OBC क्रीमी लेयर को लेकर असमंजस में सरकार, सुप्रीम कोर्ट से बोला केंद्र- सैलरी के अलावा पद भी जरूरी
सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च के फैसले को लागू करने को लेकर केंद्र सरकार असमंजस में है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि सैलरी के अलावा कैंडिडेट के पैरंट्स का पद और संपत्ति भी देखने की जरूरत है।

ओबीसी क्रीमी लेयर के नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने को तैयार हो गया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 11 मार्च के फैसलो को सिविल सर्विस परीक्षा 2025 के उम्मीदवारों पर लागू करने को लेकर जवाब मांगा है। जस्टिस आरमहादेवन और जस्टिस पी नरसिम्हा की बेंच ने केंद्र को जवाब देने के लिए 17 सितंबर तक का समय दिया। केंद्र सरकार न ही 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और रोहित नाथन फैसले को लेकर जानकारी मांगी थी और कहा था कि 11 मार्च के फैसले को लागू करने में कई दिक्कतें हैं। सरकार ने कहा कि जो उम्मीदवार पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं उनपर इसका प्रभाव पड़ेगा।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सीएसई-2025 के 958 उम्मीदवारों की पोस्टिंग को लेकर पुराने ओबीसी क्रीमी लेयर मानदंड को ही लागू किया जाए। सरकार का कहना है कि माता पिता की सैलरी या फिर कुल आय के आधार पर ही किसी उम्मीदवार को क्रीमी लेयर में नहीं ऱखा जा सकता है। केंद्र ने कहा कि माता पिता के पद, उनकी अचल संपत्ति पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
क्या है क्रीमी लेयर
क्रीमी लेयर के तहत ओबीसी समाज के वे लोग आते हैं जो कि आर्थिक और सामाजिक रूप से संपन्न माने जाते हैं। ऐसे में उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है। इसका उद्देश्य है कि आरक्षण का फायदा जरूरतमंदों को ही मिले। 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी मामले में क्रीमी लेयर के सिद्धांत को लागू कर दिया था। इसके बाद से इस वर्ग को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण से बाहर कर दिया गया। एससी और एसटी वर्ग के लिए ऐसा कोई नियम नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार बनाम रोहित नाथन मामले में 11 मार्च को फैसला सुनाया था। केंद्र का कहना है कि सीएसई-2025 की परीक्षा फैसले से पहले ही हो गई थी। इसका नोटिफिकेशन 22 जनवरी 2022 को आया था। यह परीक्षा मई और अगस्त में करवाई गई थी। वहीं रिजल्ट 6 मार्च 2026 को आया। इसके पांच दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। ऐसे में अगर पिछली तारीख से फैसला लागू किया जाता है तो कई उम्मीदवारों के साथ गलत हो जाएगा।
ओबीसी उम्मीदवारों को क्या हो सकता है नुकसान
केंद्र सरकार का कहना है कि पहले के नियम के मुताबिक छात्रों ने परीक्षा दी। ऐसे में कई ऐसे भी छात्र होंगे जो कि खुद को जनरल कैटिगरी में मानते होंगे और इसलिए तीन साल उम्र में छूट का भी लाभ उन्हें नहीं मिला। वहीं कुछ ऐसे भी कैंडिडेट होंगे जिन्होंने आवेदन ओबीसी के हिसाब से किया लेकिन अब नए फैसले के हिसाब से वे क्रीमी लेयर में आ जाएंगे। केंद्र का कहना है कि अगर माता-पिता की नौकरी, पद और संपत्ति की दोबारा जांच करते है कई तरह के मुद्दे उठेंगे। ऐसा भी हो सकता है कि परीक्षा ही फिर से करानी पड़ जाए। इसके अलावा चयनित अधिकारियों की तैनाती पर भी असर पड़ेगा।


