पीने के पानी में बैक्टीरिया, गंदे शौचालय; CAG रिपोर्ट में खुली बड़े रेलवे स्टेशनों की पोल
CAG ने अपनी रिपोर्ट में देश के तमाम रेलवे स्टेशनों पर कमियों पर ध्यान दिलाया है। रिपोर्ट में कहा गया कि देश के कई रेलवे स्टेशनों पर वाटर कूलर के पानी के सेंपल में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला है। यह बैक्टीरिया आम तौर पर इंसानी मल में पाया जाता है।

देश के बड़े-बड़े रेलवे स्टेशनों पर साफ-सफाई को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। 12 अगस्त को संसद में पेश की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के कई स्टेशनों के पेयजल वाले पानी में ई.कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है, जो कि चिंता का विषय है। बता दें, यह बैक्टीरिया आम तौर पर इंसानी मल में पाया जाता है।
पीटीआई कि रिपोर्ट के मुताबिक CAG ने 'भारतीय रेलवे में गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं और स्वच्छता' नामक रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों पर रहने वाली गंदगी की भी जिक्र किया। रिपोर्ट में कहा गया कि रेल मंत्रालय ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए जो मानक तैयार किए हैं। रेलवे के विभिन्न जोन उनका पालन करने में असमर्थ रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि बड़े-बडे़ स्टेशनों पर पीने का पानी गंदा है, शौचालय भी स्वच्छ नहीं हैं और साफ-सफाई में भी कमी है।
किन-किन रेलवे स्टेशनों की हुई जांच?
CAG की रिपोर्ट में बताया गया कि जिन स्टेशनों की जांच की गई है। इसमें दक्षिणी रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़, दक्षिण मध्य रेलवे का हैदराबाद, मध्य रेलवे के चार स्टेशन (छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला) और पूर्वी रेलवे का मधुपुर स्टेशन शामिल है। इन सभी स्टेशनों पर वाटर कूलर के पानी के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला है।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, "CAG की रिपोर्ट में बताया गया है कि 2022-23 के दौरान भी आठ जोन के करीब 49 स्टेशनों और 2023-34 के दौरान करीब 56 स्टेशनों के पानी सैंपल्स में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया था ।
गाइडलाइंस का पालन नहीं कर रहे रेलवे स्टेशन
CAG की रिपोर्ट में कहा गया कि रेलवे बोर्ड ने यात्रियों की सुविधा के लिए जिन गाइडलाइंस को बनाया था। स्टेशन उनका पालन करने में असमर्थ रहे हैं। ऑडिट में पता चला है कि 512 स्टेशनों की जांच करने पर करीब 458 इन गाइडलाइंस में फेल हो गए। इन 458 स्टेशनों पर एमईए या तो बिल्कुल भी उपलब्ध नहीं थे या गाइडलाइंस की तुलना में कम थे।
दिल्ली, हावड़ा स्टेशन पर भी परेशानी
CAG की रिपोर्ट में बताया गया कि NSG-1 कैटेगरी में आने वाले स्टेशनों जैसे की नई दिल्ली, सियालदह, हावड़ा, CSMTक और मुंबई सेंट्रल जैसे स्टेशनों पर भी साफ-सफाई और बैठने की व्यवस्था की भारी कमी है। इसके अलावा यहां पर डस्टबिन और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन इंडिकेटर बोर्ड की भी कमी है। रिपोर्ट में कहा गया, "NSG-1 कैटेगरी वाले स्टेशनों की ऑडिट जांच में यात्रियों के लिए ज़रूरी सुविधाओं में कमियाँ पाई गईं, जिनमें पीने के पानी के नल (12 स्टेशन), पंखे और वॉटर कूलर (आठ-आठ स्टेशन) और साइनबोर्ड (पाँच स्टेशन) शामिल हैं।"
CAG ने सिफारिश भी दी
कैग ने केवर खामियां ही उजागर नहीं की बल्कि इनको सुधारने के लिए कुछ सिफारिश भी की है। रिपोर्ट में कहा गया कि रेलवे पानी की सप्लाई सिस्टम की जांच और पीने के पानी की क्वालिटी की पूरी टेस्टिंग के लिए तय प्रोटोकॉल का पालन पक्का करें, जिसमें 'यूनिफॉर्म ड्रिंकिंग वॉटर क्वालिटी प्रोटोकॉल' के तहत सभी पैरामीटर शामिल हों।" इसके अलावा बाकी चीजों पर भी ध्यान दिया जाए।


