ट्रेनों में चल रहा है जातिवाद; संसदीय समिति ने ऐसा क्यों कहा? रेलवे की तीखी आलोचना
समिति के सदस्यों ने रेलवे द्वारा दिए गए इन तर्कों को खारिज कर दिया। सूत्रों ने बताया कि पैनल का मानना है कि ये समस्याएं वर्षों से चली आ रही हैं और अब तक इनका ठोस समाधान निकाला जाना चाहिए था।

भारतीय रेलवे की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने सोमवार को आयोजित अपनी बैठक में केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल की अध्यक्षता वाली इस समिति ने रेलवे में व्याप्त स्वच्छता सुविधाओं को लेकर जाति व्यवस्था जैसी टिप्पणी की है, जहां प्रीमियम ट्रेनों में बेहतर सुविधाएं हैं। जबकि सामान्य यात्री ट्रेनें उपेक्षित हैं। समिति 2023 के लिए भारतीय रेलवे में लंबी दूरी की ट्रेनों में स्वच्छता और सफाई पर भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट की समीक्षा कर रही थी। इस उच्च स्तरीय बैठक में रेलवे बोर्ड का प्रतिनिधित्व चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सतीश कुमार ने किया।
बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने रेलवे की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए। सूत्रों के अनुसार, एक भाजपा सदस्य ने स्पष्ट रूप से कहा कि ट्रेनों में एक तरह का जातिवाद दिखाई देता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वंदे भारत जैसी प्रीमियम सेवाओं में बेहतर लिनेन और स्वच्छ कोच मिलते हैं, जबकि नियमित यात्री ट्रेनों की हालत इसके उलट होती है।
समिति के कड़े रुख का सामना करते हुए रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने सफाई में कई प्रणालीगत और संरचनात्मक चुनौतियों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि सीमित ठहराव, कर्मचारियों की भारी कमी, बजट की कमी और यात्रियों की अत्यधिक संख्या स्वच्छता बनाए रखने के प्रयासों में बाधक हैं।
PAC ने नहीं माना बहाना
समिति के सदस्यों ने रेलवे द्वारा दिए गए इन तर्कों को खारिज कर दिया। सूत्रों ने बताया कि पैनल का मानना है कि ये समस्याएं वर्षों से चली आ रही हैं और अब तक इनका ठोस समाधान निकाला जाना चाहिए था।
समिति ने सभी क्षेत्रों में समय-समय पर स्वच्छता ऑडिट करने की सिफारिश की है। शिकायतों के निपटान के समेकित डेटा के अभाव का हवाला देते हुए पैनल ने रेलवे को एक व्यापक डिजिटल डैशबोर्ड बनाए रखने का निर्देश दिया है। सदस्यों ने सभी ट्रेनों के लिए एक समान यात्री शिकायत निवारण तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया। समिति ने सुझाव दिया कि स्वच्छता प्रदर्शन के आधार पर विभिन्न जोनों के लिए दंड और प्रोत्साहन के बीच संतुलन बनाया जाए। पैनल ने ट्रेनों में मिलने वाले कंबल और चादर की गुणवत्ता सुधारने के लिए लॉन्ड्री प्रबंधन का विस्तृत अध्ययन करने को कहा है।
चेयरमैन सतीश कुमार ने पैनल को जानकारी दी कि ट्रेनों को साफ रखने के प्रयासों के तहत रेलवे ने कई स्थानों पर क्विक-वाटरिंग स्टेशन (तेजी से पानी भरने वाले स्टेशन) शुरू किए हैं, विशेष रूप से सीमित ठहराव वाली लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए। समिति ने इन स्टेशनों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि करने की सिफारिश की है। साथ ही, पैनल ने स्वच्छता के लिए आवंटित बजट को बढ़ाने का भी आग्रह किया है।
ज्ञात हो कि भारतीय रेलवे प्रतिदिन 12,541 यात्री ट्रेनों का संचालन करता है, जिससे 7,364 से अधिक स्टेशनों पर 1.75 करोड़ से अधिक यात्री सफर करते हैं।

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