Census 2027: शादीशुदा जैसे माने जाएंगे लिव इन वाले, आपत्तिजनक सवाल पूछने पर नपेंगे अधिकारी
सरकार ने साफ किया है कि उत्तरदाताओं की निजी जानकारी को गोपनीय ही रखा जाएगा। इसके लिए सेंसस एक्ट 1948 की धारा 15 का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है, 'आपकी निजी जानकारी किसी के साथ भी साझा नहीं की जाएगी।'

कोरोना महामारी के कारण टली भारत की जनगणना का फिर से आगाज होने जा रहा है। अप्रैल से प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, जो फरवरी 2027 तक चलेगी।इसी बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि लिव इन में रहने वालों को शादीशुदा के तौर पर गिना जा सकता है। वहीं, कहा है कि अनुचित सवाल पूछने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
क्या लिव इन में रहने वाले शादीशुदा जोड़े माने जाएंगे?
भारत के रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर यानी महापंजीयक और जनगणना आयुक्त के अनुसार, अगर दोनों अपने रिश्ते को एक स्थायी संबंध यानी स्टैबल यूनियन मानते हैं, तो उन्हें एक विवाहित जोड़े की तरह माना जाना चाहिए।
क्या शेयर की जाएगी जानकारी?
सरकार ने साफ किया है कि उत्तरदाताओं की निजी जानकारी को गोपनीय ही रखा जाएगा। इसके लिए सेंसस एक्ट 1948 की धारा 15 का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है, 'आपकी निजी जानकारी किसी के साथ भी साझा नहीं की जाएगी।'
गलत सवाल पूछे तो होगा ऐक्शन
हाल ही में जनगणना आयुक्त ने साफ किया है कि प्रक्रिया के दौरान कोई भी आपत्तिजनक सवाल पूछने पर अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सभी राज्यों को भेजे गए एक पत्र में, जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 11 के तहत निर्धारित दंडों की सूची दी है, जिसमें दोषी पाए जाने पर 1,000 रुपये के जुर्माने से लेकर तीन साल तक का कारावास या दोनों हो सकता है।
इस आदेश में कहा गया है कि यदि कोई जनगणना अधिकारी जानबूझकर कोई आपत्तिजनक या अनुचित प्रश्न पूछता है, जानबूझकर कोई गलत जानकारी देता है, केंद्र सरकार या राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना जनगणना के दौरान प्राप्त किसी भी जानकारी का खुलासा करता है, तो उसे दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की सजा हो सकती है।
क्या जानकारी ली जाएगी
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में बताया था कि जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी - अप्रैल से सितंबर 2026 तक आवासीय सूची और आवासीय गणना, और फरवरी 2027 में आबादी गणना। यह 16वीं जनगणना होगी और यह पूरी तरह डिजिटल तरीके से की जाएगी, जिसमें नागरिकों को स्वयं गणना करने का ऑप्शन भी मिलेगा।
पहला चरण: इसमें मकानों की स्थिति और परिवार की जानकारी ली जाएगी। इसमें देखा जाता है कि घर में पीने का पानी, शौचालय, बिजली, खाना पकाने का ईंधन और इंटरनेट जैसी सुविधाएं हैं या नहीं। साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि परिवार के पास रेडियो, टीवी, कंप्यूटर, दोपहिया या चार पहिया वाहन जैसी चीजें हैं या नहीं।
दूसरा चरण: इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या और उनकी निजी जानकारी ली जाती है, जैसे: उनका नाम, उम्र, लिंग, वैवाहिक स्थिति, जाति, धर्म, शिक्षा और भाषा। इसके अलावा दिव्यांग होने, रोजगार और शादीशुदा महिलाओं से उनके बच्चों से जुड़ी जानकारी भी ली जाएगी।
लेखक के बारे में
Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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