
‘राष्ट्रीय बालक’ को दुखी करने के लिए क्षमा चाहते हैं, भाजपा प्रभारी ने राहुल गांधी पर कसा तंज
संक्षेप: बिहार के चुनावी नतीजों में एनडीए ने 243 सीटों वाली विधानसभा में 202 सीटें जीतकर तीन-चौथाई बहुमत हासिल किया। भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि जदयू ने 85 सीटें जीतीं।
बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ऐतिहासिक जीत के बाद बिहार भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े ने बिना नाम लिए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधा। तावड़े ने 14 नवंबर को यानी बाल दिवस के मौके पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए 'राष्ट्रीय बालक' को 'दुखी' करने के लिए माफी मांगी। उनका यह तंज कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर था, जिसमें पार्टी मात्र 6 सीटों पर सिमट गई।

तावड़े ने लिखा, हम ‘राष्ट्रीय बालक’ को बाल दिवस पर अपसेट करने के लिए क्षमा चाहते हैं। यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है। बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को मिली प्रचंड जीत पर खुशी जताते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव और राज्य प्रभारी विनोद तावड़े ने शुक्रवार को कहा कि बिहार की जनता ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ संबंधी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
तावड़े ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बिहार के मतदाताओं ने “सच और झूठ को अलग पहचानने की क्षमता दिखाते हुए” फर्जी दावों पर विश्वास नहीं किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोप को ही देख लीजिए। अगर किसी को पहले से पता था कि बिहार के चुनावी नतीजे कैसे आएंगे, तो वह राहुल गांधी थे। इसलिए वे दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन करके पहले से ही अपनी हार का बहाना बना रहे थे, मानो कहना चाह रहे हों कि हम हार गए क्योंकि वोट चोरी हो गए। लेकिन बिहार में वोट चोरी जैसी कोई बात थी ही नहीं।”
उन्होंने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान का जिक्र करते हुए कहा, “जिन लोगों के नाम हटाए गए, वे या तो डुप्लीकेट, फर्जी, बांग्लादेशी या अवैध घुसपैठिए थे।” तावड़े ने कहा कि बिहार से रोजगार की तलाश में स्थायी रूप से बाहर बसे लोगों और अवैध घुसपैठियों दोनों को ही सूची से हटाया जाना स्वाभाविक था। उन्होंने कहा, “इसीलिए बिहार के लोगों ने राहुल गांधी के आरोपों को ठुकरा दिया और कहा कि यह कोई मुद्दा ही नहीं था।”
बिहार के चुनावी नतीजों में एनडीए ने 243 सीटों वाली विधानसभा में 202 सीटें जीतकर तीन-चौथाई बहुमत हासिल किया। भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि जदयू ने 85 सीटें जीतीं। लोजपा (रामविलास) को 19, हम (से.) को 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4 सीटें मिलीं।
महागठबंधन की हालत खराब रही। राजद को केवल 25 सीटें, कांग्रेस को मात्र 6 सीटें, CPI(ML)(L) को 2, CPI(M) को 1, IIP को 1 सीट मिली। एआईएमआईएम को 5 और बसपा को 1 सीट हासिल हुई। प्रशांत किशोर का “जन सुराज” अपना खाता भी नहीं खोल सका। यह दूसरी बार है जब एनडीए ने बिहार विधानसभा में 200 से अधिक सीटें जीतीं। 2010 में गठबंधन ने 206 सीटें हासिल की थीं।





