बिना रेट बताए पिला दिया 200 रुपये का तरबूज जूस, अब रेस्टोरेंट को देने पड़े 20000 रुपये
केरल के कोल्लम में बिना दाम बताए 200 रुपये का तरबूज जूस बेचना रेस्तरां को भारी पड़ गया। कंज्यूमर कोर्ट ने इसे सेवा में कमी मानते हुए होटल पर 20,000 रुपये का जुर्माना ठोक दिया है। जानें पूरा मामला।

केरल के कोल्लम जिले में एक रेस्तरां को बिना रेट बताए 200 रुपये का तरबूज का जूस बेचना भारी पड़ गया है। ग्राहक की शिकायत पर सुनवाई करते हुए कंज्यूमर कोर्ट ने रेस्तरां की इस हरकत को 'अनुचित व्यापार व्यवहार' माना है। इसके एवज में अदालत ने रेस्तरां को ग्राहक को 20,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता 28 सितंबर 2025 को कनाडा से लौटे अपने दो दोस्तों के साथ कोल्लम के 'डी लाइट हाउस' नाम के रेस्तरां में गया था। वहां उन्होंने खाना, शराब और बीयर के साथ-साथ एक गिलास तरबूज का जूस भी ऑर्डर किया। जब बिल आया, तो तरबूज के जूस के लिए 200 रुपये के साथ 5% जीएसटी (GST) जोड़ा गया था।
ग्राहक का कहना था कि कोल्लम जिले में कोई भी होटल एक गिलास जूस के लिए इतनी भारी रकम नहीं वसूलता। उन्होंने इस बिल को मनमाना और अनुचित बताते हुए कंज्यूमर कमीशन का दरवाजा खटखटाया।
रेस्तरां ने नहीं पेश किया अपना पक्ष
कंज्यूमर कमीशन की ओर से नोटिस भेजे जाने के बावजूद 'डी लाइट हाउस' रेस्तरां की तरफ से कोई अदालत में पेश नहीं हुआ। इसलिए कमीशन ने एकतरफा कार्रवाई की। शिकायतकर्ता ने बिल और आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी को सबूत के तौर पर पेश करते हुए बताया कि जूस सर्व करने से पहले उसकी कीमत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
कंज्यूमर कोर्ट ने क्या कहा?
कोल्लम कंज्यूमर कमीशन की अध्यक्ष एस के श्रीला और सदस्य स्टेनली हेरोल्ड की बेंच ने 15 जून को अपना आदेश सुनाया। इस आदेश की मुख्य बातें इस प्रकार हैं-
- कोर्ट ने माना कि होटलों को अपने खाने-पीने की चीजों के दाम तय करने का पूरा अधिकार है (जिसमें एंबियंस, सर्विस और ऑपरेशनल कॉस्ट शामिल होती है), लेकिन यह उनका दायित्व है कि ऑर्डर लेने से पहले वे ग्राहकों को कीमत बताएं।
- जूस सर्व करने से पहले उसकी कीमत न बताना 'सेवा में कमी' है। इससे ग्राहक को सोच-समझकर फैसला लेने का मौका नहीं मिला।
- अदालत ने रेस्तरां को आदेश दिया कि वह ग्राहक को मानसिक परेशानी, समय की बर्बादी और असुविधा के लिए 15,000 रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 5,000 रुपये (कुल 20,000 रुपये) का भुगतान करे।
- यह रकम 45 दिनों के भीतर चुकानी होगी। ऐसा न करने पर रेस्तरां को 9% सालाना ब्याज भी देना होगा।
जूस का रिफंड क्यों नहीं मिला?
अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि ग्राहक ने जूस पी लिया था, इसलिए 200 रुपये का रिफंड देना उचित नहीं है। हालांकि, रेस्तरां यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा कि उसने मेन्यू कार्ड या किसी अन्य तरीके से कीमत की जानकारी पहले दी थी, इसलिए ग्राहक भारी मुआवजे का हकदार है। अगर आपके साथ भी किसी सेवा में इस तरह की कोई धोखाधड़ी होती है, तो आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर कॉल कर सकते हैं।


