जज साहब बचा लीजिए… घरवाले कजिन से जबरदस्ती शादी करवा रहे; अर्जी पर क्या बोला HC?
घरवालों के दबाव से तंग आकर लड़की ने घर छोड़ दिया और हाईकोर्ट में गुहार लगाई। उसने कोर्ट को बताया कि घरवाले उसकी शादी दस साल बड़े कजिन से करवा रहे हैं लेकिन उसे फिलहाल आगे की पढ़ाई करनी है।

जज साहब, मुझे बचा लीजिए… मुझे अभी पढ़ना है, शादी नहीं करनी। हाईकोर्ट में एक युवती ने जज के सामने ऐसी ही गुहार लगाई। युवती ने बताया कि घरवाले उसकी जबरदस्ती शादी करवा रहे थे लेकिन उसे अभी पढ़ाई करनी है। मामला सुनने के बाद हाईकोर्ट ने उसके पक्ष के फैसला सुनाया। अदालत ने साफ किया कि किसी भी बालिग लड़की को संविधान से मिले अधिकार के तहत अपनी मर्जी से फैसले लेने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि न तो सरकार और न ही उसके माता-पिता उसे उसकी मर्जी के खिलाफ शादी करने के लिए मजबूर कर सकते हैं।
मामला बॉम्बे हाईकोर्ट का है। यहां कार्यवाहक चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखद की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि रहने की जगह, शादी या उच्च शिक्षा से जुड़े मामले व्यक्तिगत पसंद के विषय हैं और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित हैं। इन्हें माता-पिता के आश्वासन के आधार पर भी दरकिनार नहीं किया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल बॉम्बे हाईकोर्ट में एक 21 वर्षीय युवती ने अपने घरवालों के खिलाफ याचिका दायर की थी। इसमें उसने बताया कि उसे उसके परिवार के लोगों से लगातार धमकियां मिल रही हैं। बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक युवती ने बीते 15 जून को हैदराबाद में स्थित अपना घर छोड़ दिया था। उसने बताया कि वह अपने से करीब 10 साल बड़े चचेरे भाई शादी नहीं करना चाहती थी। इसके बजाय वह उच्च शिक्षा हासिल कर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है, लेकिन घरवाले इसके लिए तैयार नहीं।
युवती के घर छोड़ने के बाद उसके माता-पिता ने हैदराबाद पुलिस में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करा दी थी। इसके बाद जबरन शादी की आशंका को देखते हुए युवती ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने गौर किया कि युवती एक बेहद रूढ़िवादी परिवार से आती है, जहां उसके विचारों के लिए कोई जगह नहीं थी और उस पर काफी अधिक दबाव बनाया रहा है।
क्या बोला हाईकोर्ट?
मामले की सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने कुछ अहम टिप्पणियां की हैं। कोर्ट ने कहा, “वह 21 साल की एक बालिग महिला है और ये फैसला करने के लिए सक्षम है कि वह कहां रहना चाहती है, वह शादी करना चाहती है या नहीं और क्या वह आगे पढ़ना चाहती है। ये सभी मामले व्यक्तिगत हैं और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले अधिकारों का हिस्सा हैं। न तो उसके माता-पिता और न ही राज्य उसे उसकी इच्छा के खिलाफ माता-पिता के घर लौटने के लिए दबाव बना सकता है।”
गुमशुदगी की रिपोर्ट बंद करने का आदेश
अदालत ने युवती के माता-पिता से भी अलग से बात की, जिन्होंने एक हलफनामा दायर कर आश्वासन दिया कि बेटी पर शादी के लिए दबाव नहीं डाला जाएगा और उसकी आगे की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं खड़ी की जाएगी। हालांकि कोर्ट ने उनके इस आश्वासन को तो स्वीकार किया, लेकिन साथ ही कहा कि माता-पिता का आश्वासन बेटी की खुद की पसंद से ऊपर नहीं हो सकता। हाईकोर्ट ने माना कि युवती को 'गुमशुदा व्यक्ति' मानने या उसे हैदराबाद वापस भेजने के लिए किसी भी तरह की प्रक्रिया को जारी रखने का कोई मतलब नहीं है। इसीलिए अदालत ने तेलंगाना पुलिस को गुमशुदगी की रिपोर्ट को बंद करने का निर्देश दिया।
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लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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