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नई जनगणना से बदल जाएगा आपके शहर का नक्शा, नया सर्कुलर जारी; किन गांवों के वजूद पर संकट?

नई जनगणना से बदल जाएगा आपके शहर का नक्शा, नया सर्कुलर जारी; किन गांवों के वजूद पर संकट?

संक्षेप:

सर्कुलर के मुताबिक, जिन शहरों के भौगोलिक क्षेत्र में 2011 की जनगणना के बाद से कोई परिवर्तन नहीं हुआ है, उन्हें वैसे ही आगे बढ़ाया जाएगा लेकिन जहाँ नगरपालिका की सीमाएँ विस्तारित हुई हैं और उनमें विलय हुए हैं, तो उनके विवरण देने होंगे।

Fri, 29 Aug 2025 07:30 AMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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आगामी जनगणना के लिए केंद्र सरकार ने नया सर्कुलर जारी किया है, जिसमें शहरी समूहों को अपडेट करने का निर्देश दिया गया है। 2027 की जनगणना में होने वाली इस कवायद से भारत का आधिकारिक शहरी नक्शा बदलने वाला है। भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय ने आगामी जनगणना 2027 के लिए शहरी समूहों (Urban Agglomerations) की संरचना को अप टू डेट करने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रोफार्मा का एक सेट भेजा है। 22 अगस्त को महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के दफ्तर द्वारा जारी यह प्रोफार्मा आधिकारिक रूप से यह दर्शाने के लिए बनाया गया है कि 2011 की जनगणना के बाद से शहरों का विस्तार, विलय या उनका फिर से बंटवारा कैसे हुआ है?

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नए सर्कुलर के निर्देशों में राज्यों से जनगणना 2011 के शहरी समूहों को सूचीबद्ध करने के लिए कहा गया है जो 2011 की जनगणना के बाद बिना किसी क्षेत्रीय बदलाव के 2027 की जनगणना में जारी रहेंगे। इसके अलावा जनगणना 2011 के शहरी समूहों को 2027 की जनगणना के लिए हटाए जाने का प्रस्ताव देने को भी कहा गया है। सर्कुलर में ऐसे गांवों, नगरों, उपनगरों, कस्बों का विवरण देने को भी कहा गया है, जिनका 2011 की जनगणना के बाद शहरी समूह की किसी भी इकाई के साथ विलय कर दिया गया है।

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केंद्र ने भेजे पांच प्रोफॉर्मा

न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र द्वारा भेजे गए दस्तावेजों में 5 प्रोफार्मा दिए गए हैं जिन्हें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भरना होगा। इन प्रोफार्मा का उद्देश्य 2011 और 2027 के बीच शहरी क्षेत्रों की स्थिति में आए बदलाव को रेखांकित और सूचीबद्ध करना है। प्रत्येक प्रोफार्मा में पहचानकर्ता और 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या, Metadata and Data Standard (MDDS) कोड, वर्ग किलोमीटर में क्षेत्रफल, और विलय या क्षेत्राधिकार परिवर्तन के मामलों में संबंधित सरकारी अधिसूचना या आदेश की जानकारी भी मांगी गई है।

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अगर परिवर्तन नहीं तो यथावत रहेंगे शहर

सर्कुलर के मुताबिक, जिन शहरों के भौगोलिक क्षेत्र में 2011 की जनगणना के बाद से कोई परिवर्तन नहीं हुआ है, उन्हें वैसे ही हू-ब हू आगे बढ़ाया जाएगा लेकिन जहाँ नगरपालिका की सीमाएँ विस्तारित हुई हैं या आस-पास के कस्बे और गांव शहरीकृत होकर शहरों में समा गए हैं, उन विलयों को संबंधित शहरी समूहों (UA) में अधिसूचना संख्या और तिथियों के साथ दर्ज किया जाएगा।

नए समूहों के लिए खुलेगा रास्ता

इसके विपरीत, 2011 का कोई भी UA जो अब मानदंडों को पूरा नहीं करता है, या जिन्हें पुनर्गठित किया गया है, उसे हटाने का प्रस्ताव किया जा सकता है। अंत में, ये प्रपत्र उन पूरी तरह से नए समूहों को मान्यता देने का एक रास्ता खोलते हैं जो पिछले डेढ़ दशक में विनिर्माण गलियारों, आईटी समूहों और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने तेजी से शहरों के पार एक शहरी क्षेत्र के निर्माण और विकास को प्रेरित किया है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
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