BRICS के मंच से पाकिस्तान को समझा दिया गया! पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा
दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स समिट में पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। पिछले साल हुए पहलगाम आतंकी हमले की ब्रिक्स देशों ने कड़ी निंदा की है। पाकिस्तान के आतंकी संगठन ने ही हमले को अंजाम दिया था।

BRICS 2026: ब्रिक्स देशों ने शनिवार को पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इस हमले को पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी संगठन टीटीपी ने अंजाम दिया था और इसमें 26 पर्यटकों की जान चली गई थी। इसके अलावा, ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की अपील की और इस खतरे से निपटने में दोहरे मापदंडों को खारिज करने की बात कही।
पहलगाम हमले की कड़ी निंदा किए जाने का साफ मतलब है कि ब्रिक्स देशों ने पाकिस्तान को उसका बिना नाम लिए कड़ा संदेश दे दिया है। यह स्पष्ट कर दिया है कि जो देश आतंकवाद फैलाते हैं, उनसे कड़े तरीके से निपटना चाहिए। पहलगाम हमले के बाद भी दुनियाभर के देशों ने आतंकी हमले की कड़ी निंदा की थी। इसके बाद मई महीने में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान में आतंकवादियों की कमर तोड़ दी थी और बड़े पैमाने पर एयर स्ट्राइक्स की थीं।
ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के किसी भी रूप के प्रति जीरो टॉलरेंस और इस खतरे का मुकाबला करने में दोहरे मापदंड छोड़ने की भारत की अपील का पूरी तरह से समर्थन किया। ब्रिक्स समिट में सर्वसम्मति से घोषणापत्र पारित हुआ। इसमें कहा गया है, "हम आतंकवादियों के बॉर्डर पार मूवमेंट, आतंकवाद की फाइनेंसिंग और सुरक्षित ठिकानों सहित सभी रूपों और रूपों में आतंकवाद का मुकाबला करने के अपने कमिटमेंट को दोहराते हैं।"
घोषणापत्र में आगे कहा गया, "हम दोहराते हैं कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए और आतंकवादी गतिविधियों और उनके समर्थन में शामिल सभी लोगों को संबंधित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।" ब्रिक्स ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद से लड़ना देशों की पहली जिम्मेदारी है और आतंकवादी खतरों को रोकने और उनका मुकाबला करने के लिए दुनियाभर में की जाने वाली कोशिशों को यूएन के चार्टर समेत इंटरनेशनल कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पूरी तरह पालन करना चाहिए।
घोषणा में यह भी कहा गया, "हम आतंकवाद के किसी भी काम की कड़ी निंदा करते हैं, उसे क्रिमिनल और गलत मानते हैं, चाहे उसका मकसद कुछ भी हो, जब भी, कहीं भी और किसी ने भी किया हो।" इसमें कहा गया, "हम 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू और कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हैं, जिसमें 26 लोग मारे गए और कई घायल हुए।"


