ममता बनर्जी से अलग होने वालों के लिए दरवाजे बंद? भाजपा ने भी लेने से मना कर दिया
ममता बनर्जी की पार्टी से अलग होकर एनसीपीआई में विलय करने वाले बागी सांसदों के लिए भाजपा ने भी दरवाजे बंद कर दिए हैं। पार्टी ने साफ कर दिया है कि अभी नेताओं को शामिल कराने की कोई योजना नहीं है। राज्य में भाजपा पहली बार सत्ता में आई है।

पश्चिम बंगाल में उस समय अटकलों का दौर शुरू हो गया, जब एक बागी सांसद ने कहा दिया है 17 MPs भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। दावा किया गया था कि ये सांसद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस छोड़कर NCPI में विलय करने वाले हैं। हालांकि, भाजपा ने साफ कर दिया है कि फिलहाल किसी को भी शामिल करने की कोई योजना नहीं है।
राज्य में भाजपा की कमान संभाल रहे शमिक भट्टाचार्य ने फिलहाल इन अटकलों पर विराम लगाया है। उन्होंने कहा है कि पार्टी महज इस आधार पर किसी को अपने साथ शामिल नहीं करेगी कि वह भाजपा में शामिल होना चाहता है। भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी केवल इसलिए किसी को अपने साथ शामिल नहीं करेगी क्योंकि वह भाजपा में आना चाहता है। उन्होंने सवाल किया कि बासुनिया जिस भाजपा की बात कर रहे हैं, क्या वह 'मंगल ग्रह वाली भाजपा' है।
उन्होंने कहा, 'जहां तक मेरी जानकारी है, तृणमूल या एनसीपीआई से कोई भी भाजपा में शामिल नहीं हो रहा है। राज्य के लोग यह नहीं भूले हैं कि तृणमूल शासन के दौरान इन नेताओं और सांसदों ने किस तरह के अत्याचार किए थे।'
क्या चुनाव है वजह?
खास बात है कि ये घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहे हैं, जब राज्य में निकाय चुनाव होने हैं। सितंबर की शुरुआत में भट्टाचार्य ने कहा था, 'एनसीपीआई एक नई पार्टी है, जिसका गठन हाल ही में हुआ है। उसने तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा और किसी तरह जीत हासिल की। वह अब राजग में शामिल हो गई है और उसका स्वागत किया गया है। लेकिन यह सब दिल्ली में हुआ है, जो कोलकाता से करीब 1,500 किलोमीटर दूर है। उन्हें कोलकाता तक पहुंचने में समय लगेगा।'
उन्होंने कहा, 'भाजपा ने पश्चिम बंगाल में अपने दम पर चुनाव लड़ा और सत्ता तक पहुंची है। न तो किसी की कृपा से, न किसी के आशीर्वाद से और न ही अपनी विचारधारा से समझौता करके।'
सोमवार को भाजपा प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा, 'एनसीपीआई सांसद के बयान के लिए भाजपा को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।' दरअसल, सांसद जगदीशचंद्र बासुनिया ने दावा कर दिया था कि दुर्गा पूजा के पहले या बाद में 17 सांसद भाजपा में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने ये भी दावा किया था कि सांसदों ने दल बदल का फैसला अयोग्य ठहराए जाने की कार्रवाई से बचने के लिए किया है।
मौका मांग रहे हैं बागी सांसद
बागी नेताओं ने साथ चुनाव लड़ने की मांग की है। साथ ही दावा किया है कि गठबंधन होगा। बागी सांसदों में शामिल वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार ने कहा था, 'हम एनडीए में शामिल सबसे बड़े दल हैं। इसलिए चुनाव के दौरान हम NDA के सदस्यों के रूप में चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में हमें भाजपा के साथ गठबंधन करना होगा। चुनाव नजदीक आने पर इस बारे में फैसला लिया जाएगा, लेकिन गठबंधन होने की पूरी संभावना है।'
ये हैं 20 बागी सांसद
इन बागी सांसदों में कोकोली घोष दस्तीदार के अलावा, सुदीब बंदोपाध्याय, सायोनी घोष, यूसुफ पठान, शताब्दी रॉय, अबू ताहेर समेत 20 नाम शामिल हैं। खास बात है कि तीन मुस्लिम सांसद पहले ही साफ कर चुके हैं कि वो भाजपा में नहीं जा रहे हैं और एनडीए को समर्थन दे रहे हैं। ताहेर ने दावा किया है कि वह, यूसुफ पठान और खलीलुर रहमान शामिल नहीं होंगे।


