बांग्लादेश से लगी इस सीमा पर पहली बार होगी फेंसिंग, BSF ने तैयार किया 90 KM का मास्टर प्लान
भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए BSF सुंदरबन में पहली बार 90 किमी लंबी फेंसिंग करने जा रही है। सुरक्षा मजबूत करने के लिए फीजिबिलिटी स्टडी और आधुनिक निगरानी पर काम शुरू हो गया है।

बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए पहली बार पश्चिम बंगाल के सुंदरबन क्षेत्र में भारत-बांग्लादेश सीमा पर लगभग 90 किलोमीटर लंबी फेंसिंग (बाड़बंदी) की तैयारी सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने शुरू कर दी गई है।
यह इलाका जंगलों, ज्वारीय दलदलों, तटबंधों और अनेक नदी-नालों के कारण देश की सबसे चुनौतीपूर्ण सीमा क्षेत्रों में माना जाता है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर बीएसएफ ने इस परियोजना के लिए व्यवहार्यता (फीजिबिलिटी) और तकनीकी अध्ययन शुरू कर दिया है। वर्तमान में सुंदरबन के नदी क्षेत्र में किसी प्रकार की स्थायी बाड़ नहीं है।
सीमा की निगरानी के लिए बीएसएफ फ्लोटिंग बॉर्डर आउटपोस्ट (एफबीओपी) के माध्यम से गश्त करती है। अब समुद्री गश्त को और मजबूत करने के साथ आधुनिक निगरानी व्यवस्था विकसित करने की योजना बनाई गई है। बीएसएफ के महानिदेशक प्रवीण कुमार ने 11 से 14 जुलाई के बीच सुंदरबन का दौरा कर प्रस्तावित फेंसिंग कार्य और सीमा सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की थी।
सुंदरबन में अब तक कभी फेंसिंग नहीं की गई
अधिकारियों के अनुसार, सुंदरबन में अब तक कभी फेंसिंग नहीं की गई है। बैठक में सीमा पर फेंसिंग का कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करने, नदी क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, अतिरिक्त सर्चलाइट और अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाने पर भी चर्चा हुई। सुंदरबन में भारत-बांग्लादेश सीमा का लगभग 71 किलोमीटर हिस्सा सुंदरबन वन्यजीव अभयारण्य से होकर गुजरता है। संरक्षित वन क्षेत्र होने से यहां किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य पर्यावरणीय नियमों के अधीन होगा और विशेष अनुमति पर ही आगे बढ़ाया जाएगा।
नई सरकार में परियोजना में तेजी
अफसरों का कहना है बंगाल में सरकार बदलने के बाद इस परियोजना में तेजी आई है। पहले संयुक्त भूमि सर्वे की अनुमति नहीं मिलने से योजना आगे नहीं बढ़ सकी थी। अधिकारियों का कहना है कि सुंदरबन घुसपैठ का प्रमुख मार्ग नहीं है, पर इसका उपयोग तस्करी व अन्य सीमा पार अपराधों के लिए होता है।
फेंसिंग को लेकर स्थानीय लोगों में भूमि अधिग्रहण को लेकर कुछ आशंकाएं हैं। कई परिवारों और क्षेत्र में संचालित मध्यम आकार के होटल एवं लॉज संचालकों ने विस्थापन की चिंता जताई है। प्रशासन ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि प्रभावित लोगों को नियमानुसार मुआवजा और पुनर्वास उपलब्ध कराया जाएगा। लोगों को समझाया गया है कि यह परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है। जल्द ही बीएसएफ और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम भूमि का सर्वेक्षण शुरू करेगी।
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