ममता बनर्जी से अलग होने वालों के लिए दरवाजे बंद? भाजपा ने भी लेने से मना कर दिया

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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ममता बनर्जी की पार्टी से अलग होकर एनसीपीआई में विलय करने वाले बागी सांसदों के लिए भाजपा ने भी दरवाजे बंद कर दिए हैं। पार्टी ने साफ कर दिया है कि अभी नेताओं को शामिल कराने की कोई योजना नहीं है। राज्य में भाजपा पहली बार सत्ता में आई है।

TMC BJP
भाजपा ने साफ कर दिया है कि अभी किसी भी बागी नेता को शामिल करने की कोई योजना नहीं है (ANI Photo)

पश्चिम बंगाल में उस समय अटकलों का दौर शुरू हो गया, जब एक बागी सांसद ने कहा दिया है 17 MPs भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। दावा किया गया था कि ये सांसद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस छोड़कर NCPI में विलय करने वाले हैं। हालांकि, भाजपा ने साफ कर दिया है कि फिलहाल किसी को भी शामिल करने की कोई योजना नहीं है।

राज्य में भाजपा की कमान संभाल रहे शमिक भट्टाचार्य ने फिलहाल इन अटकलों पर विराम लगाया है। उन्होंने कहा है कि पार्टी महज इस आधार पर किसी को अपने साथ शामिल नहीं करेगी कि वह भाजपा में शामिल होना चाहता है। भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी केवल इसलिए किसी को अपने साथ शामिल नहीं करेगी क्योंकि वह भाजपा में आना चाहता है। उन्होंने सवाल किया कि बासुनिया जिस भाजपा की बात कर रहे हैं, क्या वह 'मंगल ग्रह वाली भाजपा' है।

उन्होंने कहा, 'जहां तक मेरी जानकारी है, तृणमूल या एनसीपीआई से कोई भी भाजपा में शामिल नहीं हो रहा है। राज्य के लोग यह नहीं भूले हैं कि तृणमूल शासन के दौरान इन नेताओं और सांसदों ने किस तरह के अत्याचार किए थे।'

क्या चुनाव है वजह?

खास बात है कि ये घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहे हैं, जब राज्य में निकाय चुनाव होने हैं। सितंबर की शुरुआत में भट्टाचार्य ने कहा था, 'एनसीपीआई एक नई पार्टी है, जिसका गठन हाल ही में हुआ है। उसने तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा और किसी तरह जीत हासिल की। वह अब राजग में शामिल हो गई है और उसका स्वागत किया गया है। लेकिन यह सब दिल्ली में हुआ है, जो कोलकाता से करीब 1,500 किलोमीटर दूर है। उन्हें कोलकाता तक पहुंचने में समय लगेगा।'

उन्होंने कहा, 'भाजपा ने पश्चिम बंगाल में अपने दम पर चुनाव लड़ा और सत्ता तक पहुंची है। न तो किसी की कृपा से, न किसी के आशीर्वाद से और न ही अपनी विचारधारा से समझौता करके।'

सोमवार को भाजपा प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा, 'एनसीपीआई सांसद के बयान के लिए भाजपा को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।' दरअसल, सांसद जगदीशचंद्र बासुनिया ने दावा कर दिया था कि दुर्गा पूजा के पहले या बाद में 17 सांसद भाजपा में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने ये भी दावा किया था कि सांसदों ने दल बदल का फैसला अयोग्य ठहराए जाने की कार्रवाई से बचने के लिए किया है।

मौका मांग रहे हैं बागी सांसद

बागी नेताओं ने साथ चुनाव लड़ने की मांग की है। साथ ही दावा किया है कि गठबंधन होगा। बागी सांसदों में शामिल वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार ने कहा था, 'हम एनडीए में शामिल सबसे बड़े दल हैं। इसलिए चुनाव के दौरान हम NDA के सदस्यों के रूप में चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में हमें भाजपा के साथ गठबंधन करना होगा। चुनाव नजदीक आने पर इस बारे में फैसला लिया जाएगा, लेकिन गठबंधन होने की पूरी संभावना है।'

ये हैं 20 बागी सांसद

इन बागी सांसदों में कोकोली घोष दस्तीदार के अलावा, सुदीब बंदोपाध्याय, सायोनी घोष, यूसुफ पठान, शताब्दी रॉय, अबू ताहेर समेत 20 नाम शामिल हैं। खास बात है कि तीन मुस्लिम सांसद पहले ही साफ कर चुके हैं कि वो भाजपा में नहीं जा रहे हैं और एनडीए को समर्थन दे रहे हैं। ताहेर ने दावा किया है कि वह, यूसुफ पठान और खलीलुर रहमान शामिल नहीं होंगे।

Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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