पास बैठे थे जिनपिंग, ब्रिक्स समिट से पीएम मोदी ने दे दिया संदेश; अमेरिका को भी दो टूक
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में फैसले लेने की मौजूदा व्यवस्था ऐसी है, जिसमें ताकत और फैसले कुछ देशों के हाथ में ज्यादा है, जबकि कई देश उन फैसलों से प्रभावित होते हैं, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने का मौका कम मिलता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में साफ कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और दुनिया के शासन ढांचे में सुधार अब टाला नहीं जा सकता। नई दिल्ली में हो रहे सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स देशों को अपनी एकजुटता को ठोस नतीजों में बदलना होगा। इस दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रधानमंत्री मोदी के पास ही बैठे थे। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में फैसले लेने की मौजूदा व्यवस्था ऐसी है, जिसमें ताकत और फैसले कुछ देशों के हाथ में ज्यादा है, जबकि कई देश उन फैसलों से प्रभावित होते हैं, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने का मौका कम मिलता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स ने अपने 20 साल पूरे कर लिए हैं। यह संगठन अब एक ऐसे दौर में पहुंच गया है, जहां उसे ज्यादा जिम्मेदारी और समझदारी के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश एक-दूसरे की सोच और नजरिए का सम्मान करते हैं और आपसी सहमति से आगे बढ़ते हैं। इसका मकसद किसी के खिलाफ खड़ा होना नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर चलना है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री का इशारा अमेरिका की ओर था। पीएम मोदी ने कहा कि अब ब्रिक्स की एकता और सहमति को दुनिया के सामने ठोस काम और नतीजों में बदलने का समय आ गया है। उन्होंने भारत की अध्यक्षता में मिले सहयोग के लिए सभी सदस्य देशों का धन्यवाद भी किया।
BRICS से पीएम मोदी का क्या संदेश
पीएम मोदी ने बताया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान लोगों को केंद्र में रखकर काम किया गया। मानवता को सबसे ऊपर रखते हुए मजबूती, नए प्रयोग, सहयोग और टिकाऊ विकास पर जोर दिया गया। ब्रिक्स से आम लोगों को जोड़ने के लिए 350 से ज्यादा बैठकें हुईं और करीब 30 शहरों में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया। अगले 20 साल के लिए काम करने का तरीका मजबूत करने पर भी मोदी ने सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि अध्यक्षता हर साल बदलने से काम की रफ्तार नहीं रुकनी चाहिए। इसके लिए एक ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है, जो पुराने फैसलों पर आगे की कार्रवाई पर नजर रखे।
इस बीच, ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त बयान पर भी सहमति बन गई। शनिवार सुबह करीब 4 बजे तक इस पर बातचीत चलती रही। कई मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच मतभेद थे। खासकर ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के बीच पश्चिम एशिया व दूसरे अहम मुद्दों पर अलग-अलग राय थी। इसके बावजूद भारत ने लगातार बातचीत कर सभी पक्षों को साथ लाने की कोशिश की। आखिरकार संयुक्त बयान पर सहमति बन गई। इसे भारत की कूटनीतिक कोशिशों की बड़ी सफलता माना जा रहा है।


