BRICS Summit 2026 के पहले ही दिन बड़ी कामयाबी, नई दिल्ली डिक्लरेशन को मिली मंजूरी
सूत्रों के मुताबिक, अंतिम समय तक इसके मसौदे पर चर्चा चलती रही। कई दौर की बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच रास्ता निकाला गया। बैठक के पहले सत्र के अंत में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग भी हाथ मिलाते नजर आए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के पहले दिन शनिवार को बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली। BRICS देशों ने आपसी सहमति से नई दिल्ली घोषणा पत्र को मंजूरी दे दी। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेद के चलते घोषणा पत्र पर सहमति बनना मुश्किल हो गया था। दोनों देशों ने शुरुआत में अपने रुख पर सख्ती दिखाई थी। इसके बाद पर्दे के पीछे कई दौर की बातचीत हुई। आखिरकार सभी सदस्य देश संयुक्त घोषणा पर राजी हो गए। पीएम मोदी ने पहले दिन की बैठक खत्म होने पर इसकी जानकारी दी।
ब्रिक्स में किसी भी फैसले के लिए सभी देशों की सहमति जरूरी होती है। अगर एक भी देश किसी घोषणा का विरोध करे तो साझा बयान जारी नहीं हो सकता। यही वजह थी कि ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेद के बाद घोषणा पत्र पर बातचीत काफी अहम हो गई थी। सूत्रों के मुताबिक, अंतिम समय तक इसके मसौदे पर चर्चा चलती रही। कई दौर की बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच रास्ता निकाला गया। बैठक के पहले सत्र के अंत में प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी एक-दूसरे से हाथ मिलाते नजर आए।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में क्या कहा
पीएम मोदी ने अपने समापन भाषण में कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और इसे पुराने संस्थानों के सहारे नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में बदलाव जरूरी है। इसमें देशों को उचित जगह देने, तेजी से काम करने और नए नियम बनाने पर ध्यान देना होगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य की तकनीक और उससे जुड़े नियम बनाने में ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की बराबर भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया में लिए जा रहे फैसलों और उनके जमीन पर दिखने वाले नतीजों के बीच का अंतर कम करना होगा। इसके लिए देशों को मिलकर काम करना होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नई दिल्ली घोषणा पत्र ने ब्रिक्स देशों के साझा संकल्प को आगे बढ़ाने की साफ दिशा तय कर दी है। अब असली जिम्मेदारी इन फैसलों को जमीन पर उतारने की है। उन्होंने कहा कि सिर्फ घोषणाएं करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें ठोस नतीजों में बदलना होगा। भारत की मेजबानी में हो रहे दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन में दुनिया की बदलती व्यवस्था, विकासशील देशों की भूमिका, भविष्य की तकनीक और वैश्विक संस्थानों में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। नई दिल्ली घोषणा पत्र को आम सहमति से मंजूरी मिलना भारत के लिए अहम कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।


