आधार अपडेट में आ रही दिक्कत? UIDAI को हाईकोर्ट से पड़ी लताड़, करोड़ों लोगों को मिलेगी राहत

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, मुंबई
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हाईकोर्ट ने आधार कार्ड में बायोमेट्रिक या तकनीकी गड़बड़ी को लेकर UIDAI को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि सिस्टम की गलती की सजा आम नागरिकों को नहीं मिलनी चाहिए। जानें कोर्ट के 4 अहम निर्देश।

आधार अपडेट में आ रही दिक्कत? UIDAI को हाईकोर्ट से पड़ी लताड़, करोड़ों लोगों को मिलेगी राहत

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) को कड़े निर्देश देते हुए कहा है कि आधार रिकॉर्ड में तकनीकी खामियों या बायोमेट्रिक गड़बड़ियों के कारण आम नागरिकों को बेवजह परेशान नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी सिस्टम की खामी की वजह से असली नागरिकों को उनके अधिकारों और सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता है।

हाईकोर्ट ने UIDAI की कार्यप्रणाली पर जताई चिंता

जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस हितेन एस. वेणेगांवकर की खंडपीठ ने 6 मई को पारित एक आदेश में UIDAI की कार्यप्रणाली की आलोचना की। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि आधार से जुड़ी तकनीकी खामियों के कारण नागरिकों को बार-बार अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, पीठ ने अपने आदेश में कहा कि आधार डेटाबेस की सत्यता बनाए रखना राष्ट्रीय महत्व का विषय है, लेकिन इसे लागू करने का तरीका 'नागरिक-केंद्रित' (सिटीजन-सेंट्रिक), सुगम और संवैधानिक होना चाहिए। कोर्ट ने कहा, "सिर्फ सिस्टम में किसी तकनीकी या बायोमेट्रिक गड़बड़ी के कारण किसी भी वास्तविक निवासी को बिना समाधान के दर-दर भटकने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता।"

क्या था पूरा मामला?

हाईकोर्ट का यह अहम आदेश 19 वर्षीय जुड़वां भाइयों- रोहित और राहुल निकलजे की याचिका पर आया है। इन दोनों भाइयों को साल 2012 में नाबालिग रहते हुए आधार कार्ड जारी किए गए थे। लेकिन, जब 2022 में इन्होंने अपने बायोमेट्रिक्स अपडेट करने की कोशिश की, तो उन्हें विभाग की तरफ से कई भ्रामक और अस्थिर जवाब मिले।

परेशानी का सबब: पहले उन्हें आधार अपडेट करने को कहा गया, फिर कार्ड रद्द करने का आवेदन देने को कहा गया। बाद में बताया गया कि कैंसिलेशन की प्रक्रिया रोक दी गई है और अंत में उनके आधार नंबर ही सस्पेंड कर दिए गए।

कहां हुई दिक्कत: आधार न होने की वजह से इन युवाओं को कॉलेज में प्रोविजनल एडमिशन लेने और हॉर्स राइडिंग (घुड़सवारी) जैसे खेलों के लिए इंश्योरेंस हासिल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर बचपन में लिए गए बायोमेट्रिक्स में कोई गलती थी, तो इसका दोष इन युवाओं पर नहीं मढ़ा जा सकता। कोर्ट ने दोनों भाइयों को 15 दिन के भीतर नया एनरोलमेंट आवेदन जमा करने और UIDAI को 4 सप्ताह के भीतर नियम के अनुसार उस पर फैसला लेने का निर्देश दिया है।

आम लोगों की राहत के लिए कोर्ट ने UIDAI को दिए ये निर्देश

नागरिकों को दफ्तरों के बेवजह चक्कर लगाने से बचाने के लिए हाईकोर्ट ने भविष्य के मामलों के लिए UIDAI को कुछ अहम दिशा-निर्देश दिए हैं:

लिखित और स्पष्ट जानकारी दें: असली नागरिकों को बिना किसी समाधान के बार-बार दफ्तर न बुलाएं। किसी भी गड़बड़ी को सुधारने की प्रक्रिया के बारे में उन्हें लिखित मार्गदर्शन दिया जाए।

सुविधा केंद्र बनाएं: नागरिकों की मदद के लिए सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में सुविधा केंद्र बनाए और संचालित किए जाएं।

4 हफ्ते में निकले समाधान: प्राप्त आवेदनों पर हर हाल में चार सप्ताह के भीतर फैसला लिया जाए। यदि आवेदन पूरा है और कोई कानूनी अड़चन नहीं है, तो तुरंत नया आधार नंबर या कार्ड जारी किया जाए।

मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं: आधार का जो भी सटीक स्टेटस है, उसकी लिखित जानकारी आवेदक को दी जाए और असली आवेदकों के प्रति मानवीय रवैया अपनाया जाए।

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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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