भारत, चीन, रूस ले आए डॉलर का तोड़; क्या है BRICS का नया पेमेंट प्लान? बौखलाएगा US

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2024 में ब्रिक्स देशों के बीच लगभग 1.17 लाख करोड़ डॉलर का व्यापार हुआ। वहीं कुल वैश्विक निर्यात में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत है। ऐसे में US कई बार ब्रिक्स देशों को डॉलर के विकल्प खोजने को लेकर चेतावनी दे चुका है।

Brics Summit India
पुतिन और जिनपिंग सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आ रहे हैं

भारत इस सप्ताह BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। नई दिल्ली में शनिवार से शुरू हो रहे इस सम्मेलन में 11 देशों के शीर्ष नेता जुटेंगे। इस बीच अब ब्रिक्स देशों की डॉलर पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी वाली योजना पर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। दरअसल भारत, चीन और रूस की अगुवाई वाला ब्रिक्स कई सालों से डॉलर का विकल्प तलाशने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में यह समूह अमेरिका से हमेशा खटकता रहा है। अब आगामी शिखर सम्मेलन से पहले भारत ने क्रॉस बॉर्डर भुगतान को आसान बनाने के लिए एक अहम प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इससे अमेरिका की बौखलाहट और बढ़ सकती है।

दरअसल BRICS बीते कुछ समय से एक ऐसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर काम कर रहा है जिससे भारत, चीन और रूस जैसे देशों की डिजिटल करेंसियों को इंटीग्रेट किया जा सके। अब ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच केंद्रीय बैंकों द्वारा जारी डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की वकालत करेगा।

हालांकि भारत किसी ऐसे यूनिफाइड पेमेंट नेटवर्क का समर्थन नहीं कर रहा है जिसे अमेरिकी डॉलर या SWIFT के विकल्प के रूप में देखा जाए। इसकी वजह यह है कि भारत नहीं चाहता कि ब्रिक्स समूह को अमेरिका या पश्चिमी देशों के खिलाफ खड़े ब्लॉक के रूप में देखा जाए। यही कारण है कि भारत एक साझा 'ब्रिक्स पेमेंट सिस्टम' बनाने के बजाय द्विपक्षीय डिजिटल करेंसी कनेक्टिविटी पर जोर दे रहा है।

डिजिटल और स्थानीय करेंसी पर जोर

रिपोर्ट के मुताबिक भारत का प्रस्ताव है कि ब्रिक्स देश अपनी-अपनी सेंट्रल बैंक की डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ें। इससे मध्यस्थ बैंकों पर निर्भरता कम होगी और लेनदेन की लागत में भारी गिरावट आएगी। आसान भाषा ने कहें तो भारत किसी तीसरे देश की करेंसी यानी डॉलर का उपयोग करने के बजाय सदस्य देशों की अपनी करेंसी में व्यापार करने की बात पर जोर दे रहा है।

क्या है भारत का प्लान?

जानकारी के मुताबिक इस सिस्टम में भारत के ई-रुपया, चीन की डिजिटल युआन और रूस की डिजिटल रूबल जैसी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी को एक साझा तकनीकी प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इसमें हर देश अपनी करेंसी पर पूरा कंट्रोल बनाए रखेगा। बदलाव सिर्फ इतना होगा कि इन करेंसी के जरिए आपसी लेनदेन आसान हो जाएगा। इस सिस्टम के जरिए ब्रिक्स देश आपस में होने वाले व्यापार का भुगतान सीधे अपनी डिजिटल करेंसी में कर सकेंगे। इसके लिए ना तो डॉलर की जरूरत होगी और न ही स्विफ्ट जैसे डॉलर आधारित सिस्टम से होकर भुगतान करना पड़ेगा।

भारत इस पूरे मॉडल को आकार देने में अहम भूमिका निभा रहा है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि करेंसी को मिलाने की बजाय सिस्टम को आपस में जोड़ना बेहतर रास्ता है। इसका आधार भारत का खुद का डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई है। UPI ने देश के अंदर डिजिटल पेमेंट को काफी आसान बनाया है और इसी मॉडल को अन्य देशों के साथ भी जोड़ा जा सकता है।

काम कैसे करेगा ब्रिक्स का पेमेंट सिस्टम?

ब्रिक्स डिजिटल पेमेंट सेटलमेंट साइकिल पर काम करेगा। इसका मतलब है कि हर लेनदेन का भुगतान तुरंत नहीं किया जाएगा। एक तय अवधि में आयात और निर्यात का हिसाब जोड़ा जाएगा और आखिर में सिर्फ अंतर की रकम का भुगतान होगा। उदाहरण के लिए, अगर भारत एक महीने में चीन से 500 अरब रुपये का सामान खरीदता है और चीन भारत से 450 अरब रुपये का सामान लेता है, तो भारत को सिर्फ 50 अरब रुपये का ही भुगतान करना होगा। इससे ट्रांजेक्शन कॉस्ट भी कम होंगी।

Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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