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1971 के बाद पहली बार ऐसी चुनौती… बांग्लादेश पर थरूर की अध्यक्षता वाली समिति की बड़ी चेतावनी, पाक-चीन दे रहे शह

1971 के बाद पहली बार ऐसी चुनौती… बांग्लादेश पर थरूर की अध्यक्षता वाली समिति की बड़ी चेतावनी, पाक-चीन दे रहे शह

संक्षेप:

संसदीय समिति ने चेतावनी दी है कि ढाका में चल रहा राजनीतिक बदलाव और रणनीतिक तालमेल ऐसी चुनौतियां पेश कर सकते हैं जो समय के साथ भारत की सुरक्षा और विदेश नीति के माहौल को बदल सकती हैं।

Dec 18, 2025 08:59 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Bangladesh India Relations: कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसदीय समिति ने चेतावनी दी है कि पूर्वी पड़ोसी देश बांग्लादेश में बदलती राजनीतिक स्थिति 1971 के मुक्ति संग्राम के बाद से पहली बार भारत के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बनकर उभरी है। हालांकि, समिति ने कहा है कि स्थिति अभी "अराजकता और अव्यवस्था में नहीं बदलेगी", लेकिन भारत को इसे संभालने में सावधानी बरतने की जरूरत है। इस संसदीय समिति ने सरकार को कई सिफारिशें सौंपी हैं, जिसमें मौजूदा अशांति और रणनीतिक चुनौती के पीछे बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों के उदय और दो पड़ोसियों यानी चीन और पाकिस्तान के बढ़ते प्रभाव को जिम्मेदार बताया गया है।

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संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि बांग्लादेश के मौजूदा हालात के पीछे शेख हसीना की अवामी लीग का पतन भी एक कारण है। शशि थरूर की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा संसद में पेश की गई यह रिपोर्ट गैर-सरकारी विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों की गवाही पर आधारित है, जिसमें कहा गया है कि भारत के लिए चुनौती अब अस्तित्व का संकट नहीं है, बल्कि यह ज़्यादा गहरी और लंबे समय तक चलने वाली है।

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भारत को तुरंत कोई बड़ा खतरा नहीं

समिति ने कहा है, "1971 में चुनौती अस्तित्वगत, मानवीय और एक नए राष्ट्र के जन्म की थी, जबकि बाद वाली चुनौती ज़्यादा गंभीर है,जो एक पीढ़ीगत असंतुलन, राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव और भारत से दूर संभावित रणनीतिक पुनर्गठन से जुड़ी है।" समिति ने कहा कि 1971 के उलट, बांग्लादेश में मौजूदा स्थिति से भारत को तुरंत कोई बड़ा खतरा नहीं है। हालांकि, समिति ने चेतावनी दी कि ढाका में चल रहा राजनीतिक बदलाव और रणनीतिक तालमेल ऐसी चुनौतियां पेश कर सकते हैं जो समय के साथ भारत की सुरक्षा और विदेश नीति के माहौल को बदल सकती हैं।

शेख हसीना और उनकी पार्टी एक बड़ी वजह

रिपोर्ट में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग के राजनीतिक दबदबे में गिरावट को अनिश्चितता में योगदान देने वाले एक बड़े कारण के रूप में बताया गया है। इसमें कमजोर होते संस्थागत नियंत्रण और घटते सार्वजनिक विश्वास की ओर इशारा किया गया, जिसके बारे में पैनल ने कहा कि इसने प्रतिस्पर्धी ताकतों के लिए राजनीतिक जगह बनाई है। समिति ने बांग्लादेश में जनवरी 2024 के चुनावों पर भी ध्यान दिया, जिसमें अवामी लीग ने 300 में से 224 सीटें जीतीं, लेकिन मतदाताओं की भागीदारी लगभग 40% रहने का अनुमान था, जिससे राजनीतिक वैधता और लोकप्रिय भागीदारी पर सवाल उठे।

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कट्टर इस्लामी राष्ट्रभावना उबाल मार रही

समिति के मुताबिक, बांग्लादेश में युवाओं के नेतृत्व में राष्ट्रवादी भावना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत के रूप में उभर रही है। रिपोर्ट में इस्लामी समूहों के फिर से उभरने की चेतावनी दी गई है, और इस कॉम्बिनेशन को आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संभावित अस्थिरता पैदा करने वाला कारक बताया गया है। समिति ने बांग्लादेश में चीन और पाकिस्तान के बढ़ते प्रभाव को भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक चिंता बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बदलते क्षेत्रीय गठजोड़ ढाका में भारत के पारंपरिक प्रभाव को कम कर सकते हैं और उसकी पड़ोसी सुरक्षा रणनीति को जटिल बना सकते हैं।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
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