AICC की बैठक में थरूर के न पहुंचने पर BJP का 'टुकड़े-टुकड़े' तंज, CONG क्या बोली?
कांग्रेस सांसद शशि थरूर के AICC की मीटिंग में न पहुंचने को लेकर भाजपा ने तंज कसा है। भाजपा की तरफ से कहा गया कि कांग्रेस इस समय टुकड़े-टुकड़े मोड में है। वहीं, कांग्रेस पार्टी के सांसद इमरान मसूद ने कहा कि थरूर कांग्रेस पार्टी का कोई बड़ा हिस्सा नहीं हैं।

Shashi Tharoor: कांग्रेस सांसद शशि थरूर पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। हाल ही में जब वह पार्टी की बैठक में शामिल नहीं हुए, तो भाजपा ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी इस समय टुकड़े-टुकड़े मोड में चल रही है, यह दो हिस्सों में बंटी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के मंत्रियों को अपने ही नेताओं पर भरोसा नहीं है। दूसरी तरफ, कांग्रेस नेता इमरान मसूद से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा थरूर पार्टी का कोई बड़ा हिस्सा नहीं है। ऐसे में अगर वह मौजूद नहीं थे, तो इससे ज्यादा कोई फर्क नहीं पड़ता।
एएनआई से बात करते हुए मसूद ने कहा, "शशि थरूर कोई बहुत बड़ा हिस्सा नहीं हैं। नहीं दिखे तो नहीं दिखे, ऐसा कुछ नहीं है।” इसके अलावा कोच्चि में हुई महापंचायत में भी राहुल गांधी द्वारा थरूर का नाम लिए जाने के सवाल पर भी मसूद ने राहुल गांधी का समर्थन किया। मसूद के अलावा बाकी नेताओं ने कांग्रेस पार्टी और शशि थरूर के बीच में संबंध पर हल्का रास्ता अपनाया। पार्टी नेताओं की तरफ से कहा गया कि थरूर और केंद्रीय नेतृत्व के बीच में कोई मतभेद नहीं है।
पूनावाला का तंज
कांग्रेस के नेतृत्व के अलावा भाजपा की तरफ से शशि थरूर के मीटिंग से गैरहाजिर रहने के बड़ी ही बारीकी से देखा गया। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक पूनावाला ने कहा, "एक बार फिर कांग्रेस टुकड़े-टुकड़े मोड में है, दो हिस्सों में बंटी हुई, जैसे केरल, कर्नाटक, राजस्थान में या फिर राहुल कांग्रेस बनाम प्रियंका कांग्रेस।”
पूनावाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व शशि थरूर से इसलिए नाराज है क्योंकि उन्होंने राहुल गांधी के झूठ की बजाए राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी, लालकृष्ण आडवाणी को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं दी और देश के पक्ष में अपना मत रखा। उन्होंने कहा, "वे (कांग्रेस) इतने नाराज हैं कि उन्होंने उनके खिलाफ फतवा जारी कर दिया है। स्वाभाविक प्रतिक्रिया के तौर पर अब डॉक्टर थरूर भी कांग्रेस के कार्यक्रमों से दूरी बना रहे हैं।
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस सांसद थरूर ने दिल्ली में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में इसलिए हिस्सा नहीं लिया क्योंकि उनकी पहले से केरल लिटरेचर फेस्टिवल में एक प्रतिबद्धता थी, जहां उन्होंने अपनी हालिया किताब ‘श्री नारायण गुरु’ पर बात की।
इससे पहले मई 2025 में, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत का पक्ष रखने के लिए कई देशों की यात्रा पर गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनने को लेकर थरूर को अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं की आलोचना का सामना करना पड़ा था।
क्या है विवाद?
कांग्रेस पार्टी और थरूर के बीच में हालिया विवाद 19 फरवरी के बाद शुरू हुआ। 19 जनवरी को कोच्चि में आयोजित कांग्रेस की महापंचायत में थरूर अलग-थलग देखे गए। इसके बाद दिल्ली में आयोजित वर्किंग कमेटी की बैठक में उनकी गैरमौजूदगी सवालों के घेरे में देखी गई। हालांकि, बकौल थरूर उन्होंने पहले ही राहुल गांधी को इसके बारे में सूचित कर दिया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक 19 जनवरी को विवाद को हवा उस वक्त मिली जब कार्यक्रम में भाषण दे रहे थरूर को गांधी के आने पर अपना भाषण जल्दी खत्म करने के लिए कहा गया। इसके बाद गांधी वहां आए और 6 अन्य लोगों ने अपनी बात रखी, लेकिन थरूर को बोलने का मौका नहीं मिला। इसके कुछ ही देर बाद, राहुल ने अपने भाषण में 12 कांग्रेसी नेताओं के नाम लिए, लेकिन थरूर का नाम नहीं लिया, जबकि वे उसी पंक्ति में बैठे हुए थे। गांधी ने केसी वेणुगोपाल सहित कई पार्टी नेताओं का अभिवादन किया, लेकिन सीधे तौर पर थरूर का अभिवादन नहीं किया। बाद में थरूर ने इस ‘दुर्व्यवहार’ की ओर इशारा किया था और केसी वेणुगोपाल तथा दीपा दास मुंशी सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को संदेश भी भेजे थे।
लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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