फॉलोअर बढ़ाने का मतलब नहीं, सीबीएसई की पोल खोलने वाले सार्थक का कॉकरोच जनता पार्टी को संदेश
कॉकरोच जनता पार्टी ऑनलाइन मुहिम के बाद अब जमीन पर उतरती नजर आ रही है। इन सबके बीच सीबीएसई की पोल खोलने वाले सार्थक सिद्धांत ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को कुछ संदेश भेजा है…

सीबीएसई व्हिसिलब्लोवर सार्थक सिद्धांत ने कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके को एक सलाह दी है। सार्थक ने कहा है कि अभिजीत दीपके यह सुनिश्चि करें कि उनका आंदोलन वास्तविक रहे, ना कि सिर्फ इंटरनेट पर सनसनी बनकर रह जाए। उन्होंने कहाकि छात्रों द्वारा शुरू किए गए आंदोलन को अर्थपूर्ण होना चाहिए। सार्थक ने हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में यह बातें कहीं। गौरतलब है कि सार्थक हाल ही में संसदीय समिति के सामने पेश भी हुए थे। उन्होंने सीबीएसई के ओएमएस में खामियों के बारे में बात की थी।
मुद्दों पर कायम रहना चाहिए
इंटरव्यू के दौरान सार्थक सिद्धांत ने कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा शुरू किए आंदोलन के बारे में बात की। उन्होंने कहाकि वह पॉलिटिक्स के बारे में बात नहीं करना चाहते। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहाकि अगर यह छात्रों को लेकर शुरू किया गया है तो फिर उनसे जुड़े मुद्दों पर ही कायम रहना चाहिए। सार्थक ने आगे कहाकि जैसे मैंने कुछ इन्वेस्टिगेशन की, निसर्ग ने कुछ इन्वेस्टिगेशन की और हमने इसे छात्रों की मदद के लिए आगे बढ़ाया। उन्होंने कहाकि इस तरह से यह सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक सार्थक पहल के रूप में उभरा। सिद्धांत ने अपनी बातचीत में वेदांत श्रीवास्तव का भी जिक्र किया। गौरतलब है कि सिद्धांत, वेदांत और एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी ने सीबीएसई के ओएसएम मूल्यांकन सिस्टम में समस्याओं के बारे में जानकारी दी थी। अपनी इस खोज के चलते ही यह सभी सोशल मीडिया पर मुहिम का चेहरा बन गए।
कुछ न करने से बेहतर है…
सिद्धांत ने आगे कहाकि कुछ न करने से बेहतर है सोशल मीडिया पर समस्याओं को उठाना। लेकिन यह सिर्फ ऑनलाइन अटेंशन पाने के लिए नहीं होना चाहिए। इसका मकसद फॉलोवर बढ़ाने से कहीं ज्यादा होना चाहिए। उन्होंने कहाकि इंटरनेट एक्टिविज्म ठीक है। जो मैंने किया, जो निसर्ग ने किया, जो वेदांत ने किया वह सामान्य रूप से इंटरनेट एक्टिविज्म था। लेकिन मैं कहूंगा कि इसके बाद अगर वे कुछ भी नहीं कर रहे हैं। अगर वे किसी चीज में सक्रिय रूप से भाग नहीं ले रहे हैं, तो यह अच्छी बात नहीं है।
कौन हैं सार्थक सिद्धांत
सार्थक सिद्धांत 17 साल के हैं। सीबीएसई की परीक्षा में ओएसएम सिस्टम से कॉपियां चेक करने के बाद छात्रों के परसेंटेज में काफी गिरावट आई थी। इसके बाद सार्थक ने केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर निविदा दस्तावेजों की समीक्षा करने में कई दिन बिताए। फिर उन्होंने इससे जुड़ी खोज को अपनी वेबसाइट sarthaksidhant.com/coempt पर पब्लिश किया था। सिद्धांत का ब्लॉग, जिसका शीर्षक था कैसे सीबीएसई ने Coempt EduTeck के पक्ष में नियमों में ढील दी। साथ ही आरोप लगाया गया कि बोर्ड ने तीन लगातार टेंडर राउंड में पात्रता और तकनीकी जरूरतों को इस तरीके से व्यवस्थित रूप से संशोधित किया कि हैदराबाद स्थित Coempt EduTeck प्राइवेट लिमिटेड को फायदा मिले।
सार्थक ने ब्लॉग में लिखा कि यह दिखाता है कि कैसे एक विशाल सार्वजनिक संस्थान, खुद ही नियमों को तोड़-मरोड़कर छात्रों के भविष्य के साथ खेल रहा है। हालांकि इस कंपनी और सीबीएसई, दोनों ने किसी गड़बड़ी से इनकार किया है।
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लेखक के बारे में
Deepak Mishraमूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।
आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।
यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।
जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।
अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।


