
राजभवन अब लोकभवन कहलाएंगे; केवल नाम नहीं बदला, कैसे यह मानसिकता बदलने का प्रयास
पिछले 10 वर्षों में नाम परिवर्तनों का यह सिलसिला तेजी से बढ़ा है, जो ब्रिटिश कालीन विरासत को पीछे छोड़ने की दिशा में प्रयास है। 2016 में प्रधानमंत्री आवास का नाम 7 रेसकोर्स रोड से बदलकर लोक कल्याण मार्ग किया गया था।
देश के सभी राज्यों में राजभवनों को अब लोकभवन नाम से जाना जाएगा। उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों के राज्यपालों ने इसकी शुरुआती भी कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद उठाया गया है, जो सरकारी संस्थानों की छवि को जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। राज्यपालों ने अपनी पोस्ट में कहा कि यह नाम परिवर्तन न केवल प्रतीकात्मक है, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने वाला कदम है। इससे पहले भी विभिन्न स्तरों पर नाम बदले गए हैं, जो सत्ता के बजाय सेवा को प्राथमिकता देने का संदेश है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नाम बदलने का सिलसिला चल पड़ा है। बीजेपी के सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी की यह सोच उनके लंबे समय से चली आ रही जन-सेवा की दृष्टि को दर्शाती है। सरकारी भवनों के नाम अब सेवा और कर्तव्य की भावना से प्रेरित हो रहे हैं, जो बताता है कि शासन का मूल मंत्र जनता की भलाई है। एक सीनियर बीजेपी नेता ने कहा, 'ये बदलाव सतही नहीं लगते, बल्कि एक गहन मानसिक परिवर्तन के सूचक हैं।' उनका मानना है कि संस्थाएं भी अपनी भाषा बोलती हैं और आज ये सेवा, कर्तव्य व नागरिक-प्रथम शासन की भाषा बोल रही हैं।
बीते 10 साल में बदले गए कई सारे नाम
पिछले 10 वर्षों में नाम परिवर्तनों का यह सिलसिला तेजी से बढ़ा है, जो ब्रिटिश कालीन विरासत को पीछे छोड़ने की दिशा में प्रयास है। 2016 में प्रधानमंत्री आवास का नाम 7 रेसकोर्स रोड से बदलकर लोक कल्याण मार्ग किया गया था। यह जनकल्याण को प्राथमिकता देने का प्रतीक बना। इसी क्रम में राज पथ को कर्तव्य पथ नाम दिया गया, जो कर्तव्यनिष्ठा की याद दिलाता है। हाल ही में नया प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर सेवा तीर्थ के रूप में जाना जाएगा, जबकि केंद्रीय सचिवालय अब कर्तव्य भवन कहलाता है।





