‘समुद्र मंथन’ के लिए सरकार ने खोला खजाना, क्या है इसके पीछे का पूरा प्लान

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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एक बार फिर से ‘समुद्र मंथन’ की तैयारी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को इसके लिए 84,084 करोड़ रुपए की राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दी। इसके पीछे तेल और गैस की खोज का भी मकसद है।

Samudra Manthan
समुद्र मंथन की है तैयारी।

एक बार फिर से ‘समुद्र मंथन’ की तैयारी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को इसके लिए 84,084 करोड़ रुपए की राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल एवं गैस की खोज, अन्वेषण कुओं की ड्रिलिंग और नई खोजों के लिए साझा बुनियादी ढांचे के विकास में आंशिक सहायता प्रदान करना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत लागू की जाने वाली यह योजना समुद्री अन्वेषण से जुड़ी समूची मूल्य शृंखला में व्यापक हस्तक्षेपों का प्रावधान करती है।

गहरे समुद्र में ड्रिलिंग

अधिकारियों ने कहाकि इस योजना के तहत गहरे समुद्र और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में प्रत्येक कुएं की ड्रिलिंग के लिए 650 करोड़ रुपए तक की सहायता दी जाएगी, ताकि घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाया जा सके और आयात पर निर्भरता कम की जा सके। समुद्र मंथन योजना के कुल परिव्यय में से 43,200 करोड़ रुपए साल 2031 तक पांच वर्षों के दौरान गहरे समुद्र में ड्रिलिंग गतिविधियों के समर्थन के लिए आवंटित किए जाएंगे। इसके अलावा, 10,000 करोड़ रुपए नई खोजों को उत्पादन में लाने के लिए आवश्यक साझा बुनियादी ढांचे पर खर्च किए जाएंगे।

हजारों करोड़ का प्रावधान

आधिकारिक बयान के मुताबिक, योजना के तहत समुद्री क्षेत्र से आंकड़ा जुटाने के लिए 28,534 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। जबकि तेल एवं गैस विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के विकास के लिए 2,000 करोड़ रुपए आवंटित किए जाएंगे। गौरतलब है कि गहरे समुद्र क्षेत्रों में, जहां पानी की गहराई 1,500 मीटर से अधिक होती है, एक कुएं की ड्रिलिंग पर 10 करोड़ डॉलर से 25 करोड़ डॉलर तक की लागत आ सकती है और इसके सफल होने की कोई गारंटी नहीं होती है।

यह होगा फायदा

बयान में कहा गया कि यह योजना समुद्री बेसिन क्षेत्रों में अन्वेषण गतिविधियों को तेज करेगी, निवेश आकर्षित करेगी और भारत की अपतटीय हाइड्रोकार्बन क्षमता को विकसित करने में मदद करेगी। भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता पिछले दशक में 77 प्रतिशत से बढ़कर 88 प्रतिशत हो गई है, जबकि देश अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है। सरकार का कहना है कि यह योजना 60 करोड़ टन से अधिक तेल एवं गैस भंडार की खोज, घरेलू उत्पादन में वृद्धि, रोजगार सृजन और विनिर्माण को बढ़ावा देने में सहायक होगी।

पीएम मोदी ने पेश की थी योजना

इस योजना के तहत उन्नत प्रौद्योगिकी, बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण और साझा बुनियादी ढांचे के जरिए अपतटीय अन्वेषण को गति दी जाएगी, जिससे दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। इस योजना की रूपरेखा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबसे पहले 2025 में अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान पेश की थी। उन्होंने देश के अपतटीय ऊर्जा संसाधनों के दोहन के लिए आधुनिक ‘समुद्र मंथन’ का आह्वान किया था। भारत ने 1997 के बाद से अपनी तेल और गैस अन्वेषण नीति में तीन बार बदलाव किए हैं। इसके तहत लागत वसूली के बाद मुनाफा साझा करने वाले उत्पादन साझेदारी अनुबंध (पीएससी) से हटकर अब राजस्व साझेदारी और अन्वेषण प्रतिबद्धताओं पर आधारित प्रणाली अपनाई गई है।

Deepak Mishra

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Deepak Mishra

मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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