए भी अहम आधार प्रदान करेंगे। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के अध्ययन चंद्रमा के निर्माण, उसकी सतह की रासायनिक विविधता और सौरमंडल के शुरुआती इतिहास से जुड़े कई अनसुलझे सवालों के जवाब खोजने में मदद करेंगे।
लेखक के बारे में
Niteesh Kumarपत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।
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