
मजदूरों को रेलवे स्टेशन पर मिला बैग, अंदर थे लाखों के गहने; लेकर चल दिए और फिर...
आरपीएफ और जीआरपी ने मामले की जांच शुरू की। स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज देखने पर पता चला कि 4 व्यक्ति बैग को सीट से उठा ले गए थे। फुटेज को कोननगर के स्थानीय लोगों को दिखाया गया, लेकिन किसी ने उन व्यक्तियों की पहचान नहीं की।
बिहार के 4 प्रवासी दिहाड़ी मजदूरों ने ईमानदारी की मिसाल पेश की है। उन्होंने एक बैंक अधिकारी के 10 लाख रुपये के सोने के गहनों को लौटा दिया, जिसे वो कोननगर रेलवे स्टेशन पर भूल गई थी। ये मजदूर सिवान से लिलुआ में काम करने आए थे। कोननगर की रहने वाली बैंक अधिकारी रूपश्री रविवार को हावड़ा जा रही थीं। वह वंदे भारत ट्रेन से कोडरमा के लिए रवाना होना था। सुबह करीब 5:30 बजे वे ट्रेन में सवार हुईं, लेकिन स्टेशन पर ही एक छोटा बैग छोड़ आईं। इसमें कीमती गहने थे। ट्रेन के चलने के बाद उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने तुरंत आरपीएफ और जीआरपी को सूचना दी।

आरपीएफ और जीआरपी ने मामले की जांच शुरू की। स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज देखने पर पता चला कि 4 व्यक्ति बैग को सीट से उठा ले गए थे। फुटेज को कोननगर के स्थानीय लोगों को दिखाया गया, लेकिन किसी ने उन व्यक्तियों की पहचान नहीं की। आरपीएफ ने फुटेज से एक फोन नंबर प्राप्त किया और उन मजदूरों से संपर्क किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि वे लिलुआ में काम करते हैं। मजदूरों का कहना था कि वे खुद भी बैग के मालिक की तलाश कर रहे थे।
चारों मजदूरों को किया गया सम्मानित
मजदूरों के मुताबिक, उन्होंने बैग के बारे में आसपास पूछताछ की और खुद पुलिस के पास गए थे। आखिरकार, उन्होंने गहनों से भरा बैग पुलिस को सौंप दिया। रूपश्री को अपने गहने वापस मिलने पर बेहद खुशी हुई। उन्होंने मजदूरों के प्रति आभार जताया। उनकी ईमानदारी से प्रभावित होकर पुलिस ने चारों मजदूरों को प्रत्येक को आर्थिक पुरस्कार देकर सम्मानित किया। मोहम्मद इस्माइल दिहाड़ी मजदूरों के लीडर हैं। उन्होंने इस मामले को लेकर कहा कि हम झुग्गी में किराए के कमरे में रहते हैं। लेकिन, हम कड़ी मेहनत से कमाना चाहते हैं।





