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ब्लू हेलमेट्स अब और मजबूत; UN शांति मिशनों में आत्मनिर्भर भारत की छाप, DCOAS ने बताया

ब्लू हेलमेट्स अब और मजबूत; UN शांति मिशनों में आत्मनिर्भर भारत की छाप, DCOAS ने बताया

संक्षेप:

भारतीय सेना के उपप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर ने कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में तैनात अपने सैनिकों की सुरक्षा, गतिशीलता और रसद व्यवस्था को मजबूत किया है, जिसमें स्वदेशी प्लेटफॉर्मों की तैनाती भी शामिल है।

Nov 30, 2025 05:49 pm ISTDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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संयुक्त राष्ट्र के सबसे खतरनाक और दुर्गम शांति मिशनों में तैनात भारतीय ब्लू हेलमेट्स अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित, तेज और आत्मनिर्भर हो चुके हैं। भारतीय सेना के उपप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर ने खुलासा किया है कि 'आत्मनिर्भर भारत' की ताकत अब सीधे UN के युद्ध जैसे इलाकों में दिख रही है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी कल्याणी M4 बख्तरबंद वाहन, शेर्प ऑल-टेरेन व्हीकल और चार्टर्ड कार्गो फ्लाइट्स से तुरंत रसद सप्लाई तक, हर कदम पर भारत ने अपने शांतिरक्षकों को अजेय कवच दे दिया है।

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लेफ्टिनेंट जनरल कपूर ने कहा कि हमारे आधुनिकीकरण के सभी प्रयास 'आत्मनिर्भर भारत' की अवधारणा पर आधारित हैं, जिससे हमारे ब्लू हेलमेट्स (नीले हेलमेट वाले शांतिरक्षक) की सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने बताया कि ये उन्नयन भारत के व्यापक आत्मनिर्भरता लक्ष्यों से गहराई से जुड़े हुए हैं। (संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षकों को उनके हल्के नीले रंग की बेरी या हेलमेट के कारण ब्लू बेरेट या ब्लू हेलमेट कहा जाता है।)

उप सेना प्रमुख (DCOAS) ने आगे कहा कि सेना ने गहन एवं शत्रुतापूर्ण इलाकों में सैनिकों की आवाजाही और संचालन क्षमता बढ़ाने के लिए कई नए प्लेटफॉर्म तैनात किए हैं। उन्होंने कहा कि हमने गतिशीलता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देते हुए अपने सैनिकों के उपकरणों में उल्लेखनीय सुधार किया है। इसमें उन्नत विस्फोट-प्रतिरोधी कल्याणी एम4 बख्तरबंद वाहन और दुर्गम इलाकों के लिए शेर्प ऑल-टेरेन व्हीकल (एटीवी) जैसे स्वदेशी एवं विशेष वाहनों की तैनाती शामिल है।

'ब्लू हेलमेट' अभियानों में रसद सहायता के बारे में लेफ्टिनेंट जनरल कपूर ने कहा कि सेना ने यह सुनिश्चित किया है कि शांतिरक्षकों को, विशेष रूप से आपातकालीन स्थितियों में, बिना किसी देरी के सभी आवश्यक आपूर्ति और सहायता तुरंत मिले। डीसीओएएस ने कहा कि हमारी रसद व्यवस्था का भी आधुनिकीकरण किया गया है। आपात स्थिति में हम चार्टर्ड कार्गो विमानों के माध्यम से जरूरी दवाइयाँ और स्पेयर पार्ट्स की त्वरित डिलीवरी सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सुधार केवल परिवहन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारतीय सैनिकों की विश्वसनीय परिचालन तैयारियों को मजबूत करने का व्यापक प्रयास हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल कपूर ने कहा कि ये नए प्लेटफॉर्म और प्रणालियां बेहतर सुरक्षा प्रदान करते हैं तथा सभी मिशन क्षेत्रों में हमारी सैन्य और परिचालन पहुंच में नाटकीय सुधार लाते हैं। एक सवाल के जवाब में डीसीओएएस ने बताया कि भारत के सभी मिशन ‘वेट लीज’ व्यवस्था के तहत हैं, यानी तैनात उपकरणों के रखरखाव और परिचालन आवश्यकताओं की पूरी जिम्मेदारी योगदान देने वाला देश (भारत) ही उठाता है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap
देवेन्द्र कश्यप, लाइव हिंदुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर। पटना से पत्रकारिता की शुरुआत। महुआ न्यूज, जी न्यूज, ईनाडु इंडिया, राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे बड़े संस्थानों में काम किया। करीब 11 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत। MCU भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई। पटना व‍िश्‍वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में नेशनल, इंटरनेशनल डेस्क पर सेवा दे रहे हैं। और पढ़ें
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