मीम या कार्टून से बड़ी हस्तियां विशेष समुदाय को निशाना नहीं बना सकतीं, सुप्रीम कोर्ट की दो टूक

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न्यायमूर्ति भुइयां ने 39 पृष्ठों के अपने फैसले में लिखा, 'संवैधानिक रूप से यह अस्वीकार्य है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह सरकारी हो या गैर सरकारी हो, भाषण, मीम, कार्टून, दृश्य कला आदि के माध्यम से किसी भी समुदाय को बदनाम करे और उसकी निंदा करे।'

मीम या कार्टून से बड़ी हस्तियां विशेष समुदाय को निशाना नहीं बना सकतीं, सुप्रीम कोर्ट की दो टूक

उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द के लिए भाईचारे को जरूरी बताते हुए कहा कि ऊंचे संवैधानिक पदों पर बैठे लोग धर्म, भाषा, जाति या क्षेत्र के आधार पर किसी विशेष समुदाय को निशाना नहीं बना सकते। शीर्ष अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह सरकारी हो या गैर सरकारी हो, भाषणों, मीम्स, कार्टून या चित्रों के जरिए किसी विशेष समुदाय को बदनाम या अपमानित नहीं कर सकता।

न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां ने यह टिप्पणियां फिल्म 'घूसखोर पंडत' की रिलीज को चुनौती देने वाली याचिका पर एक अलग फैसले में कीं। यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली है और याचिका में इसकी रिलीज को चुनौती दी गई है।

फैसले में मीम और कार्टून का भी जिक्र

न्यायमूर्ति भुइयां ने 39 पृष्ठों के अपने फैसले में लिखा, 'संवैधानिक रूप से यह अस्वीकार्य है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह सरकारी हो या गैर सरकारी हो, भाषण, मीम, कार्टून, दृश्य कला आदि के माध्यम से किसी भी समुदाय को बदनाम करे और उसकी निंदा करे।'

उन्होंने लिखा, 'धर्म, भाषा, जाति या क्षेत्र के आधार पर किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाना संविधान का उल्लंघन होगा, चाहे वह व्यक्ति कोई भी हो। यह विशेष रूप से उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों के लिए है, जिन्होंने संविधान को बनाए रखने की शपथ ली है।'

क्या बोले जज

न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति भुइयां की पीठ ने 19 फरवरी को फिल्म निर्माता नीरज पांडे के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेने के बाद फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका का निपटारा किया और कहा कि उम्मीद है कि इस विवाद का हर तरह से अंत हो जाएगा।

अपने फैसले में न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि संविधान के प्रमुख उद्देश्यों में से एक का उल्लेख प्रस्तावना में किया गया है और उसके अनुसार, भारत के सभी नागरिकों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देना, व्यक्ति की गरिमा तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखना है।

न्यायाधीश ने लिखा, 'इस प्रकार, जाति, धर्म या भाषा से परे, भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना तथा साथी नागरिकों का सम्मान करना एक संवैधानिक धर्म है जिसका हम सभी को पालन करना चाहिए।'

न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारे संविधान के आदर्शों में से एक है तथा अनुच्छेद 19(1)(ए) सभी नागरिकों को ऐसा मौलिक अधिकार प्रदान करता है।

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Nisarg Dixit

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Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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