ब्रिक्स साझा बयान जारी करने पर सहमत, सुबह 4 बजे तक चली माथापच्ची, भारत की सफलता
BRICS Joint Statement: ब्रिक्स समिट में सदस्य देशों के बीच में साझा बयान जारी करने पर सहमति बन गई है। पश्चिम एशिया में युद्ध में आमने-सामने आए ईरान और यूएई और सऊदी अरब ने भी इसमें अपनी सहमति जताई है।

BRICS Joint Statement: नई दिल्ली में जारी ब्रिक्स समिट के 18वें संस्करण में भारत सरकार को बड़ी सफलता मिली है। सुबह चार बजे सदस्य देशों के बीच चली माथापच्ची के बीच आखिरकार एक साझा बयान जारी करने पर सहमति बन गई है। पश्चिम एशिया में एक दूसरे के खिलाफ खड़े सऊदी अरब, यूएई और ईरान ने भी इस पर अपनी सहमति जताई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुबह चार बजे तक चली सदस्य देशों की बैठक में संयुक्त घोषणा पत्र पर सहमति बनी है। इस घोषणापत्र में किसी भी देश का नाम लिए बिना एकतरफा युद्ध की कार्रवाई की निंदा की गई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इसे शनिवार शाम चार बजे जारी किया जाएगा।
गौरतलब है कि ब्रिक्स समिट में साझा बयान पर सहमति बनाना भारत के लिए एक बड़ी चुनौती थी। क्योंकि कई सदस्य देश इस समय युद्ध में उलझे हुए हैं। पश्चिम एशिया में अमेरिका के नेतृत्व में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ईरान के खिलाफ खड़े हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ रूस अभी भी यूक्रेन के साथ युद्ध में उलझा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, भारत इस पर बैलेंसिंग रुख अपनाने की कोशिश कर रहा है।
बता दें कि ब्रिक्स में सभी सदस्य देशों को बराबर का दर्जा दिया जाता है। इसका मतलब है कि जब तक सभी देश सहमत नहीं हो जाते। तब तक अंतिम संयुक्त घोषणा पत्र जारी नहीं किया जा सकता है। युद्ध में उलझे ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेदों के चलते ब्रिक्स की कई बैठकों में भी सहमति नहीं बन पाई थी। लेकिन अब भारतीय कूटनीति ने सभी सदस्य देशों के एक साथ आने के लिए सहमत कर लिया है।
BRICS में भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच जारी तनाव के बीच साझा बयान जारी करने को लेकर सहमति बनाना भारत सरकार की एक बड़ी सफलता है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से ब्रिक्स की पिछली बैठकों में साझा बयान पर सहमति नहीं बन पाई थी। मई में नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेस मंत्रियों की बैठक भी हुई थी। लेकिन उस वक्त पश्चिम एशिया का माहौल गर्म होने की वजह से दो दिन की बैठक के बाद भी कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया था। लेकिन इस बार भारत सरकार की कूटनीति की वजह से सभी पक्ष एक बयान जारी करने पर सहमत हुए हैं।
जी-20 में भी भारत ने दिखाया था कूटनीति का जलवा
भारत की कूटनीति का दमखम दुनिया 2023 में नई दिल्ली जी-20 शिखर सम्मेलन में देख चुकी है। उस वक्त भारत के नेतृत्व में हुए शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली के ऊपर रूस की आलोचना करने का दवाब था। जी-20 के तमाम सदस्य देश रूस को यूक्रेन के मुद्दे पर घेरने के लिए तैयार थे। लेकिन उस वक्त भारत ने अपनी दोस्ती निभाते हुए रूस की सीधे तौर पर आलोचना नहीं की। इसके अलावा उसे यूएन चार्टर का सम्मान करने की बात कही गई। एक समय पर भारत पर दबाव डाल रहे पश्चिमी देश भी इस संयुक्त बयान पर सहमति देने के लिए तैयार हुए थे।
इस शिखर सम्मेलन में संयुक्त बयान जारी होना लगभग असंभव माना जा रहा था। लेकिन इसके बाद भी भारत ने अपनी कूटनीति का परिचय देते हुए सभी सदस्य देशों के साथ बातचीत की और अंत में सफलता पूर्वक साझा बयान जारी हुआ।


