CBI को नीरव मोदी से जुड़े केस में नहीं मिला भ्रष्टाचार का कोई सबूत, 321 करोड़ का है मामला
इस मामले में नीरव मोदी के अलावा फायरस्टार के पूर्व वित्त अध्यक्ष विपुल अंबानी और मुख्य वित्तीय अधिकारी रवि शंकर गुप्ता सहित कई अन्य निदेशकों को भी आरोपी बनाया गया है।

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों में एक बड़ा मोड़ आया है। मुंबई की एक विशेष सीबीआई (CBI) अदालत ने नीरव मोदी और अन्य के खिलाफ दर्ज 321.88 करोड़ के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले को मजिस्ट्रेट कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया है। विशेष अदालत ने यह फैसला तब सुनाया जब केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि गहन जांच के बाद भी पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप साबित नहीं किए जा सके।
यह मामला पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के मुंबई जोनल ऑफिस की शिकायत पर दर्ज किया गया था। बैंक का आरोप था कि नीरव मोदी की कंपनियों को दी गई क्रेडिट सुविधाओं का दुरुपयोग करके बैंक के साथ 321.88 करोड़ की धोखाधड़ी की गई है।
विशेष जज जेपी दरेकर की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। सीबीआई के लोक अभियोजक विक्रम सिंह ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान पीएनबी के अधिकारियों या किसी निजी व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कोई भी आपत्तिजनक सामग्री या सबूत नहीं मिले हैं। क्योंकि सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं बनता, इसलिए अब सीबीआई अंतिम चार्जशीट केवल निजी व्यक्तियों के खिलाफ ही दाखिल करेगी। इस तकनीकी बदलाव के कारण यह मामला विशेष सीबीआई अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो गया है।
अदालत ने सीबीआई की याचिका को स्वीकार करते हुए इस मुकदमे को एस्प्लेनेड स्थित अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया है, जहां अब केवल भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत मुकदमा चलेगा।
किन कंपनियों के बीच हुआ था फर्जी लेनदेन?
पीएनबी की आंतरिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, नीरव मोदी के नियंत्रण वाली विभिन्न साझेदारी फर्मों और कंपनियों के बीच पैसों को घुमाने के लिए सर्कुलर ट्रांजेक्शन किए जा रहे थे। इस धोखाधड़ी में नीरव मोदी की कई कंपनियां शामिल थीं। उनमें सोलर एक्सपोर्ट्स, स्टेलर डायमंड्स और डायमंड आर यूएस शामिल हैं। इनके अलावा फायरस्टार इंटरनेशनल लिमिटेड और फायरस्टार डायमंड्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल है।
इस मामले में नीरव मोदी के अलावा फायरस्टार के पूर्व वित्त अध्यक्ष विपुल अंबानी और मुख्य वित्तीय अधिकारी रवि शंकर गुप्ता सहित कई अन्य निदेशकों को भी आरोपी बनाया गया है।
मुख्य घोटाले से अलग है यह केस
ध्यान रहे कि यह 321.88 करोड़ का केस नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी द्वारा किए गए 13,000 करोड़ से अधिक के मुख्य पीएनबी घोटाले से अलग है। मुख्य घोटाले की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों कर रहे हैं, जिसमें मुंबई की ब्रेडी हाउस शाखा के बैंक अधिकारियों को रिश्वत देने के पुख्ता आरोप हैं। नीरव मोदी फिलहाल लंदन की वांड्सवर्थ जेल में बंद है और भारत सरकार लगातार उसकी प्रत्यर्पण की कोशिशों में जुटी हुई है।
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Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
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