स्मृति ईरानी को इनाम, पीयूष गोयल का बढ़ गया काम; भाजपा की नई टीम से क्या संकेत
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि उनके पिता वेद प्रकाश गोयल भी लंबे समय तक पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रहे थे। गोयल अकेले ऐसे केंद्रीय मंत्री हैं जिन्हें पार्टी की नई टीम में शामिल किया गया है।

उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। करीब 7 महीने पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन की इस नई टीम में एक तरफ जहां कई नए चेहरों को मौका दिया गया है, वहीं दूसरी कुछ बड़े नेताओं की वापसी भी हुई है। नई टीम में पहले के मुकाबले युवा चेहरों को भी ज्यादा जगह मिली है। इन सबके बीच कुछ ऐसे नाम हैं जो सबसे ज्यादा चर्चा में हैं।
भाजपा की नई टीम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की वापसी हुई है। भाजपा के इस कदम को उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को कोषाध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि पीयूष गोयल को केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाया जा सकता है। इसके अलावा पार्टी के पूर्व महासचिव राम माधव की वापसी भी बहुत कुछ कहती है। समझिए नितिन नवीन की नई टीम के 3 बड़े संकेत-
स्मृति ईरानी को मिला ईनाम
भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भले ही औपचारिक रूप से अध्यक्ष के बाद आते हों, लेकिन वास्तविक राजनीतिक प्रभाव अक्सर राष्ट्रीय महासचिवों के पास होता है। ऐसे में स्मृति ईरानी का इस पद पर प्रमोट होना काफी अहम माना जा रहा है। इससे पहले अमेठी में मिली हार के बाद 2024 में केंद्रीय कैबिनेट से बाहर होने के बाद भी स्मृति ईरानी पार्टी के अभियानों में सक्रिय रहीं। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जमकर प्रचार किया, जहां उनकी बंगाली भाषा और संवाद शैली उपयोगी साबित हुई। इसके बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार में भी प्रचार किया। पार्टी ने उनके इसी समर्पण को देखते हुए उन्हें यह राष्ट्रीय भूमिका सौंपी है।
पीयूष गोयल पर सस्पेंस
नई टीम में सबसे दिलचस्प नाम पीयूष गोयल का है। पीयूष गोयल को पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। खास बात यह है कि गोयल मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री बनने से पहले भी भाजपा के कोषाध्यक्ष रह चुके हैं। अब दोबारा उनकी नियुक्ति के बाद चर्चा है कि गोयल को मंत्री पद से हटाया जा सकता है। इसकी वजह है भाजपा का 'एक व्यक्ति, एक पद' वाला सिद्धांत। पार्टी के कई बड़े नेताओं ने एक पद को संभालने से पहले तत्कालीन पदों से इस्तीफा दिया है। दूसरी तरफ मोदी सरकार में कैबिनेट फेरबदल की अटकलें भी हैं। ऐसे में पीयूष गोयल कैबिनेट से इस्तीफा दे सकते हैं।
राम माधव की वापसी के क्या मायने
भाजपा के पूर्व महासचिव राम माधव ने बड़ी वापसी की है। 2020 में जेपी नड्डा की टीम में उन्हें महासचिव पद से हटा दिया गया था। इसके बाद 2021 में वे RSS में लौट गए जहां उन्हें कार्यसमिति सदस्य बनाया गया। इसके बाद 2024 में भाजपा ने उन्हें और केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी को जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव का प्रभारी बनाया। 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 29 सीटें जीतीं। यह जम्मू कश्मीर में भाजपा अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन था। इस सफलता के बाद अब उन्हें नितिन नवीन की टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। इस कदम को संघ के साथ भाजपा के संतुलन साधने के कदम का हिस्सा भी माना जा रहा है।


