'पत्नी को काला कहना कोई गुनाह नहीं' हाई कोर्ट ने कैसे दी एक पति को राहत?

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पत्नी ने आरोप लगाया कि पति उसके काले रंग, शर्मीले स्वभाव, कम IQ और बातचीत करने के खराब तरीके को लेकर उसे ताने मारता था।

Calling your wife dark is not cruelty Jharkhand High court
इस जोड़े की शादी एक ऑनलाइन मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया।

झारखंड हाईकोर्ट में एक बड़ा अजीबो गरीब मामला आया, जहां एक पत्नी ने अपने पति पर यह कहते हुए क्रूरता करने आरोप लगाया वो उसके काले रंग और कॉमन सेंस को लेकर तंज कसता है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण फैसले में कोर्ट ने साफ किया है कि पत्नी के काले रंग, कम IQ या खराब कम्युनिकेशन स्किल्स पर तंज कसना भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के तहत आपराधिक 'क्रूरता' के दायरे में नहीं आता है।

जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की बेंच ने आपराधिक याचिका संख्या 484/2025 पर सुनवाई करते हुए रांची की निचली अदालत की ओर से पति के खिलाफ जारी समन आदेश और 498A की कार्यवाही को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर सभी आरोपों को सच भी मान लिया जाए, तब भी यह धारा 498A का अपराध नहीं बनता है।

क्या था मामला?

इस जोड़े की शादी एक ऑनलाइन मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया।

पत्नी ने आरोप लगाया कि पति उसके काले रंग, शर्मीले स्वभाव, कम IQ और बातचीत करने के खराब तरीके को लेकर उसे ताने मारता था।

पति का दावा था कि पत्नी के कारण उसे एक बीमारी हुई, जिससे वह अभी भी पीड़ित है। उसने इसी वजह से पत्नी को घर छोड़ने के लिए कहा। इसके बाद पत्नी पहले बेंगलुरु अपनी छोटी बहन के पास और फिर कोलकाता अपनी बड़ी बहन के पास रहने चली गई।

पति ने रांची के फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की। इसके बाद पत्नी ने रांची अदालत में पति के खिलाफ 498A और स्त्रीधन (35 लाख रुपए का सामान) वापस न करने का आपराधिक मामला दर्ज कराया। 11 जून 2024 को जुडिशल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (XXI), रांची ने पति को समन जारी किया, जिसे पति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने क्यों दी राहत?

हाईकोर्ट में पति का पक्ष वकील इंद्रजीत सिन्हा और अश्विनी प्रिया ने रखा। झारखंड हाईकोर्ट ने धारा 498A की कानूनी परिभाषा का विश्लेषण करते हुए कई मुख्य बिंदुओं के आधार पर मामला रद्द किया।

सबसे पहले कोर्ट ने पाया कि मामले में किसी भी प्रकार की दहेज या अवैध संपत्ति की मांग का कोई आरोप नहीं था।

धारा 498A के तहत क्रूरता तब मानी जाती है, जब पति का व्यवहार ऐसा हो जो पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करे या उसके जीवन, शरीर या स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पहुंचाए।

कोर्ट ने माना कि रंग-रूप या आईक्यू पर तंज कसना नैतिक रूप से अनुचित हो सकता है, लेकिन यह IPC 498A के तहत क्रूरता का आपराधिक मामला चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है।

हाईकोर्ट ने पति को राहत देते हुए कहा, "पति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।"

Shubham Sharma

लेखक के बारे में

Shubham Sharma
शुभम शर्मा साल 2017 से पत्रकारिता और मीडिया जगत में काम कर रहे हैं। टीवी में इनपुट असाइनमेंट से शुरुआत करते हुए डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक का अनुभव। TV9 भारतवर्ष और मनीकंट्रोल हिंदी (Network 18) जैसे बड़े संस्थानों के बाद अब लाइव हिंदुस्तान में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर खबरों को आप तक पहुंचाने के काम कर रहे हैं। और पढ़ें
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