
ओवैसी से गठबंधन पर BJP केंद्रीय नेतृत्व नाराज, कहीं चिपक न जाए 'B-टीम' वाली बात
भाजपा को आशंका है कि महाराष्ट्र में महायुति के बीच विवादों का असर बीएमसी समेत विभिन्न महानगर पालिकाओं में हो सकता है। इस बार सबसे ज्यादा विवाद भाजपा व उसकी सहयोगी शिवसेना के साथ ही हुआ है।
महाराष्ट्र में नगर निकायों के गठन में भाजपा के एआईएमआईएम और कांग्रेस का साथ लेने पर केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य नेतृत्व को कड़ी नसीहत दी है। पार्टी को आशंका है कि इन घटनाओं का असर आगामी बीएमसी व अन्य महानगर पालिकाओं के चुनाव पर पड़ सकता है। राज्य इकाई ने भी इस मामले में सख्ती दिखाई है। चूंकि इन चुनावों में दल-बदल कानून लागू नहीं होता, ऐसे में पार्टी अब अपनी साख बचाने के लिए इसका सहारा ले रही है।
महाराष्ट्र में दो नगर परिषदों का मामला केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा और उस पर सख्त कार्रवाई भी की गई है। इनमें एक मामले में भाजपा ने असदुद्दीन औवेसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम से और दूसरे में कांग्रेस को साथ लिया था। केंद्र की सख्ती के बाद अकोला की अकोट नगर परिषद में भाजपा-एआईएमआईएम का गठबंधन तोड़कर इसे अंजाम देने वाले विधायक प्रकाश भरसखाले को नोटिस भी जारी किया गया है। पार्टी का कहना है कि चूंकि वह भाजपा के मूल काडर ने नहीं हैं, इसलिए यह गड़बड़ी हुई है।
भाजपा को आशंका है कि महाराष्ट्र में महायुति के बीच विवादों का असर बीएमसी समेत विभिन्न महानगर पालिकाओं में हो सकता है। इस बार सबसे ज्यादा विवाद भाजपा व उसकी सहयोगी शिवसेना के साथ ही हुआ है। हालांकि बड़े नेताओं ने सुलझा लिया। लेकिन विपक्षी दलों को मौका मिल गया। कांग्रेस व शिवसेना (यूबीटी) और मनसे भाजपा पर किसी भी हद तक जाने के आरोप लगा रहे हैं। यह प्रचार कर रहे हैं कि एआईएमआईएम भाजपा की ही बी टीम है।
कांग्रेसी पार्षद भाजपा में शामिल
एक अन्य मामले में भाजपा ने अपनी सहयोगी शिवसेना को ही हराने के लिए कांग्रेस का सहयोग लिया। अंबरनाथ नगरपालिका परिषद में शिवसेना को रोकने के लिए भाजपा ने कांग्रेस के 12 पार्षदों का समर्थन लिया। कांग्रेस ने इन पार्षदों पर कार्रवाई करते हुए उनको निलंबित किया और पूरे ब्लॉक इकाई को भंग कर दिया। हालांकि भाजपा ने इस मामले को अपने पक्ष में करने के लिए कांग्रेस के सभी पार्षदों को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया। यहां पर शिवसेना को आखिर उसने रोक ही दिया। भाजपा के साथ राकांपा व कुछ निर्दलीय भी रहे।
कांग्रेस ने पार्षदों को अयोग्य ठहराने की मांग उठाई
महाराष्ट्र कांग्रेस ने गुरुवार को कहा कि वह अंबरनाथ के 12 पार्षदों को अयोग्य ठहराने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी, जो पार्टी के सिंबल पर चुने गए थे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। पार्टी प्रवक्ता सचिन सावंत ने दावा किया कि पार्षदों ने कांग्रेस के सिंबल पर चुने जाने के बाद दल-बदल करके संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है। कहा कि पार्टी के सिंबल पर चुने जाने के बाद एक स्वतंत्र समूह बनाना या बाद में किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में शामिल होना न केवल अनैतिक है, बल्कि असंवैधानिक भी है।





