
ब्रेकअप पर मेकअप हो रहा, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की मीटिंग पर भाजपा का तंज
शहजाद पूनावाला ने कहा कि हमने इन दोनों नेताओं के बीच ट्विटर वॉर भी देखी है। आज ये दोनों बेस्ट एक्टर और बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड डिजर्व करते हैं। यह बिल्कुल साफ है कि उस नाश्ते की टेबल पर कर्नाटक की जनता मेन्यू में थी ही नहीं।'
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच शनिवार को नाश्ते पर मुलाकात हुई। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे ब्रेकअप पर मेकअप वाली मीटिंग करार दिया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता अपनी आंतरिक कलह को दबाने के लिए एकता का नाटक कर रहे हैं। पूनावाला ने कहा, 'ये नाश्ते पर बैठक नहीं थी। ये ब्रेकअप पर मेकअप वाली मीटिंग थी। ये लोग मेकअप और एकता के नाश्ते से अपना ब्रेकअप ठीक करने की कोशिश कर रहे थे। ये कहते हैं कि कोई मुद्दा ही नहीं था... वहीं खरगे कहते हैं कि इतने सारे मुद्दे थे जिन्हें ठीक करना पड़ा। परमेश्वर कहते हैं कि मुझे भी सीएम बनाया जा सकता है। वीरप्पा मोइली कहते हैं कि नेतृत्व बहुत गैर-जिम्मेदाराना रहा कि ऐसे मुद्दों को होने दिया। ये सब कुछ झूठ था।'
शहजाद पूनावाला ने कहा कि हमने इन दोनों नेताओं के बीच ट्विटर वॉर भी देखी है। आज ये दोनों बेस्ट एक्टर और बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड डिजर्व करते हैं। आज एक बात बिल्कुल साफ है कि उस नाश्ते की टेबल पर कर्नाटक की जनता मेन्यू में थी ही नहीं। सिर्फ और सिर्फ सत्ता की राजनीति थी, जनता की नहीं।' इस बीच, जनता दल (सेक्युलर) ने भी कांग्रेस सरकार पर जोरदार हमला बोला है। पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार सत्ता मजबूत करने व गुटबाजी संभालने में लगे हैं, जबकि राज्य के असली मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं।
JDS ने भी कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना
जेडीएस ने लिखा, 'कांग्रेस में हाईकमान को नाश्ता परोसने के लिए भी दखल देना पड़ता है! कर्नाटक की कांग्रेस सरकार झूठे वादों और लोगों को धोखा देकर सत्ता में आई थी। महज ढाई साल में ही कुर्सी के लिए गुटों में बंट गई। सत्ता के लिए सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार सुबह से ही अपने विरोधी बने सहयोगी विधायकों को खिलाकर-पिलाकर और उन पर बाज की तरह नजर रखकर अपना झुंड संभाल रहे हैं।' पार्टी ने आगे कहा कि राज्य में किसान बिना समर्थन मूल्य के परेशान हैं। सूखे से नुकसान, गन्ने-मक्के के दाम गिरने से अन्नदाता कंगाल हो गए हैं। कीमतें बढ़ रही हैं, हजारों सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर का बंटाधार है, विकास नाममात्र को नहीं। आम जनता त्रस्त है। लेकिन इसके बजाय सीएम-डीसीएम नाश्ता मीटिंग, हाईकमान मीटिंग, समर्थक मीटिंग और कुर्सी के लिए मंदिर दौड़ में लगे हैं। राज्य की हालत को रसातल में पहुंचा दिया है।





