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लॉ अफसरों-वकीलों पर केंद्र मेहरबान, बढ़ाई फीस; जानें- AG से पैनल काउंसल तक किसे मिलेंगे कितने पैसे?

लॉ अफसरों-वकीलों पर केंद्र मेहरबान, बढ़ाई फीस; जानें- AG से पैनल काउंसल तक किसे मिलेंगे कितने पैसे?

संक्षेप:

संशोधित नियमों के अनुसार, अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया (AG) को अब प्रति माह 1,20,000 रुपये मिलेंगे, जबकि सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया (SG) को 96,000 रुपये और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) को 72,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे।

Feb 06, 2026 02:52 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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केंद्र सरकार ने देश के शीर्ष कानूनी अधिकारियों की फीस में संशोधन करते हुए Law Officers (Conditions of Service) Amendment Rules, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। यह नई व्यवस्था 1 फरवरी 2026 से लागू मानी जाएगी। इसके साथ ही अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और केंद्र सरकार की ओर से पैरवी करने वाले वकीलों के पारिश्रमिक में अहम बदलाव किए गए हैं। ये संशोधन न सिर्फ शीर्ष लॉ ऑफिसर्स के लिए, बल्कि जमीनी स्तर पर सरकार की पैरवी करने वाले वकीलों के लिए भी आर्थिक संतुलन और पेशेवर सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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टॉप लॉ ऑफिसर्स की नई रिटेनर फीस

संशोधित नियमों के अनुसार, अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया (AG) को अब प्रति माह 1,20,000 रुपये मिलेंगे, जबकि सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया (SG) को 96,000 रुपये प्रति माह और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) को 72,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे। यह रिटेनर फीस उनके नियमित कार्य और सरकारी मामलों में उपलब्धता के लिए दी जाती है।

कोर्ट में पेशी पर कितनी फीस?

इसके अलावा सरकार ने इन लॉ ऑफिसर्स को सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, अन्य अदालतों और ट्रिब्यूनल के सामने अलग-अलग मामलों और पेशी के लिए दी जाने वाली फीस भी नोटिफाई कर दी है। मुकदमों, रिट याचिकाओं, अपीलों और रेफरेंस में पेशी के लिए, लॉ ऑफिसर्स को हर मामले के लिए हर दिन 38,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। स्पेशल लीव पिटीशन और अन्य आवेदनों के लिए, उन्हें हर दिन 24,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा।

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कानून मंत्रालय द्वारा भेजे गए मामलों के बयानों पर राय देने के लिए (केवल संवैधानिक या वैधानिक व्याख्या और महत्व के सवालों से जुड़े मामलों के लिए), फीस 24,000 रुपये प्रति मामला होगी। इनके अलावा सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और जांच आयोगों या ट्रिब्यूनल के सामने लिखित सबमिशन के लिए फीस 24,000 रुपये प्रति मामला तय की गई है।

दिल्ली से बाहर पेशी पर विशेष भुगतान

सुप्रीम कोर्ट के लॉ ऑफिसर्स को दिल्ली के बाहर की अदालतों में पेशी के लिए हर मामले के लिए हर दिन 96,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। नए नियमों के मुताबिक, अपने हेडक्वार्टर के अलावा, अपने अधिकार क्षेत्र की दूसरी अदालतों में पेशी के लिए, एक एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG)को हर मामले के लिए हर दिन 60,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा।

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केंद्र सरकार के वकीलों के लिए भी नई दरें

5 फरवरी को जारी ऑफिस मेमोरेंडम (OM) के तहत केंद्रीय सरकारी वकीलों की फीस संरचना भी बदली गई है। यह फीस संरचना भी एक फरवरी से लागू होगी। सुप्रीम कोर्ट पैनल के लिए, एक टियर वाली पेमेंट संरचना है जो ग्रुप 'A' और ग्रुप 'B' और 'C' वकीलों के बीच अंतर करती है। इसके तहत नियमित अपीलों और रिट याचिकाओं की अंतिम सुनवाई के लिए, ग्रुप A के वकील हर मामले के लिए हर दिन 21,600 रुपये पाने के हकदार होंगे, जबकि ग्रुप B और C के वकीलों को 14,400 रुपये मिलेंगे। SLP, ट्रांसफर याचिका, रिट याचिका और मिसलेनियस मामलों में एडमिशन के लिए, ग्रुप A के वकील को हर केस के लिए हर दिन 14,400 और ग्रुप B और C के वकील को 7,200 रुपये मिलेंगे।

हाई कोर्ट और ट्रिब्यूनल में पैरवी

बार एंड बेंच के मुताबिक, OM में हाई कोर्ट और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों के लिए एक अलग फीस निर्धारित की गई है। इसके तहत भारत के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल, सीनियर सेंट्रल गवर्नमेंट स्टैंडिंग काउंसिल, एडिशनल सेंट्रल गवर्नमेंट स्टैंडिंग काउंसिल और सीनियर पैनल काउंसिल जो हाई कोर्ट और ट्रिब्यूनल में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्हें 14,400 रुपये का मासिक रिटेनर फीस मिलेगा। OM में आर्बिट्रेशन पैनल की फीस के बारे में भी बताया गया है। सीनियर आर्बिट्रेशन काउंसिल को अब हर प्रभावी सुनवाई के लिए 3,600 रुपये मिलेंगे, जबकि जूनियर काउंसिल को 2,400 रुपये मिलेंगे।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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