पुतिन का दौरा कन्फर्म, जिनपिंग भी आएंगे भारत? ट्रंप को टेंशन देगी ये तिकड़ी
नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल होंगे। 7 साल बाद जिनपिंग के भारत दौरे और मोदी-पुतिन के साथ इस महाजुटान से अमेरिका की टेंशन बढ़ना तय है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

भारत की राजधानी नई दिल्ली एक बार फिर दुनिया की सबसे बड़ी कूटनीतिक हलचल का गवाह बनने जा रही है। 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत आना कन्फर्म हो गया है। इसके साथ ही, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी दिल्ली आने की पूरी संभावना है। अगर सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार रहा, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पुतिन और जिनपिंग की यह ताकतवर 'तिकड़ी' दिल्ली में एक मंच पर नजर आएगी। इस महाजुटान को वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, जिसका सीधा असर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीतियों पर भी देखने को मिल सकता है।
दिल्ली के 'भारत मंडपम' में सजेगा ब्रिक्स का मंच
भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली के 'भारत मंडपम' में यह महासम्मेलन आयोजित किया जा सकता है। रूसी समाचार एजेंसी TASS और क्रेमलिन के सहयोगी यूरी उशाकोव ने पुतिन के दौरे की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। आपको बता दें कि पुतिन इससे पहले दिसंबर 2025 में 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेने नई दिल्ली आए थे।
7 साल बाद भारत आ रहे शी जिनपिंग, क्या सुधरेंगे रिश्ते?
इस सम्मेलन का सबसे चर्चित पहलू चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का संभावित भारत दौरा है। जिनपिंग आखिरी बार अक्टूबर 2019 में चेन्नई के पास महाबलीपुरम में पीएम मोदी के साथ दूसरे अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे। इसके बाद अप्रैल-मई 2020 में गलवान और पूर्वी लद्दाख में हुए सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गए थे।
हालांकि, अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में हुए पिछले ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मोदी और जिनपिंग की मुलाकात के बाद रिश्तों में नरमी आनी शुरू हुई थी। अब पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में जिनपिंग का यह दिल्ली दौरा दोनों देशों के बीच जमी बर्फ को पूरी तरह पिघलाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
पुतिन और जिनपिंग की होगी विशेष द्विपक्षीय वार्ता
ब्रिक्स सम्मेलन के इतर रूसी राष्ट्रपति पुतिन और शी जिनपिंग के बीच एक अलग द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। इसके अलावा पुतिन और पीएम मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान के बिश्केक में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेने वाले हैं।
अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप की क्यों बढ़ेगी टेंशन?
हाल ही में जब दिल्ली में ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई, तो चीन के विदेश मंत्री वांग यी इसमें शामिल नहीं हो पाए थे, क्योंकि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जिनपिंग की एक हाई-प्रोफाइल मीटिंग के लिए बीजिंग में रुकना पड़ा था। अब जब ब्रिक्स का दायरा काफी बढ़ चुका है जिसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया जैसे नए देश शामिल हो चुके हैं। ऐसे में यह संगठन वैश्विक आबादी का लगभग 49.5% और वैश्विक जीडीपी का 40% प्रतिनिधित्व करता है। साथ ही दुनिया के 26 फीसदी व्यापार पर अब ब्रिक्स देशों का नियंत्रण है।
भारत, रूस और चीन जैसी महाशक्तियों का एक मंच पर साथ आना पश्चिमी देशों के दबदबे को सीधी चुनौती है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि नई दिल्ली से उभरने वाली यह 'तिकड़ी' न सिर्फ 'ग्लोबल साउथ' की आवाज को और बुलंद करेगी, बल्कि यह अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से बड़ी चिंता का विषय भी बन सकती है।
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