फ्लैट खरीद रहे हैं तो पढ़ लीजिए ये अहम फैसला, क्या वास्तु सहीं नहीं तो रोक सकते हैं बिल्डर का पैसा?
महिला के मुताबिक घर में वास्तु के हिसाब से निर्माण नहीं कराया गया और टॉयलेट को ईशान कोण में बनवा दिया गया। इस पर ही आपत्ति जताते हुए महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी।

कल्पना कीजिए कि आपने एक फ्लैट को खरीदने के लिए उसकी बुकिंग कराते हैं और उसके लिए एडवांस पेमेंट भी कर देते हैं। कुछ सालों में उसका निर्माण कार्य भी पूरा हो जाता है। लेकिन तब आपको पता चले कि फ्लैट का काम आपके मन मुताबिक नहीं हुआ या फ्लैट का वास्तु सही नहीं? ऐसी स्थिति में आप क्या करेंगे? हाल ही में महाराष्ट्र से एक ऐसा ही मामला सामने आया है। यहां मुंबई की महिला ने वास्तु सही न होने की वजह से फ्लैट का बकाया पैसा देने से मना कर दिया। महिला इसकी शिकायत लेकर महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (MahaRERA) के पास पहुंच गई। हालांकि अथॉरिटी ने उनकी दलीलों को खारिज कर दिया।
MahaRERA ने बुजुर्ग महिला को फ्लैट का बकाया पैसा चुकाने का आदेश दिया है। निकाय ने साफ किया कि कोई भी खरीदार इस आधार पर बिल्डर का भुगतान नहीं रोक सकता कि फ्लैट का लेआउट या बाथरूम का स्थान 'वास्तु शास्त्र' के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। हालांकि महिला की उम्र और खराब स्वास्थ्य को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें बकाया राशि चुकाने के लिए 60 दिनों का मौका दिया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक शिकायतकर्ता विधवा महिला रिटायर्ड सरकारी अधिकारी हैं। उन्होंने जून 2022 में एक डेवलपर से 1.34 करोड़ रुपए में एक फ्लैट खरीदा था। महिला ने शुरुआत में 71 लाख रुपए का भुगतान कर दिया था, लेकिन बाकी के 62 लाख तय सीमा के मुताबिक नहीं चुकाए। बिल्डर का दावा है कि डिमांड लेटर और प्री-टर्मिनेशन नोटिस भेजने के बाद भी जब पैसा नहीं मिला, तो उन्होंने एग्रीमेंट रद्द कर दिया और 20.88 लाख रुपए हर्जाने के रूप में जब्त कर 50 लाख रुपए रिफंड करने की पेशकश की।
महिला की क्या दलील
वहीं महिला खरीदार ने MahaRERA के सामने दलील देते हुए कहा कि वह अकेली रहती हैं और अपनी जिंदगी भर की पूंजी से यह घर खरीदा था। उन्होंने कहा कि बुकिंग के वक्त उन्हें दूसरा सैंपल फ्लैट दिखाया गया था लेकिन जब उन्होंने अपने फ्लैट का मुआयना किया, तो पाया कि घर के उत्तर-पूर्वी कोने या ईशान कोण) में टॉयलेट बना हुआ है। उनके मुताबिक वे बेहद धार्मिक हैं और वास्तु शास्त्र को मानती हैं, इसलिए उन्होंने इस पर आपत्ति जताई। बता दें कि वास्तु में ईशान कोण में टॉयलेट बनाना वर्जित माना जाता है। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी बीमारी का फायदा उठाकर बिल्डर ने उनके फ्लैट में प्रोजेक्ट मैनेजर को ठहरा दिया, फ्लैट का स्ट्रक्चर बदल दिया और बिना बताए एग्रीमेंट रद्द कर दिया।
MahaRERA का क्या फैसला?
MahaRERA ने अपने फैसले में साफ किया कि उसके पास सिविल कोर्ट जैसे निपटारे का अधिकार नहीं है। अथॉरिटी ने अपने आदेश में कहा, “अगर खरीदार फ्लैट के लेआउट या टॉयलेट की लोकेशन से नाखुश है, तो वह रेरा अधिनियम 2016 के तहत एक अलग शिकायत दर्ज कराने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। लेकिन वह इसे एक काउंटर-क्लेम बनाकर भुगतान नहीं रोक सकता।”
क्या है कानूनी विशेषज्ञों की राय?
मुंबई की मशहूर सॉलिसिटर तृप्ति दफ्तरी के मुताबिक, इस आदेश से यह बात स्पष्ट है कि एग्रीमेंट फॉर सेल में तय की गई राशि का समय पर भुगतान करना खरीदार का कानूनी कर्तव्य है। उनके मुताबिक खरीदार अपनी उम्र, बीमारी या किसी व्यक्तिगत या धार्मिक कारणों का हवाला देकर समय पर पेमेंट करने की कानूनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
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लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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