
CBI ने एक्टर विजय से 6 घंटे की पूछताछ, करूर भगदड़ में TVK की भूमिका पर क्या बोले तमिल सुपरस्टार
तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और टीवीके प्रमुख थलापति विजय सोमवार को दिल्ली स्थित CBI मुख्यालय में करूर भगदड़ मामले की जांच के सिलसिले में पेश हुए। उनसे लगभग 6-7 घंटे तक पूछताछ की गई, जिसमें रैली के आयोजन, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्थाओं और देरी से पहुंचने जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल शामिल थे।
तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के प्रमुख थलापति विजय सोमवार को दिल्ली स्थित CBI मुख्यालय में करूर भगदड़ मामले की जांच के सिलसिले में पेश हुए। अधिकारियों के अनुसार, उनसे लगभग 6-7 घंटे तक पूछताछ की गई, जिसमें रैली के आयोजन, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्थाओं और देरी से पहुंचने जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल शामिल थे। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई चाहती थी कि विजय मंगलवार को पूछताछ के लिए पेश हों, लेकिन उन्होंने पोंगल त्योहार का हवाला देकर दूसरी तारीख मांगी। अधिकारियों ने उनका अनुरोध मान लिया है और जल्द ही नई तारीख दी जाएगी। बता दें कि विजय सुबह करीब 11:29 बजे भारी सुरक्षा के साथ काली रेंज रोवर में CBI मुख्यालय पहुंचे। वे चेन्नई से चार्टर्ड फ्लाइट से दिल्ली आए थे।
हादसे के लिए पार्टी जिम्मेदार नहीं
दरअसल, यह मामला 27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर जिले में टीवीके की रैली के दौरान हुई भगदड़ से जुड़ा है, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी और 60 से अधिक घायल हुए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI ने जांच अपने हाथ में ली है और एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता वाली कमिटी की निगरानी में काम कर रही है। सूत्रों के अनुसार, विजय ने CBI को बताया कि उनकी पार्टी इस हादसे के लिए जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने पुलिस और राज्य सरकार पर भीड़ प्रबंधन में चूक का आरोप लगाया।
गौरतलब है कि सीबीआई ने इस मामले में टीवीके के कई पदाधिकारियों से भी पूछताछ की है। अधिकारियों के मुताबिक, तमिलनाडु के पूर्व एडीजी (कानून एवं व्यवस्था) एस. डेविडसन देवसिरवथम को भी तलब किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने एसआईटी से मामला अपने हाथ में लिया था और अब सबूत जुटा रही है।
देरी से पहुंचने की वजह से भगदड़
इससे पहले तमिलनाडु पुलिस ने दावा किया था कि विजय की करूर रैली में देरी से पहुंचने के कारण भगदड़ मची। भीड़ बहुत ज्यादा इंतजार करने से बेकाबू हो गई। पुलिस ने भीड़ प्रबंधन की कमी, अपर्याप्त व्यवस्थाओं जैसे भोजन, पीने का पानी और शौचालय सुविधाओं की कमी को भी कारण बताया। लेकिन विजय ने इन आरोपों का जोरदार खंडन किया और इन्हें राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पर बदनामी अभियान चलाने का आरोप लगाया। विजय ने उल्टे पुलिस पर अव्यवस्था का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने प्रवेश द्वारों पर भीड़ प्रबंधन में गंभीर चूक की, जिससे भगदड़ मची और लोगों की जान गई।
बता दें कि शुरुआत में मद्रास उच्च न्यायालय ने त्रासदी से पहले की घटनाओं की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अपने हाथ में लिया और सीबीआई को एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति की देखरेख में जांच करने का निर्देश दिया।





