बंगाल में बीएलओ की मौत, परिवार ने एसआईआर के कार्यभार को बताया कारण

Feb 06, 2026 10:55 pm ISTMadan Tiwari भाषा, कोलकाता
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उनके परिवार के सदस्यों ने यह भी कहा कि मुखोपाध्याय को उम्र संबंधी बीमारियां थीं और वह बीएलओ के कर्तव्यों को निभाने के लिए अनिच्छुक थीं, लेकिन उनके पास प्रशासनिक आदेशों का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

बंगाल में बीएलओ की मौत, परिवार ने एसआईआर के कार्यभार को बताया कारण

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में एक बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) की दिल का दौरा पड़ने से मौत होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े कार्यभार को इसका कारण बताया, जबकि भाजपा ने राज्य सरकार पर इस घटना को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। माया मुखोपाध्याय (58) हरिहरपारा ब्लॉक के अंतर्गत श्रीपुर नामुपाड़ा शिशु शिक्षा केंद्र में प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका थीं और हाल में उन्हें एसआईआर कवायद के बीच बूथ नंबर 251 के लिए बीएलओ ड्यूटी पर तैनात किया गया था।

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उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि बृहस्पतिवार रात को घर पर ही वह बेहोश हो गई और अस्पताल ले जाने के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनके परिवार ने आरोप लगाया कि बीएलओ की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद मुखोपाध्याय गंभीर मानसिक तनाव में थीं और उन्हें डर था कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाये जाने पर ग्रामीणों की ओर से विरोध का सामना करना पड़ेगा। उनके छोटे बेटे रुबेल मंडल ने पत्रकारों से कहा, ''बीएलओ बनने के बाद मेरी मां मानसिक दबाव सहन नहीं कर पाईं। उनकी तबीयत खराब थी और कुछ समय पहले उन्हें मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के आईसीयू में भी भर्ती कराया गया था।''

उन्होंने दावा किया कि उनके प्रभार वाले बूथ में लगभग 830 मतदाता थे और एसआईआर प्रक्रिया के तहत 320 से अधिक नोटिस जारी किए गए थे। मोंडल ने कहा, ''वह बार-बार कहती थी कि अगर नाम मिटा दिए गए तो गांव वाले आकर हमारे घर पर हमला कर सकते हैं। वह लगातार डर के साये में जीती थी।'' उनके परिवार के सदस्यों ने यह भी कहा कि मुखोपाध्याय को उम्र संबंधी बीमारियां थीं और वह बीएलओ के कर्तव्यों को निभाने के लिए अनिच्छुक थीं, लेकिन उनके पास प्रशासनिक आदेशों का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

हरिहरपाड़ा के बीडीओ सेरिंग जाम भूटिया ने मौत की पुष्टि की और कहा कि प्रशासन मामले की जांच कर रहा है। उन्होंने कहा, ''उनकी मृत्यु हृदयाघात से हुई। हमें सूचित किया गया है कि वे अस्वस्थ थीं। विवरण जुटाने के लिए एक प्रतिनिधि को भेजा गया है।'' हरिहरपाड़ा से तृणमूल कांग्रेस के विधायक, नियामत शेख ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया को जिस तरीके से लागू किया जा रहा है, उससे बीएलओ के बीच दहशत पैदा हो गई है। उन्होंने दावा किया, ''पहले तो वह ठीक थीं, लेकिन बीएलओ का काम मिलने के बाद से वह बहुत डरी हुई थीं। कई बीएलओ ने हमसे संपर्क करके बताया है कि वे दबाव सहन नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन नौकरी खोने के डर से काम जारी रखे हुए हैं।''

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी इसी तरह की चिंताएं व्यक्त कीं। पूर्व विधायक इंसार अली बिस्वास ने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर बीएलओ को ''परेशान'' किया जा रहा है और अत्यधिक दबाव के कारण कई लोग बीमार पड़ रहे हैं। कांग्रेस के स्थानीय नेता एवं हरिहरपाड़ा ब्लॉक अध्यक्ष जहांगीर शाह ने मुखोपाध्याय की मौत की गहन जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि ''एसआईआर के काम से संबंधित असहनीय दबाव'' के कारण उनकी मौत हुई। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को चुनाव प्रक्रिया के संचालन पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। भाजपा ने हालांकि इन आरोपों को खारिज करते हुए तृणमूल कांग्रेस पर इस घटना को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया।

Madan Tiwari

लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी को मीडिया में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान में हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।


यूपी-बिहार की पॉलिटिक्स से लेकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक खबरों को कवर करने का लंबा अनुभव है। पॉलिटिकल न्यूज में ज्यादा रुचि है और पिछले एक दशक में देशभर में हुए विभिन्न विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों को भी कवर किया है। लाइव हिन्दुस्तान के लिए मदन देश-विदेश में रोजाना घटित होने वाली खबरों के साथ-साथ पॉलिटिकल खबरों का एनालिसिस, विभिन्न अहम विषयों पर एक्सप्लेनर, ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज आदि कवर करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से लेकर मिडिल ईस्ट में असली वॉर तक की इंटरनेशनल खबरों पर लिखते-पढ़ते रहते हैं। पिछले एक दशक में पत्रकारिता क्षेत्र में कई पुरस्कार मिल चुके हैं। मदन ने लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर, मंथली अवॉर्ड्स, पॉपुलर च्वॉइस, एचटी स्टार अवॉर्ड्स समेत कई पुरस्कार जीते हैं।

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