चीन के लिए कैसे काल बनती जा रही है ब्रह्मोस? बैठे-बैठे ही भारत मचा देगा तबाही

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

India-China: जब भारत ने पाकिस्तानी एयर बेस पर हमला किया तो इसकी सटीकता और लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता का पता चला। ब्रह्मोस के कारण ही पाकिस्तान को युद्धविराम के लिए मजबूर होना पड़ा।

चीन के लिए कैसे काल बनती जा रही है ब्रह्मोस? बैठे-बैठे ही भारत मचा देगा तबाही
ब्रह्मोस मिसाइल की मदद से भारत चीन को चौतरफा घेर रहा है।

India-China Relation: ऑपरेशन सिंदूर के बाद ब्रह्मोस की धमक लगातार बढ़ रही है। इसके लिए करीब तीन आसियान देशों ने भारत के साथ समझौते किए हैं। चौथा देश थाईलैंड भी इस मिसाइल पर विचार कर रहा है। भारत इसी मिसाइल की मदद से चीन को घेरने की तैयारी कर रहा है। भारत दक्षिण चीन सागर में अपनी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की पहुंच बढ़ा रहा है। ताइवान टॉक्स को दिए एक इंटरव्यू में लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर (रिटायर्ड) ने इसकी पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस वाली इस रणनीति का मकसद सिर्फ चीन को निशाना बनाना नहीं बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत सुरक्षा घेरा बनाना है।

आपको बता दें कि अपनी श्रेणी की सबसे तेज क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने शानदार प्रदर्शन के बाद दुनिया का ध्यान खींचा है। इस दौरान जब भारत ने पाकिस्तानी एयर बेस पर हमला किया तो इसकी सटीकता और लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता का पता चला। ब्रह्मोस के कारण ही पाकिस्तान को युद्धविराम के लिए मजबूर होना पड़ा।

इन देशों ने किए भारत के साथ समझौते

पिछले एक साल में वियतनाम और इंडोनेशिया ने भारत के साथ ब्रह्मोस के लिए समझौते किए हैं। मलेशिया और थाईलैंड भी इसमें शामिल हो सकते हैं। 2022 में फिलीपींस ने अपनी तटीय सुरक्षा के लिए 37.5 करोड़ डॉलर में ब्रह्मोस खरीदने वाला पहला देश बना। ये सभी देश विवादित दक्षिण चीन सागर के आसपास स्थित हैं। उन्हें चीन के आक्रामक और तेजी से बढ़ते दबदबे का सामना करना पड़ता है।

अब चीन समझेगा कि मजबूत भारत से सामना हो रहा

लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर इंटरव्यू के दौरान कहा कि ब्रह्मोस बेल्ट रणनीति से भारत-चीन संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि इससे चीन को निश्चित रूप से यह एहसास होगा कि उसका सामना एक मजबूत भारत से हो रहा है। पीआर शंकर ने कहा, "चीन ने देखा है कि ब्रह्मोस कैसे काम करती है। दक्षिण चीन सागर में चीन अपनी अधिकतम रेंज पर काम कर रहा है।"

क्या है ब्रह्मोस बेल्ट?

इसका मतलब किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन से नहीं है। विशेषज्ञ इस शब्द का इस्तेमाल भारत के उन देशों के साथ बढ़ते ब्रह्मोस पार्टनरशिप नेटवर्क के लिए कर रहे हैं, जिनका चीन के साथ समुद्री विवाद है। इस विवाद के केंद्र में दक्षिण चीन सागर है, जो एक प्रमुख शिपिंग रूट है। वैश्विक व्यापार का 21% हिस्सा इसी रूट से होता है। चीन अपनी दक्षिण चीन सागर के लगभग 90% हिस्से पर अपना दावा करता है, जिससे वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान के साथ विवाद पैदा हो गए हैं। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने द्वीप बनाकर और नौसैनिक गश्त करके अपने दावे को मजबूत करने की कोशिश की है। इसके कारण फिलीपींस और वियतनाम के साथ टकराव की स्थिति पैदा हुई है।

अब दक्षिण-पूर्व एशिया के और देश ब्रह्मोस एंटी शिप मिसाइलें हासिल कर रहे हैं। तो स्थिति बदलने लगी है। वियतनाम के साथ डील लगभग 5900 करोड़ रुपये की है, जबकि इंडोनेशिया ने 1900 करोड़ रुपये की कीमत वाली दो ब्रह्मोस खरीदने का फैसला किया है। अगर थाईलैंड जैसे और देश भी यह मिसाइल हासिल करते हैं तो नतीजा यह होगा कि एशिया के कुछ सबसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ब्रह्मोस की एक चेन बन जाएगी। विशेषज्ञ इसे भारत की एक चालाक चाल के तौर पर देख रहे हैं। इससे दक्षिण चीन सागर में कोई सैनिक या जहाज भेजे बिना ही चीन की चिंताएं बढ़ गई हैं।

ब्रह्मोस क्यों है इतना खास?

290 किमी तक की उड़ान रेंज वाली यह फायर-एंड-फॉरगेट मिसाइल जमीन, जहाज या लड़ाकू विमान से लॉन्च की जा सकती है। ब्रह्मोस बहुत तेज और सटीक है। इसे रोकना लगभग असंभव है। इसी मिसाइल ने नूर खान, सरगोधा और मुरीद जैसे पाकिस्तानी एयर बेस पर सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया था। ब्रह्मोस भारत के लिए गेम चेंजर साबित हुई। चीन का कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम ब्रह्मोस को रोक नहीं सकता। ब्रह्मोस की रफ्तार और सटीक निशाना लगाने की क्षमता चीनी जहाजों के लिए बड़ा खतरा है। इससे चीन को विवादित इलाकों से दूर रहने पर मजबूर होना पड़ सकता है।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

और पढ़ें
Hindi News , इंडिया न्यूज़ , आज का मौसम , विधानसभा चुनाव , CJP Protest Live और Navratri 2026 से जुड़ी ताज़ा खबरों व पल-पल के अपडेट के लिए लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े रहें। UP Chunav 2027 , UP Vidhan Sabha Seats और UP Vidhan Sabha Candidates से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण खबरें और जानकारी यहां पढ़ें। सभी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ऐप अभी डाउनलोड करें।
Hindi NewsIndia Newsचीन के लिए कैसे काल बनती जा रही है ब्रह्मोस? बैठे-बैठे ही भारत मचा देगा तबाही