महिला आरक्षण पर मिली हार को बंगाल में भुनाएगी भाजपा, PM मोदी ने तैयार कर दी पिच

Apr 18, 2026 05:45 am ISTHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान, रामनारायण श्रीवास्तव, नई दिल्ली।
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साथ ही भाजपा ने बाद की रणनीति पर काम शुरू कर दिया था। राजग की महिला सांसदों ने विधेयक के गिरने के साथ ही संसद भवन के प्रवेश द्वार पर बरसते पानी के बीच विपक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

महिला आरक्षण पर मिली हार को बंगाल में भुनाएगी भाजपा, PM मोदी ने तैयार कर दी पिच

देश की आधी आबादी को साधने की भाजपा की रणनीति का बड़ा एजेंडा महिलाओं को 2029 के लोकसभा चुनावों में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का मंसूबा भले ही पूरा न हो सका हो, लेकिन वह मोदी सरकार की संसद में इस पहली बड़ी हार को भविष्य की जीत का आधार बनाने की कोशिश करेगी। इसकी शुरुआत मौजूदा पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों से ही हो जाएगी और 2029 का लोकसभा चुनाव इसका बड़ा मंच होगा। इस दौरान भाजपा और उसके सहयोगी विपक्षी दलों पर लगातार महिला विरोधी होने का आरोप चस्पा करने की कोशिश करते रहेंगे।

विधेयक के लोकसभा में गिरने के ठीक बाद संसद में राजग के नेताओं की बैठक हुई, जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया गया। विपक्ष के तेवरों को देखते हुए सरकार को गुरुवार को साफ हो गया था कि उसके लिए विपक्ष के बिना दो तिहाई का समर्थन मिलना मुश्किल होगा। यही कारण रहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में विधेयक के गिरने के बाद की भाजपा की पिच तैयार कर दी, जिस पर गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को निशाने पर लिया।

साथ ही भाजपा ने बाद की रणनीति पर काम शुरू कर दिया था। राजग की महिला सांसदों ने विधेयक के गिरने के साथ ही संसद भवन के प्रवेश द्वार पर बरसते पानी के बीच विपक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। शुक्रवार को वह विपक्षी नेताओं के घरों का घेराव करेंगी।

चुनाव प्रचार में भी बड़ा मुद्दा होगा

भाजपा देशभर में महिलाओं के धरना प्रदर्शन के जरिए विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाएगी। पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु के बाकी चुनाव प्रचार में भी यह राजग का बड़ा मुद्दा होगा। भाजपा इस मुद्दे को 2029 के लोकसभा चुनावों तक गरमाएगी रखेगी। तब तक उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के चुनाव में वह इसे प्रखरता से उठाएगी। जिस तरह से वह आपातकाल को लेकर कांग्रेस को घेरती है उसी तरह उसे महिला विरोधी बताने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी।

ताकत को बढ़ाने का काम

सूत्रों का कहना है कि भाजपा को जब 2024 में अपना बहुमत नहीं मिला तब उसके लिए विपक्ष के साथ इतने टकराव वाली स्थिति में दो तिहाई बहुमत कैसे मिल सकता था। इसलिए उसने इस विधेयक से विपक्ष को घेरने की कोशिश की और अगले चुनाव में देश की आधी आबादी को साथ लेकर फिर से अपनी ताकत को बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है।

हालांकि विपक्ष यह सवाल भी उठा रहा है कि सरकार की मंशा राजनीति की ज्यादा थी और विधेयक पारित कराने की कम। क्योंकि उसने इसके लिए पहले से विपक्ष के साथ सार्थक संवाद ही नहीं किया। विपक्ष ने इस पर सर्वदलीय बैठक की मांग की, जिसे नहीं माना। उसने चुनावों के बाद सत्र बुलाने को कहा, उसे भी नहीं माना और तो और संसद में भी विपक्ष से अपील करने के साथ धमकाने की भाषा बोली। इससे साफ है कि वह विधेयक से सिर्फ राजनीतिक फायदा लेना चाहती थी, चाहे वह पारित होता या न होता।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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